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अब आ, ई और ऊ बोलने से क्षय रोग का लगेगा पता
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अब आ, ई और ऊ बोलने से क्षय रोग का लगेगा पता
बुलंदशहर। खांसी की आवाज और आ, ई और ऊ बोलने से आपको आसानी से पता चल जाएगा कि आपको क्षय रोग है या नहीं। इसके लिए टीबी कफ कलेक्शन एप तैयार किया गया है। इसमें रोगी या चिन्हित व्यक्ति की आवाज आठ बार रिकार्ड की जाएगी। इसके लिए जिले में 124 रोगियों का सैंपल लेने का निर्देश मिला है।
देश में वर्ष 2025 तक क्षय रोग मुक्त बनाने को लेकर लगातार हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। अब महज खांसने से ही क्षय रोग की पहचान हो सकेगी। इसके लिए सेंट्रल टीबी डिवीजन की ओर से पायल प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। जनपद में ‘फिल्डी’ एप की सहायता से घर-घर जाकर क्षय रोग के बिना लक्षण वाले, लक्षण सहित व्यक्तियों और उनके संपर्क में आने वाले लोगों या रिश्तेदारों की आवाज के सैंपल एकत्रित किए गए गए हैं। स्वास्थ्य अफसरों के अनुसार सात साल से अधिक उम्र के क्षय रोगियों, संभावित और संपर्क में रहे लोगों की ही आवाज रिकॉर्डिंग की गई है। एप में आवाज रिकॉर्ड करने से पहले संबंधित व्यक्ति, रोगी का पूरा डाटा भरा जाता है। इसके बाद अलग-अलग चरणों में रिकार्डिंग होती है। पहला, एक से दस तक गिनती, दूसरा खांसी की आवाज, तीसरा आ, ई, ऊ तीन शब्दों को तीन-तीन बार बोलने और चौथ रिकॉर्डिंग के दौरान बैकग्राउंड आवाज रिकॉर्ड की जा रही है।
पिछले वर्ष मिल चुके है 8406 क्षय रोगी
जिले में वर्ष 2021 के दौरान जिला क्षय रोग विभाग द्वारा 8406 रोगियों को खोजकर उनका उपचार किया गया। हालांकि कुछ रोगियों का अब भी उपचार चल रहा है। वहीं, वर्ष 2022 में अब तक 423 नए क्षय रोगी मिल चुके हैं।
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130 रोगियों के भेजे गए सैंपल
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सीपीएस गौतम ने बताया कि तीन सप्ताह से अधिक किसी को खांसी रहने पर उसमें क्षय रोग संभावित माना जाता है। संबंधित व्यक्ति को क्षय रोग है या नहीं, यह बगैर बलगम की जांच के पता नहीं लग सकता था। इसलिए सेंट्रल टीबी डिवीजन ने खांसी के तरीके से संभावित मरीज की पहचान के लिए स्टडी शुरू की है। कफ साउंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड सोल्यूशन टू डिटेक्ट टीबी के लिए जिले से 130 आवाज के सैंपल भेजे गए हैं।
पहले चरण में अभी एप के माध्यम से ट्रायल चल रहा है, इसके लिए जिले में 124 रोगियों का सैंपल लेने का लक्ष्य रखा गया। सर्वे में जिन लोगों की आवाज रिकार्ड की गई है उनके नाम-पते गोपनीय रखे गए हैं। - डॉ. विनय कुमार सिंह, सीएमओ
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बुलंदशहर। खांसी की आवाज और आ, ई और ऊ बोलने से आपको आसानी से पता चल जाएगा कि आपको क्षय रोग है या नहीं। इसके लिए टीबी कफ कलेक्शन एप तैयार किया गया है। इसमें रोगी या चिन्हित व्यक्ति की आवाज आठ बार रिकार्ड की जाएगी। इसके लिए जिले में 124 रोगियों का सैंपल लेने का निर्देश मिला है।
देश में वर्ष 2025 तक क्षय रोग मुक्त बनाने को लेकर लगातार हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। अब महज खांसने से ही क्षय रोग की पहचान हो सकेगी। इसके लिए सेंट्रल टीबी डिवीजन की ओर से पायल प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। जनपद में ‘फिल्डी’ एप की सहायता से घर-घर जाकर क्षय रोग के बिना लक्षण वाले, लक्षण सहित व्यक्तियों और उनके संपर्क में आने वाले लोगों या रिश्तेदारों की आवाज के सैंपल एकत्रित किए गए गए हैं। स्वास्थ्य अफसरों के अनुसार सात साल से अधिक उम्र के क्षय रोगियों, संभावित और संपर्क में रहे लोगों की ही आवाज रिकॉर्डिंग की गई है। एप में आवाज रिकॉर्ड करने से पहले संबंधित व्यक्ति, रोगी का पूरा डाटा भरा जाता है। इसके बाद अलग-अलग चरणों में रिकार्डिंग होती है। पहला, एक से दस तक गिनती, दूसरा खांसी की आवाज, तीसरा आ, ई, ऊ तीन शब्दों को तीन-तीन बार बोलने और चौथ रिकॉर्डिंग के दौरान बैकग्राउंड आवाज रिकॉर्ड की जा रही है।
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पिछले वर्ष मिल चुके है 8406 क्षय रोगी
जिले में वर्ष 2021 के दौरान जिला क्षय रोग विभाग द्वारा 8406 रोगियों को खोजकर उनका उपचार किया गया। हालांकि कुछ रोगियों का अब भी उपचार चल रहा है। वहीं, वर्ष 2022 में अब तक 423 नए क्षय रोगी मिल चुके हैं।
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130 रोगियों के भेजे गए सैंपल
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सीपीएस गौतम ने बताया कि तीन सप्ताह से अधिक किसी को खांसी रहने पर उसमें क्षय रोग संभावित माना जाता है। संबंधित व्यक्ति को क्षय रोग है या नहीं, यह बगैर बलगम की जांच के पता नहीं लग सकता था। इसलिए सेंट्रल टीबी डिवीजन ने खांसी के तरीके से संभावित मरीज की पहचान के लिए स्टडी शुरू की है। कफ साउंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड सोल्यूशन टू डिटेक्ट टीबी के लिए जिले से 130 आवाज के सैंपल भेजे गए हैं।
पहले चरण में अभी एप के माध्यम से ट्रायल चल रहा है, इसके लिए जिले में 124 रोगियों का सैंपल लेने का लक्ष्य रखा गया। सर्वे में जिन लोगों की आवाज रिकार्ड की गई है उनके नाम-पते गोपनीय रखे गए हैं। - डॉ. विनय कुमार सिंह, सीएमओ