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पांच साल में एक भी मुखबिर नहीं तलाश पाया स्वास्थ्य विभाग
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पांच साल में एक भी मुखबिर नहीं तलाश पाया स्वास्थ्य विभाग
बुलंदशहर। भ्रूण हत्या रोकने के लिए शुरू हुई महत्वाकांक्षी मुखबिर योजना जनपद में लगातार दम तोड़ रही है। जिले का स्वास्थ्य महकमा पांच साल में एक भी मुखबिर ढूंढने में नाकाम रहा। हरियाणा और राजस्थान की टीम मुखबिर को भेजकर समय-समय पर जिले में छापा मार कई सेंटरों पर लिंग परीक्षण करने वाले को रंगे हाथों पकड़ चुकी है।
शासन ने वर्ष 2017 में प्रदेश के सभी अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर नजर रखने के लिए मुखबिर योजना शुरू की। योजना के तहत आम लोगों को जोड़कर अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर स्टिंग ऑपरेशन कराने थे। इसके लिए बाकायदा विभाग की ओर से रुपये भी दिए जाते हैं और नकली ग्राहक बनाकर भ्रूण लिंग की जांच के लिए अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर भेजा जाता है। लिंग परीक्षण करते पकड़े जाने पर मुखबिर को प्रोत्साहन राशि दे दी जाती है। अफसरों के अनुसार सही सूचना देने वाले व्यक्ति को 60 हजार रुपये, मिथ्या ग्राहक बनने वाली महिला को एक लाख और उसके सहायक को 40 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का नियम है। यह प्रोत्साहन राशि शासन द्वारा तीन किस्तों में दी जाती है।
पोर्टेबल मशीन से चलता है लिंग परीक्षण का खेल
जिले में काफी संख्या में पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन हैं। मशीन संचालक प्रतिदिन अलग-अलग स्थानों पर इस कार्य को करता है। इसके लिए बाकायदा एक बड़ा गैंग जिले में सक्रिय है। जो लिंग परीक्षण कराने वाले को कोड वर्ड देता है और एक दिन पूर्व स्थान और समय बताकर गर्भवती महिला को बुलाता है। एक वर्ष पूर्व जिले के स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक पोर्टेबल मशीन पकड़ी गई, लेकिन उसके संचालक और लिंग परीक्षण करने का विभाग खुलासा नहीं कर सका।
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लोगों से संपर्क बनाकर भ्रूण हत्या और सेंटरों पर लिंग परीक्षण की सूचना देने के लिए मदद मांगी गई। अभी तक एक भी मुखबिर बनने के लिए सामने नहीं आया है। अगर जिले में लिंग परीक्षण किया जा रहा है तो उसकी जांच करवाकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. विनय कुमार सिंह, सीएमओ
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बुलंदशहर। भ्रूण हत्या रोकने के लिए शुरू हुई महत्वाकांक्षी मुखबिर योजना जनपद में लगातार दम तोड़ रही है। जिले का स्वास्थ्य महकमा पांच साल में एक भी मुखबिर ढूंढने में नाकाम रहा। हरियाणा और राजस्थान की टीम मुखबिर को भेजकर समय-समय पर जिले में छापा मार कई सेंटरों पर लिंग परीक्षण करने वाले को रंगे हाथों पकड़ चुकी है।
शासन ने वर्ष 2017 में प्रदेश के सभी अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर नजर रखने के लिए मुखबिर योजना शुरू की। योजना के तहत आम लोगों को जोड़कर अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर स्टिंग ऑपरेशन कराने थे। इसके लिए बाकायदा विभाग की ओर से रुपये भी दिए जाते हैं और नकली ग्राहक बनाकर भ्रूण लिंग की जांच के लिए अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर भेजा जाता है। लिंग परीक्षण करते पकड़े जाने पर मुखबिर को प्रोत्साहन राशि दे दी जाती है। अफसरों के अनुसार सही सूचना देने वाले व्यक्ति को 60 हजार रुपये, मिथ्या ग्राहक बनने वाली महिला को एक लाख और उसके सहायक को 40 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का नियम है। यह प्रोत्साहन राशि शासन द्वारा तीन किस्तों में दी जाती है।
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पोर्टेबल मशीन से चलता है लिंग परीक्षण का खेल
जिले में काफी संख्या में पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन हैं। मशीन संचालक प्रतिदिन अलग-अलग स्थानों पर इस कार्य को करता है। इसके लिए बाकायदा एक बड़ा गैंग जिले में सक्रिय है। जो लिंग परीक्षण कराने वाले को कोड वर्ड देता है और एक दिन पूर्व स्थान और समय बताकर गर्भवती महिला को बुलाता है। एक वर्ष पूर्व जिले के स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक पोर्टेबल मशीन पकड़ी गई, लेकिन उसके संचालक और लिंग परीक्षण करने का विभाग खुलासा नहीं कर सका।
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लोगों से संपर्क बनाकर भ्रूण हत्या और सेंटरों पर लिंग परीक्षण की सूचना देने के लिए मदद मांगी गई। अभी तक एक भी मुखबिर बनने के लिए सामने नहीं आया है। अगर जिले में लिंग परीक्षण किया जा रहा है तो उसकी जांच करवाकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. विनय कुमार सिंह, सीएमओ