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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bulandshahar News ›   Seven Sanskrit schools on the verge of closure

Bulandshahar News: सात संस्कृत विद्यालय बंदी की कगार पर, भवन हुए जर्जर

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 17 Aug 2023 10:37 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
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बुलंदशहर। माध्यमिक संस्कृत शिक्षा विभाग के जिले के सात संस्कृत विद्यालय बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। लंबे समय से इन स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती नहीं हुई है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और लिपिक भी नहीं हैं। विद्यालयों के भवन भी जर्जर हो गए हैं।
संस्कृत का अध्ययन करने के लिए विद्यालय स्थापित कराए गए थे लेकिन इनके रखरखाव पर शासन की ओर से ध्यान नहीं दिया गया। न ही संसाधन उपलब्ध कराए गए। इसी का परिणाम है कि लंबे समय से संस्कृत विद्यालय उपेक्षा का शिकार हैं। एक विद्यालय में इस समय न तो शिक्षक हैं और न ही इस बार किसी छात्र ने प्रवेश लिया है। यह विद्यालय लगभग बंद हो चुका है। जबकि छह विद्यालयों में तीन शिक्षक विभागीय और 12 शिक्षक मानदेय पर हैं। इनमें 346 छात्र ही अध्ययनरत हैं। जबकि नियम हैं कि एक विद्यालय में पांच शिक्षक होने चाहिए। इसके अलावा लिपिक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी जरूरी हैं। अधिकारियों का कहना है कि का कहना है कि शिक्षक और स्टाफ की कमी को पूरा किया जाए तो इन विद्यालयों की स्थिति को संवारा जा सकता है।
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खुर्जा स्थित एनआर संस्कृत विद्यालय का संचालन इस समय बंद है। भिक्षानंद संस्कृत विद्यालय बुलंदशहर में एक शिक्षक विभागीय और दो शिक्षक मानदेय पर रखे गए हैं। इसमें 36 छात्र पंजीकृत हैं। गंगा सागर ट्रस्ट संस्कृत विद्यालय में एक शिक्षक विभागीय और दो मानदेय पर काम कर रहे हैं। यहां पर 50 छात्र पंजीकृत हैं। सांगवेद संस्कृत विद्यालय सेंडा फरीदपुर खुर्जा में दो शिक्षक मानदेय पर हैं और यहां पर 36 छात्र पंजीकृत हैं। मनीषी संस्कृत विद्यालय खुर्जा में 50 छात्र पंजीकृत हैं और यहां पर सिर्फ एक विभागीय शिक्षक ही तैनात है। भगीरथी संस्कृत विद्यालय रामघाट में 114 छात्र पंजीकृत हैं और तीन मानदेय पर शिक्षक तैनात हैं। इसी तरह देववाणी संस्कृत विद्यालय पहासू में पंजीकृत 60 छात्रों को मानदेय पर तैनात किए गए तीन शिक्षक ही शिक्षा दे रहे हैं।
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जिला विद्यालय निरीक्षक शिवकुमार ओझा ने कहा कि संस्कृत विद्यालयों को प्रोजेक्ट अलंकार में शामिल किया गया है लेकिन अभी तक केवल भगीरथी संस्कृत विद्यालय की ओर से प्रोजेक्ट मिला है। प्रयास किया जा रहा है इन स्कूलों की जर्जर स्थिति को सुधारा जाए। नगर स्थित भिक्षानंद संस्कृत विद्यालय का भवन जर्जर हो चुका है। डीएम से बात कर प्रयास किया जा रहा है कि इस विद्यालय की दशा सुधारी जाए। इन स्कूलों में स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए कई बार पत्र लिखा जा चुका है।

कभी जिले में संस्कृत का बजता था डंका

कभी जिले में संस्कृत का डंका बजा करता था। यहां पर देश-विदेश से छात्र संस्कृत की पढ़ाई करने आते थे। इन विद्यालयों में संस्कृत के श्लोक गूंजते थे। करीब तीन दशक से उपेक्षा के चलते इन विद्यालयों की स्थिति खराब होती गई। इसका एक कारण यह भी है कि आज के आधुनिक युग में संस्कृत को ज्यादा तरजीह नहीं दी जा रही है। अंग्रेजी मीडियम के स्कूल और पाश्चात्य संस्कृति के चलते संस्कृत से युवा पीढ़ी ने मुंह मोड़ लिया। यदि संस्कृत भाषा की इसी तरह उपेक्षा होती रही तो आने वाली पीढ़ी संस्कृत को पूरी तरह भूल जाएंगी।

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