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सद्दाम हत्याकांड : तीन हत्यारोपी दोषी करार, आजीवन कारावास
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सद्दाम हत्याकांड : तीन हत्यारोपी दोषी करार, आजीवन कारावास
बुलंदशहर। सिकंदराबाद कोतवाली क्षेत्र में वर्ष 2013 में हुए सद्दाम हत्याकांड के तीन आरोपियों को अपर सत्र न्यायाधीश न्याय कक्ष संख्या-8 अमरजीत के न्यायालय ने दोषी करार दिया है। तीनों अभियुक्तों को न्यायालय ने आजीवन कारावास व 11-11 हजार रुपये अर्थदंड सुनाया है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता विमल कुमार ने बताया कि 19 अगस्त 2013 को मध्य प्रदेश के जिला टीकमगढ़ के थाना जतारा के गांव कपासी निवासी रशीद खां ने कोतवाली सिकंदराबाद में तहरीर देकर रिपोर्ट दर्ज कराई। जिसमें उसने बताया कि वह सिकंदराबाद में रहकर अपने पुत्र सद्दाम और जावेद खां के साथ आरएमजी फैक्टरी में काम करता था। 19 अगस्त को वह अपने दोनों पुत्रों के साथ फैक्ट्री जा रहा था। रास्ते में ही फैक्ट्री में ही काम करने वाले आरोपी रामसागर, छोटेलाल और सुशील ने उन्हें रोक लिया। आरोपियों ने उनके पुत्र सद्दाम के साथ अभद्रता करनी शुरू कर दी।
आरोपी फैक्टरी में उनके पुत्र सद्दाम के व्यवहार से लोगों के बीच लोकप्रिय होने पर रंजिश मानते थे। अभद्रता का विरोध करने पर आरोपियों ने सद्दाम पर चाकुओं से हमला कर दिया। शोरशराबा होने पर लोगों को एकत्रित होते देख आरोपी वहां से भाग निकले थे। मामले में पुलिस ने तीनों नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। साथ ही विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया। मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश न्याय कक्ष संख्या-8 अमरजीत के न्यायालय में हुई। न्यायाधीश ने गवाहों के बयान, साक्ष्यों का अवलोकन और दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलों को सुनकर तीनों आरोपियों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई है।
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ये गवाह हुए पेश
मामले में न्यायालय में अभियोजन पक्ष की ओर से गवाह के रूप में वादी रशीद खां, मृतक के भाई जावेद खां, डा. पीतम सिंह, उपनिरीक्षक हरपाल सिंह यादव, उपनिरीक्षक दौलतराम मीणा, थानाध्यक्ष जितेंद्र सिंह कालरा, कांस्टेबल पंकज कुमार, रिटायर्ड एचसीपी पालू राम, एचसीपी पंकज कुमार को पेश किया गया। जिसके आधार पर न्यायालय ने तीनों आरोपियों को दोषी माना है।
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बुलंदशहर। सिकंदराबाद कोतवाली क्षेत्र में वर्ष 2013 में हुए सद्दाम हत्याकांड के तीन आरोपियों को अपर सत्र न्यायाधीश न्याय कक्ष संख्या-8 अमरजीत के न्यायालय ने दोषी करार दिया है। तीनों अभियुक्तों को न्यायालय ने आजीवन कारावास व 11-11 हजार रुपये अर्थदंड सुनाया है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता विमल कुमार ने बताया कि 19 अगस्त 2013 को मध्य प्रदेश के जिला टीकमगढ़ के थाना जतारा के गांव कपासी निवासी रशीद खां ने कोतवाली सिकंदराबाद में तहरीर देकर रिपोर्ट दर्ज कराई। जिसमें उसने बताया कि वह सिकंदराबाद में रहकर अपने पुत्र सद्दाम और जावेद खां के साथ आरएमजी फैक्टरी में काम करता था। 19 अगस्त को वह अपने दोनों पुत्रों के साथ फैक्ट्री जा रहा था। रास्ते में ही फैक्ट्री में ही काम करने वाले आरोपी रामसागर, छोटेलाल और सुशील ने उन्हें रोक लिया। आरोपियों ने उनके पुत्र सद्दाम के साथ अभद्रता करनी शुरू कर दी।
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आरोपी फैक्टरी में उनके पुत्र सद्दाम के व्यवहार से लोगों के बीच लोकप्रिय होने पर रंजिश मानते थे। अभद्रता का विरोध करने पर आरोपियों ने सद्दाम पर चाकुओं से हमला कर दिया। शोरशराबा होने पर लोगों को एकत्रित होते देख आरोपी वहां से भाग निकले थे। मामले में पुलिस ने तीनों नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। साथ ही विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया। मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश न्याय कक्ष संख्या-8 अमरजीत के न्यायालय में हुई। न्यायाधीश ने गवाहों के बयान, साक्ष्यों का अवलोकन और दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलों को सुनकर तीनों आरोपियों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई है।
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ये गवाह हुए पेश
मामले में न्यायालय में अभियोजन पक्ष की ओर से गवाह के रूप में वादी रशीद खां, मृतक के भाई जावेद खां, डा. पीतम सिंह, उपनिरीक्षक हरपाल सिंह यादव, उपनिरीक्षक दौलतराम मीणा, थानाध्यक्ष जितेंद्र सिंह कालरा, कांस्टेबल पंकज कुमार, रिटायर्ड एचसीपी पालू राम, एचसीपी पंकज कुमार को पेश किया गया। जिसके आधार पर न्यायालय ने तीनों आरोपियों को दोषी माना है।