{"_id":"6a6b7fc8f944831d1c09322f","slug":"search-for-the-daughter-remains-inconclusive-even-on-the-third-day-every-inch-of-a-10-km-stretch-was-scoured-bulandshahr-news-c-133-1-bul1033-161367-2026-07-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bulandshahar News: तीसरे दिन भी बिटिया की तलाश रही अधूरी, 10 किमी तक छाना चप्पा-चप्पा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bulandshahar News: तीसरे दिन भी बिटिया की तलाश रही अधूरी, 10 किमी तक छाना चप्पा-चप्पा
विज्ञापन
काली नदी में चारू की तलाश करती एनडीआरएफ की टीम। संवाद
बुलंदशहर। तीन दिन...300 जवान-कर्मचारी व अफसर और 10 किलोमीटर के दायरे में चप्पे-चप्पे की छानबीन फिर भी 11 साल की चारू का कोई सुराग नहीं लगा। मंगलवार को दोपहर में खुले नाले में बही कक्षा चार की छात्रा के सकुशल मिलने की उम्मीद अब हर पल क्षीण होती जा रही है।
तीन दिन तक छात्रा के न मिलने से माता-पिता, परिजनों के साथ-साथ शहर के लोग भी दुखी हैं। इसके साथ-साथ लोगों में प्रशासन, नगर पालिका की कार्यप्रणाली से आक्रोश भी पनप रहा है।
नगर के मोहल्ला साठा धर्मपाल वाली गली निवासी रिंकू कश्यप की 11 वर्षीय बेटी चारू मंगलवार को दिन में लगभग साढ़े बारह बजे स्कूल से लौटते समय खुले नाले में बह गई थी। वह भूतेश्वर मंदिर के सामने स्थित सुशील पब्लिक स्कूल में कक्षा चार की छात्रा है।
विज्ञापन
उसे तलाशने के लिए बृहस्पतिवार को भी व्यापक स्तर पर अभियान चलाया गया। बुधवार को जहां तक उसकी तलाश की गई थी, अगले दिन उसकी तलाश का दायरा बड़ा किया गया। बृहस्पतिवार को देर रात तक उसकी तलाशी का अभियान जारी था, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं लगा था।
एक तरफ काली नदी और नाले में बच्ची को तलाशने के लिए जवान पूरी जी जान से जुटे हैं उधर शहर के लोगों की नजर भी उधर ही है। सुबह से बड़ी संख्या में लोग काली नदी के किनारे पहुंच गए।
एडीएम प्रशासन नितीश कुमार मौके पर पहुंचे और सर्चिंग ऑपरेशन की जानकारी ली, लेकिन कोई ठोस क्लू नहीं मिल पाया। इधर चारू के घर पर रिश्तेदारों और पड़ोसियों का तांता लगा है। मां की निगाहें अब भी दरवाजे पर टिकी हैं और हर आहट पर उन्हें लगता है कि शायद उनकी बेटी लौट आई हो।
मुख्यमंत्री से सभी नाले तुरंत बंद करवाने की मांग
चारू की मां ज्ञानवती का दर्द अब सीधे व्यवस्था पर सवाल बनकर सामने आया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से शहर के सभी खुले नालों को तत्काल बंद कराने और घटना के लिए जिम्मेदार हर अधिकारी पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है।
ज्ञानवती का आरोप है कि स्कूल का मुख्य गेट हमेशा खुला रहता था। बच्चे बिना किसी निगरानी के बाहर आते-जाते थे। उन्होंने पहले भी स्कूल प्रबंधन से शिकायत की थी कि बारिश में जलभराव के बीच बच्चों को बाहर भेजना खतरे से खाली नहीं है, लेकिन किसी ने उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया। उनका कहना है कि अगर समय रहते व्यवस्था सुधारी गई होती तो आज उनकी बेटी उनके साथ होती।
भाई की आंखों के सामने बह गई चारू
चारू के भाई गगन की आंखों में वह मंजर अब भी ताजा है। बीबीए की पढ़ाई कर रहे गगन ने बताया कि बारिश के कारण वह बहन को लेने स्कूल पहुंचे थे। रास्ते में करीब तीन फीट पानी भरा था। उन्होंने देखा कि चारू नाले के ऊपर बने स्लैब पर खड़ी थी।
उन्होंने आवाज लगाई, लेकिन चारू ने नहीं सुना और अगले ही पल तेज बहाव में नाले में समा गई। वह दौड़कर अगली पुलिया तक पहुंचे। पुलिया पर लेटकर काफी देर तक बहन को तलाशते रहे, लेकिन वह कहीं दिखाई नहीं दी। बाद में पिता और मोहल्ले के लोगों ने स्लैब तोड़कर तलाश शुरू की, मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
अगर प्रशासन तुरंत हरकत में आता..
गगन ने राहत अभियान पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सूचना देने के करीब आधा घंटा बाद पुलिस पहुंची। फिर नगर पालिका की टीम आई। जेसीबी पहुंचने में लगभग एक घंटा लग गया। शाम साढ़े पांच बजे एनडीआरएफ पहुंची और अभियान शुरू होने में भी करीब आधा घंटा और लग गया। उनका कहना है कि यदि शुरुआत में तेजी से कार्रवाई होती तो शायद बहन को बचाया जा सकता था।
दरवाजे पर बैठी मां... और खत्म होती उम्मीदें
चारू के घर में उसकी किताबें, बस्ता और खिलौने वैसे ही रखे हैं। मां ज्ञानवती दरवाजे पर बैठकर हर कदमों की आहट सुनती हैं। कोई दरवाजा खटखटाता है तो वह चौंककर उठती हैं। लेकिन हर बार लौटती है सिर्फ खामोशी। रिश्तेदार और पड़ोसी ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं, लेकिन मां की एक ही बात है कि जब तक मेरी बेटी नहीं मिलती, तब तक चैन नहीं मिलेगा।
अब सियासत भी गरमाई
आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता विकास शर्मा ने भी नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नालों की सफाई और अतिक्रमण हटाने की शिकायतें पहले भी की गई थीं, लेकिन कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रही। उन्होंने पालिका अध्यक्ष, संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करने की मांग की।
कोट-- --
छात्रा की लगातार तलाश की जा रही है, लेकिन अभी तक उसका कोई सुराग नहीं लगा है। टीम लगातार छात्रा चारू की तलाश कर रहीं हैं।-- - नितीश कुमार, एडीएम प्रशासन
विज्ञापन
तीन दिन तक छात्रा के न मिलने से माता-पिता, परिजनों के साथ-साथ शहर के लोग भी दुखी हैं। इसके साथ-साथ लोगों में प्रशासन, नगर पालिका की कार्यप्रणाली से आक्रोश भी पनप रहा है।
विज्ञापन
नगर के मोहल्ला साठा धर्मपाल वाली गली निवासी रिंकू कश्यप की 11 वर्षीय बेटी चारू मंगलवार को दिन में लगभग साढ़े बारह बजे स्कूल से लौटते समय खुले नाले में बह गई थी। वह भूतेश्वर मंदिर के सामने स्थित सुशील पब्लिक स्कूल में कक्षा चार की छात्रा है।
विज्ञापन
उसे तलाशने के लिए बृहस्पतिवार को भी व्यापक स्तर पर अभियान चलाया गया। बुधवार को जहां तक उसकी तलाश की गई थी, अगले दिन उसकी तलाश का दायरा बड़ा किया गया। बृहस्पतिवार को देर रात तक उसकी तलाशी का अभियान जारी था, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं लगा था।
एक तरफ काली नदी और नाले में बच्ची को तलाशने के लिए जवान पूरी जी जान से जुटे हैं उधर शहर के लोगों की नजर भी उधर ही है। सुबह से बड़ी संख्या में लोग काली नदी के किनारे पहुंच गए।
एडीएम प्रशासन नितीश कुमार मौके पर पहुंचे और सर्चिंग ऑपरेशन की जानकारी ली, लेकिन कोई ठोस क्लू नहीं मिल पाया। इधर चारू के घर पर रिश्तेदारों और पड़ोसियों का तांता लगा है। मां की निगाहें अब भी दरवाजे पर टिकी हैं और हर आहट पर उन्हें लगता है कि शायद उनकी बेटी लौट आई हो।
मुख्यमंत्री से सभी नाले तुरंत बंद करवाने की मांग
चारू की मां ज्ञानवती का दर्द अब सीधे व्यवस्था पर सवाल बनकर सामने आया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से शहर के सभी खुले नालों को तत्काल बंद कराने और घटना के लिए जिम्मेदार हर अधिकारी पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है।
ज्ञानवती का आरोप है कि स्कूल का मुख्य गेट हमेशा खुला रहता था। बच्चे बिना किसी निगरानी के बाहर आते-जाते थे। उन्होंने पहले भी स्कूल प्रबंधन से शिकायत की थी कि बारिश में जलभराव के बीच बच्चों को बाहर भेजना खतरे से खाली नहीं है, लेकिन किसी ने उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया। उनका कहना है कि अगर समय रहते व्यवस्था सुधारी गई होती तो आज उनकी बेटी उनके साथ होती।
भाई की आंखों के सामने बह गई चारू
चारू के भाई गगन की आंखों में वह मंजर अब भी ताजा है। बीबीए की पढ़ाई कर रहे गगन ने बताया कि बारिश के कारण वह बहन को लेने स्कूल पहुंचे थे। रास्ते में करीब तीन फीट पानी भरा था। उन्होंने देखा कि चारू नाले के ऊपर बने स्लैब पर खड़ी थी।
उन्होंने आवाज लगाई, लेकिन चारू ने नहीं सुना और अगले ही पल तेज बहाव में नाले में समा गई। वह दौड़कर अगली पुलिया तक पहुंचे। पुलिया पर लेटकर काफी देर तक बहन को तलाशते रहे, लेकिन वह कहीं दिखाई नहीं दी। बाद में पिता और मोहल्ले के लोगों ने स्लैब तोड़कर तलाश शुरू की, मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
अगर प्रशासन तुरंत हरकत में आता..
गगन ने राहत अभियान पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सूचना देने के करीब आधा घंटा बाद पुलिस पहुंची। फिर नगर पालिका की टीम आई। जेसीबी पहुंचने में लगभग एक घंटा लग गया। शाम साढ़े पांच बजे एनडीआरएफ पहुंची और अभियान शुरू होने में भी करीब आधा घंटा और लग गया। उनका कहना है कि यदि शुरुआत में तेजी से कार्रवाई होती तो शायद बहन को बचाया जा सकता था।
दरवाजे पर बैठी मां... और खत्म होती उम्मीदें
चारू के घर में उसकी किताबें, बस्ता और खिलौने वैसे ही रखे हैं। मां ज्ञानवती दरवाजे पर बैठकर हर कदमों की आहट सुनती हैं। कोई दरवाजा खटखटाता है तो वह चौंककर उठती हैं। लेकिन हर बार लौटती है सिर्फ खामोशी। रिश्तेदार और पड़ोसी ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं, लेकिन मां की एक ही बात है कि जब तक मेरी बेटी नहीं मिलती, तब तक चैन नहीं मिलेगा।
अब सियासत भी गरमाई
आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता विकास शर्मा ने भी नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नालों की सफाई और अतिक्रमण हटाने की शिकायतें पहले भी की गई थीं, लेकिन कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रही। उन्होंने पालिका अध्यक्ष, संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करने की मांग की।
कोट
छात्रा की लगातार तलाश की जा रही है, लेकिन अभी तक उसका कोई सुराग नहीं लगा है। टीम लगातार छात्रा चारू की तलाश कर रहीं हैं।

काली नदी में चारू की तलाश करती एनडीआरएफ की टीम। संवाद