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संतान न होने पर दंपती ने जहर खाकर दी जान

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 06 Jan 2022 09:42 PM IST
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sucide
संतान न होने पर दंपती ने जहर खाकर दी जान
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बीबीनगर। थाना क्षेत्र के गांव चित्सौना अलीपुर में बुधवार देर शाम संतान न होने से दुखी पति-पत्नी ने जहर खा लिया। महिला की उपचार के लिए ले जाते समय रास्ते में ही मौत हो गई। जबकि, देर रात युवक ने भी मेरठ हायर मेडिकल सेंटर में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। बृहस्पतिवार सुबह शव गांव पहुंचने पर पुलिस को मामले की जानकारी हुई। मौके से जहर के दो खाली पैकेट बरामद हुए हैं।
चित्सौना अलीपुर निवासी टीकम का विवाह करीब चार वर्ष पूर्व क्षेत्र के गांव महेशपुर निवासी आरती के साथ हुआ था। दोनों को कोई संतान नहीं थी। आरती का उपचार भी विभिन्न स्थानों पर चल रहा था। टीकम कैंटर चालक था, जिससे होने वाली कमाई से उसका व पत्नी का भरण पोषण होता था। टीकम और उसके तीन अन्य भाइयों के गांव में ही बराबर-बराबर में मकान हैं। टीकम अपने मकान में पत्नी के साथ अकेला रहता था। बुधवार शाम को पति-पत्नी ने जहर की गोलियां पीस कर पानी से निगल लीं। जिससे उनकी हालत बिगड़ गई। दोनों की चीख सुनकर पड़ोस में रहने वाले परिजन व अन्य ग्रामीण दीवार कूदकर अंदर दाखिल हुए। जहां जहर के खाली पैकेट देखकर उन्हें मामले की जानकारी हुई। तत्काल परिजन दोनों को एक चिकित्सक के पास लेकर पहुंचे। वहां से उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। आरती की रास्ते में ही मौत हो गई, जबकि टीकम की देर रात उपचार के दौरान मौत हुई। परिजन बृहस्पतिवार सुबह दोनों के शव लेकर गांव पहुंचे। जहां सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव कब्जे में ले लिए। पुलिस ने उनके मकान की तलाशी ली तो कमरे में जहर के दो खाली पैकेट , आसपास बिखरा हुआ जहर, दो पानी के गिलास व अन्य सामान फैला हुआ मिला। हालांकि, मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। पुलिस की प्रारंभिक जांच और पूछताछ में भी यही सामने आ रहा है कि टीकम और आरती संतान न होने से परेशान थे।
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किसी को नहीं थी अनहोनी की भनक
टीकम की पत्नी का मायका महेशपुर था। बुधवार को दिन में वह आरती को लेकर महेशपुर भी गया था। वहां सभी के साथ हंसे-बोले लेकिन किसी के साथ अपनी परेशानी साझा नहीं की। आरती के मायके पक्ष का कहना है कि उन्होंने दोनों को रात में रोकने की कोशिश भी की लेकिन दोनों नहीं माने। परिजनों का कहना था कि यदि उन्हें पहले से पता होता कि दोनों यह कदम उठाने वाले हैं तो उन्हें कभी जाने नहीं देते।
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आर्थिक स्थिति भी नहीं थी ठीक
टीकम चार भाइयों में तीसरे नंबर का था। पिता पर गांव में कुल चार बीघा जमीन है। जिस पर वह खेती करते हैं। टीकम कैंटर पर चालक की नौकरी करता था। जिससे अपना व पत्नी का भरण पोषण करता। पत्नी के इलाज में भी वह काफी रुपये खर्च कर रहा था।
आत्महत्या नहीं है समस्या का समाधान : डॉ. धीरेंद्र
मनोचिकित्सक डॉ. धीरेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि किसी बीमारी के चलते, नौकरी छूटने या फिर नींद पूरी न होने के कारण लोग अवसाद में जा रहे हैं। इससे तनाव भी उत्पन्न हो रहा है। खासतौर पर कोरोना काल में अवसाद के मामले बढ़े हैं लेकिन इसका समाधान आत्महत्या करना नहीं है। लोगों को जागरूक होना होगा। यदि कोई बीमारी है तो उसका उपचार भी संभव है। ऐसी परेशानियां होने पर मनोचिकित्सक की सलाह अवश्य लें।

कोट
दंपती की मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो रहा है। दोनों को संतान न होने की बात प्रकाश में आई है। घर से पत्नी के उपचार के कागजात, जहर के खाली पाउच और पानी के गिलास बरामद हुए हैं। मामले की विभिन्न पहलुओं पर पड़ताल की जा रही है। जल्द ही कारण स्पष्ट हो जाएगा। - अलका सिंह, सीओ स्याना
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