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निशाने पर थे छह बंदी, बीच में जो आता, मारा जाता
अमर उजाला ब्यूरो, बुलंदशहर
Updated Mon, 25 Apr 2016 11:15 PM IST
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कचहरी में पेशी पर आए हत्यारोपियों को मारने आए शुटरों से पूछताछ करते नगर कोतवाल आरके सिंह।
- फोटो : अमर उजाला
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पुलिस की सजगता से भरी कचहरी में सनसनीखेज हत्याओं से पहले दबोचे गए शॉर्प शूटरों के निशाने पर सिकंदराबाद के जौली गांव निवासी बालेश्वर के हत्यारोपी कैलू उर्फ कैलाश, कपिल पुत्र सुरेश गुर्जर, लखन पुत्र श्यामवीर, अमित पुत्र राजेंद्र, कौशेंद्र पुत्र चिंताराम और प्रवेंद्र पुत्र राजपाल थे।
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इसकी शूटरों ने पूरी तैयारी कर रखी थी। उनके पास हथियारों का जखीरा था। वह कैलू और उसके भतीजे कपिल की हत्या कर देते। साथ ही जो भी बीच में आता उसे भी मौत के घाट उतार देते। पुलिस के हत्थे चढ़े दो शूटरों में से एक नितेश ने बताया कि सोमवार सुबह करीब 11 बजे कैलू उर्फ कैलाश और उसके साथी कचहरी में पेशी पर आने वाले थे।
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जब आरोपी कचहरी की हवालात से कोर्ट में पेशी के लिए जाए जाते तो वह तभी उन पर हमला करके उन्हें ढेर कर देते। नगर कोतवाल आरके सिंह ने बताया कि पकड़े गए शूटरों की पहचान नितेश चौधरी पुत्र नीरज जाट निवासी गांव गून थाना परतापुर जिला मेरठ और शिवम पुत्र राजेंद्र सिंह शाक्य निवासी प्रताप विहार गाजियाबाद के रूप में हुई।
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दोनों के पास से तीन तमंचे, एक पिस्टल, एक धारदार तलवार नुमा दाव और 34 कारतूस बरामद हुए। वहीं भागने वालों में सचिन ठाकुर पुत्र अवध नरेश निवासी प्रताप विहार गाजियाबाद, सन्नी पंडित पुत्र अज्ञात निवासी विजय नगर गाजियाबाद, नितिन राय उर्फ लट्टू पुत्र अज्ञात निवासी प्रताप विहार गाजियाबाद और दीपा उर्फ दीप्पन पुत्र बालेश्वर निवासी गांव जौली थाना सिकंदराबाद रहे।
नितेश ने पुलिस को बताया कि नितिन राय ने घटना को अंजाम देने की योजना बनाई थी।नगर कोतवाली पुलिस मुस्तैदी की चारों ओर प्रशंसा हो रही है। डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के महासचिव सुमन सिंह राघव ने बताया कि निश्चित ही यह नगर पुलिस का सराहनीय काम है।
वहीं, सिविल बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष कुंवर विष्णु प्रताप सिंह ने बताया कि कचहरी परिसर में इस तरह की घटना रोेके जाने से लोगों में पुलिस के प्रति विश्वास बढ़ा है। यदि पुलिस सजग न होती तो बड़ी घटना घट सकती थी।
इसलिए हुई थी बालेश्वर की हत्या
गांव जौली निवासी बालेश्वर का 10 नवंबर 2015 को हदीमपुर गांव में पेड़ पर लटका शव मिला था। मृतक के लड़के विनोद ने अज्ञात में हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने बताया था कि वर्ष 2006 में कैलू उर्फ कैलाश पक्ष के लाला की हत्या हो गई थी।
लाला की हत्या में बालेश्वर व उसके लड़के विनोद, दीपक जेल गए थे। लाला की हत्या का बदला लेने के लिए उसने कपिल पुत्र कैलाश, पुष्पेंद्र पुत्र सुरेश, महेश पुत्र नारायण, कौशिंद पुत्र चिंता, परविंद्र पुत्र राजपाल, निवासीगण गांव जौली, लखन पुत्र श्यामवीर, ग्राम मलपुर, अमित पुत्र राजेंद्र हिम्मतपुर सिंभावली हापुड़ के साथ नौ नवंबर की शाम बालेश्वर का अपहरण कर लिया। इसके बाद हदीमपुर के जंगल में ले जाकर उसकी हत्या कर शव पेड़ पर लटका दिया था।
सुरेंद्र सुलैला को दी थी दीप्पन ने सुपारी
नितेश ने पुलिस को बताया कि नोएडा जेल में बंद सुरेंद्र सुलैला से दीप्पन पुत्र बालेश्वर जेल में मिलने गया था। दीप्पन ने पिता की हत्या का बदला लेने के लिए सुरेंद्र को पिता के हत्यारोपियों को मारने की सुपारी दी थी।
जेल में मुलाकात के दौरान सुलैला ने ही नितेश को यह काम दिया था। नगर कोतवाल आरके सिंह ने बताया कि जांच के बाद केस में सुरेंद्र को भी आरोपी बनाया जाएगा।
...तो क्या बलराज ने भड़काई इंतकाम की आग
10 नवंबर को बालेश्वर की हत्या के बाद पुलिस ने खुलासा करते हुए कैलू उर्फ कैलाश समेत छह लोगों को जेल भेज दिया। लेकिन बालेश्वर के बेटों के सीने में इंतकाम की आग ठंडी नहीं हुई। बताते हैं कि 50 हजार के इनामी बलराज भाटी ने बालेश्वर के बेटों को बदला लेने के लिए भड़काया।
उसने जेल में बंद सुरेंद्र सुलैला के माध्यम से दीप्पन को बदला लेने के लिए उकसाया। पुरानी रंजिश और पिता की हत्या के बाद बदला लेने के लिए तीनों बेटों ने शहर छोड़ दिया। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, बालेश्वर की हत्या के बाद उसके बेटे विनोद ने अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी।
पुलिस ने कुछ दिन बाद खुलासा करते हुए कैलू उर्फ कैलाश समेत छह लोगों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। लेकिन इस कार्रवाई से बालेश्वर के तीनों बेटे दीप्पन, विनोद और विपिन खुश नहीं थे। इनके जेल जाने के बाद तीनों ने शहर छोड़ दिया था। बताते हैं कि तीनों पहले से बलराज और सुरेंद्र सुलैला के संपर्क में थे। माना जा रहा है कि बलराज ने ही सुरेंद्र के माध्यम से तीनों को भड़काया ।