फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bulandshahar News ›   sparrow

ओ री चिरैया, नन्हीं सी चिड़िया...अंगना में फिर आ जा रे

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 19 Mar 2022 10:30 PM IST
विज्ञापन
sparrow
आईपी कॉलेज प्रथम परिसर में पानी पीतीं गौरेया। - फोटो : BULANDSHAHR
ओ री चिरैया, नन्हीं सी चिड़िया...अंगना में फिर आ जा रे
विज्ञापन

बुलंदशहर। ओ री चिरैया, नन्हीं सी चिड़िया...अंगना में फिर आ जा रे...। कुछ इसी तरह की मनुहार आज जिले के कुछ लोग रूठी गौरैया से कर रहे हैं। गौरैया संरक्षण के लिए जिले के शिक्षक, छात्र और समाजसेवी आगे आने लगे हैं। हालांकि गौरैया के अस्तित्व पर उभरे इस संकट की तुलना में यह प्रयास अभी काफी छोटे हैं लेकिन उम्मीद है कि यह कोशिशें जरूर सफल होंगी।
150 शिक्षक और छात्र जुटे
आईपी कॉलेज प्रथम परिसर में गौरैया को बचाने के लिए मुहिम चलाई गई है। इस मुहिम से 150 छात्र और शिक्षक जुड़े हुए हैं। इस मुहिम को चलाने का श्रेय जीव विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. यशवंत राय को जाता है। डॉ. राय ने बताया कि जिले से करीब 60 फीसदी गौरैया विलुप्त हो चुकी हैं। इनके संरक्षण के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाना होगा। कॉलेज में गौरैया को बचाने के लिए जगह-जगह घोंसले बनाए गए हैं, जिससे वह वहां पर सुरक्षित रह सकें। उनके लिए दाना और पानी की भी व्यवस्था की जाती है। इसी के साथ ही लगातार लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
विज्ञापन

यह करें
गौरैया आपके घर में घोंसला बनाए तो उसे बनाने दें।
रोजाना अपने आंगन, खिड़की, बाहरी दीवारों पर दाना-पानी रखें।
गर्मियों में गौरैया के लिए पानी रखें।
दफ्ती के डिब्बों, प्लास्टिक की बड़ी बोतलों और मटकियों में छेद करके इनका घर बनाएं और उचित स्थानों पर लगाएं।
प्रजनन के समय गौरैया के अंडों की सुरक्षा का ध्यान रखें।
घर आई रूठी गौरैया
नगर के आवास विकास कालोनी में रहने वाले विनय कुमार मित्तल ने बताया कि घर में कृत्रिम घोंसले लगाए। छतों और चहारदीवारी पर दाना-पानी रखा। धीरे-धीरे कोशिशें रंग लाईं और रूठी गौरैया घर लौटने लगी। गौरैया के संरक्षण में पत्नी और बेटी करिश्मा भी जुटी हुई हैं। इस समय घर के अलग-अलग हिस्सों में पांच कृत्रिम घोंसले बनाए हुए हैं और सुबह आंख गौरैया की चहचहाहट से ही खुलती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

कॉलेज से मिली गौरेया के संरक्षण की प्रेरणा
गांव जटपुरा निवासी लिम्सी चौधरी ने गौरैया के संरक्षण की दिशा में पहल की है। बीएससी की पढ़ाई कर रही लिम्सी ने बताया कि कॉलेज में बताया गया कि गौरैया विलुप्त होती जा रही हैं तो उन्होंने अपने घर पर से ही उनके संरक्षण की शुरूआत की। साथ ही दूसरे लोगों को अपने घर में घोंसले के साथ उनके लिए छतों पर दाना-पानी रखने के लिए जागरूक कर रही हैं।
दाना-पानी कमल संस्था ने चलाई मुहिम
दाना-पानी कमल संस्था के संस्थापक विक्रम सिंह राघव ने बताया कि संस्था की ओर से गौरैया के साथ अन्य पक्षियों को भी बचाने की मुहिम चलाई जा रही है। कोरोना संक्रमण के दौरान यह शुरूआत की गई थी। धीरे-धीरे मुहिम रंग लाने लगी और जिले के अलावा अन्य स्थानों पर करीब दो हजार दाना-पानी कमल लगा चुके हैं। इस कार्य में कई समाजसेवी लोगों का भी सहयोग मिल रहा है।
कंकरीट के शहर ने छीन लिया आशियाना
बुलंदशहर। शहरों व ग्रामीण क्षेत्र में घरों का स्वरूप जिस तरह बदला, उसमें गौरैया के लिए जगह ही नहीं बची। घरों में रोशनदान, खिड़कियां आदि गायब हो गए, खुली जगह खत्म हो गई, जिसकी वजह से गौरैया भी दूर हो गईं। गौरैया के कम होने का कारण मोबाइल टॉवर से निकलने वाली हानिकारक तरंगों को भी माना जाता है। करीब पांच साल पहले सरकारी कार्यालयों में घोंसले रखे गए थे, जो गायब हो चुके हैं।

आज कराई जाएगी गौरैया की गिनती
डीएफओ विनीता सिंह ने बताया कि ऐसा कोई आंकड़ा नहीं है कि कितनी गौैरैया हैं। इसका पता करने के लिए रविवार को इनकी गिनती करवाई जाएगी। इसके संरक्षण के लिए जल्द ही कोई अहम निर्णय लिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed