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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bulandshahar News ›   TB patients have not received nutritional allowance for three months

Bulandshahar News: टीबी के मरीजों को तीन माह से नहीं मिला पौष्टिक भत्ता व पोषण की पोटली

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 04 May 2025 10:27 PM IST
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बुलंदशहर। टीबी से जूझ रहे 4200 रोगियों को पिछले तीन माह से पौष्टिक भत्ता एवं 2900 रोगियों को पोषण पोटली का वितरण नहीं हुआ है। पौष्टिक भत्ता एवं पोषण पोटली न मिलने से रोगियों को उपचार में परेशानी आ रही है। कई रोगी पौष्टिक भत्ते के लिए कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। विभागीय अफसर बजट के अभाव में भत्ता न मिलने की बात कह रहे हैं।
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केंद्र सरकार वर्ष 2025 तक क्षय रोग को जड़ से खत्म करने के लिए अभियान चला रही है। इसमें रोगियों को चिन्हित कर समुचित इलाज दिया जा रहा है। सरकारी चिकित्सालयों में इलाज कराने वाले रोगियों को निशुल्क दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
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टीबी के इलाज के दौरान रोगियों को पौष्टिक आहार की जरूरत होती है। इसके लिए उन्हें प्रतिमाह एक हजार रुपये भत्ता दिया जाता है। साथ ही गोद लिए जा चुके मरीजों को पोषण पोटली वितरित कराई जाती है। जिला क्षय रोग विभाग के कार्यालय पहुंचे एक मरीज के भाई ने बताया कि पौष्टिक भत्ते के नाम पर कुछ नहीं मिल रहा। कई बार वह विभाग आए लेकिन अधिकारी बजट न होने की बात कहकर लौटा देते हैं।
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कुपोषण से बढ़ता है मर्ज

विशेषज्ञों के अनुसार टीबी रोगियों की संख्या बढ़ने की सबसे बड़ी वजह कुपोषण है। केंद्र सरकार ने एक अप्रैल 2018 में निक्षय पोषण योजना शुरू की। इसमें टीबी रोगियों को पोषण युक्त आहार के लिए प्रतिमाह 500 रुपये पोषण भत्ता देने का फैसला किया। वहीं, एक नवंबर से पोषण भत्ते की धनराशि 500 रुपये से बढ़ाकर प्रतिमाह एक हजार रुपये कर दी गई। 4200 टीबी रोगियों को पिछले तीन माह से पोषण भत्ता नहीं मिला है।


7,397 मरीजों को मिलनी थी पोषण पोटली
जिले के सरकारी चिकित्सालयों में टीबी का इलाज करवा रहे रोगियों को जल्द स्वस्थ बनाने के लिए प्रशासनिक अफसरों के अलावा सामाजिक व शैक्षणिक संस्थाओं, गणमान्य व्यक्ति, सामाजिक संगठन गोद लेकर पोषण सामग्री की व्यवस्था करवा रहे हैं। अप्रैल माह तक 7,397 टीबी रोगियों को पोषण पोटली के लिए चिन्हित किया गया। इसमें 4497 को पोषण पोटली मिल चुकी है। जबकि 2900 टीबी रोगियों को पिछले तीन माह से पोषण पोटली नहीं मिली है। ऐसे में इन रोगियों को टीबी की बीमारी से लड़ने के लिए पौष्टिक आहार नहीं मिल पाने की परेशानी झेलनी पड़ रही है। विभागीय अफसरों का कहना है कि पोषण पोटली के वितरण के दौरान अधिकांश रोगी आते नहीं हैं तो कुछ पोषण पोटली लेने से मना कर देते हैं।




पुराने मरीजों को पौष्टिक भत्ता मिल चुका है। नए मरीजों को पौष्टिक भत्ते के लिए बजट की कमी चल रही है। पौष्टिक भत्ते के लिए शासन को पत्राचार किया जा चुका है। पोषण पोटली लेने के लिए अधिकांश रोगी आते नहीं है। - डॉ. हेमंत रस्तोगी, जिला क्षय रोग अधिकारी
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