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दो वक्त की रोटी को मोहताज परिवार
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर
Updated Thu, 15 Dec 2016 11:17 PM IST
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बैंक
- फोटो : अमर उजाला
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नोटबंदी से कामकाज ठप होने के चलते एक परिवार दो वक्त की रोटी के लिए मोहताज हो गया है। आटा खरीदने के पैसे का जुगाड़ नहीं हुआ तो महिला को एक ही रास्ता सूझा। खाते में पड़े 531 रुपये निकालने क लिए वह बृहस्पतिवार को बैंक पहुंची और खाता बंद कराने की बात कहने लगी। बैंक कर्मियों ने कागज पर प्रार्थना पत्र लिख कर लाने को कहा तो वह पास की दुकान में पहुंची जहां मामले का खुलासा हुआ।
हुआ यूं कि गुरुवार को नगर के मुफ्तीवाड़ा निवासी मोहनलाल की बुजुर्ग पत्नी मानवती शिकारपुर स्थित यूको बैंक की शाखा में अपने खाते में पड़े 531 रुपये को निकालकर खाता बंद कराने पहुंची। बैंक कर्मचारी द्वारा प्रार्थनापत्र लिखकर लाने की कहने पर वह प्रार्थनापत्र लिखवाने के लिये एक समाजसेवी व दुकानदार के पास पहुंची। कारण पूछने पर उसने बताया कि उसके पति को दिखाई नहीं देता हैं।
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तीन पुत्रों में से दो पुत्र बाहर रहते हैं जबकि एक पुत्र और एक पुत्री उसके पास रहते हैं। उनके पास अपना मकान भी नहीं नहीं है। मोहन ने बताया कि उसका पुत्र बेलदारी का काम करता है। नोटबंदी के कारण काम नहीं मिला। मानवती ने बताया कि दो दिन से घर में आटा खरीदने के लिए पैसा नहीं था। ऐसे में वह पड़ोस से आटा मांगकर लाई लेकिन अब वहां से भी राहत नहीं मिल रही।
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इसलिये वह अपने खाते में पड़े 531 को निकालकर खाता बंद करा देती और आटा खरीदकर ले जाती।