{"_id":"a326d62e5f8a0f564aba1d78a0c0ef13","slug":"student-suicide-hindi-news-1","type":"story","status":"publish","title_hn":"पढ़ाई लगने लगी बोझ फंदे पर झूल गया छात्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पढ़ाई लगने लगी बोझ फंदे पर झूल गया छात्र
अमर उजाला, डिबाई
Updated Thu, 04 Feb 2016 11:06 PM IST
विज्ञापन
माता मोहल्ला में पढ़ाई के बोझ के चलते 11वीं कक्षा के छात्र ने घर में फंदा लगाकर जान दे दी। परिजनों ने उसे उतारकर डॉक्टर को दिखाया।
लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने पुलिस को सूचना दिए बगैर ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया।
मोहल्ला माता में गुंजन जायसवाल मिट्ठन लाल हलवाई के नाम से दुकान करते हैं।
उन्होंने बताया कि उनके दो बेटे पार्थ(17) और पिरु(14) हैं। पार्थ जेपी विद्या मंदिर अनूपशहर के कक्षा 11वीं का छात्र था जबकि पिरु सातवीं में है।
पार्थ को गिटार बजाने का शौक था। वह कुछ दिनों से पढ़ाई को बोझ समझने लगा था। गुरुवार शाम 4.30 बजे पार्थ ने घर के कमरे को बंद कर फंदे पर झूल गया।
परिजनों ने रस्सी के सहारे लटकी लाश को उतारकर डॉक्टर के पास ले गए, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। फिर पुलिस को सूचना दिए बगैर उसका अंतिम संस्कार कर दिया। परिजनों ने बताया कि उसे कभी किसी ने न तो डांटा और न ही पीटा। वह सिर्फ पढ़ाई को बोझ समझता था।
माता-पिता की बच्चों से अपेक्षाएं जरूरत से ज्यादा बढ़ गई है।बच्चे ज्ञान प्राप्त करने की जगह रटने पर ज्यादा जोर देते हैं। अंकों की दौड़ शुरू हो गई है। इसलिए बच्चे इस प्रकार के कदम उठा रहे हैं। -प्रोफेसर ओपी सिंह, प्रवक्ता, समाजशास्त्र, एनआरईसी
कुछ बच्चे पढ़ाई को बोझ समझने लगते हैं। एग्जाम की टेंशन के चलते वह इस तरह के कदम उठा लेते हैं। बच्चों को लगता है कि एग्जाम में फेल हो गया तो वह परिजनों को क्या मुंह दिखाएगा। इस तरह के बच्चे इस प्रकार का कदम उठाते हैं।
विज्ञापन
-डॉ. आरबी शर्मा, मनोरोग विशेषज्ञ
विज्ञापन
लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने पुलिस को सूचना दिए बगैर ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया।
मोहल्ला माता में गुंजन जायसवाल मिट्ठन लाल हलवाई के नाम से दुकान करते हैं।
उन्होंने बताया कि उनके दो बेटे पार्थ(17) और पिरु(14) हैं। पार्थ जेपी विद्या मंदिर अनूपशहर के कक्षा 11वीं का छात्र था जबकि पिरु सातवीं में है।
पार्थ को गिटार बजाने का शौक था। वह कुछ दिनों से पढ़ाई को बोझ समझने लगा था। गुरुवार शाम 4.30 बजे पार्थ ने घर के कमरे को बंद कर फंदे पर झूल गया।
परिजनों ने रस्सी के सहारे लटकी लाश को उतारकर डॉक्टर के पास ले गए, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। फिर पुलिस को सूचना दिए बगैर उसका अंतिम संस्कार कर दिया। परिजनों ने बताया कि उसे कभी किसी ने न तो डांटा और न ही पीटा। वह सिर्फ पढ़ाई को बोझ समझता था।
माता-पिता की बच्चों से अपेक्षाएं जरूरत से ज्यादा बढ़ गई है।बच्चे ज्ञान प्राप्त करने की जगह रटने पर ज्यादा जोर देते हैं। अंकों की दौड़ शुरू हो गई है। इसलिए बच्चे इस प्रकार के कदम उठा रहे हैं। -प्रोफेसर ओपी सिंह, प्रवक्ता, समाजशास्त्र, एनआरईसी
विज्ञापन
कुछ बच्चे पढ़ाई को बोझ समझने लगते हैं। एग्जाम की टेंशन के चलते वह इस तरह के कदम उठा लेते हैं। बच्चों को लगता है कि एग्जाम में फेल हो गया तो वह परिजनों को क्या मुंह दिखाएगा। इस तरह के बच्चे इस प्रकार का कदम उठाते हैं।
विज्ञापन
-डॉ. आरबी शर्मा, मनोरोग विशेषज्ञ