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दलहन-तिलहन की बंपर पैदावार...बाजार हुआ खुशगवार
अमर उजाला ब्यूरो, बुलंदशहर
Updated Sun, 05 Mar 2017 12:23 AM IST
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रसोई गैस की बढ़ी कीमतों ने जहां गृहणियों को टेंशन दी थी, वहीं दाल-चावल और आटा सस्ता होने से उन्हें अच्छे दिनों का अहसास भी होने लगा है। इस बार हुई दलहन-तिलहन की बंपर पैदावार से बाजार और ग्राहक दोनों खुश हैं।
दाल के दामों में जहां 80 से 90 रुपये प्रतिकिलो तक की गिरावट आई है, वहीं सरसों, सोया, मूंगफली, रिफाइंड ऑयल के साथ आटा, चावल, चीनी और अन्य रोजमर्रा का सामान भी सस्ता हुआ है। किराना व्यापारियों की माने तो आने वाले समय में दालों के रेट में और भी कमी आएगी। ऐसे में इस बार होली के त्योहार रंगों की मस्ती के साथ आम आदमी की जेब भी खनकती रहेगी।
कुछ माह पहले तक दालों की कीमतें जो आसमान छू रहीं थी, अब उनमें काफी गिरावट आई है। राम नगर किराना मंडी के व्यापारी नरेंद्र चड्ढा ने बताया कि दालों की कीमतें 50 फीसदी तक गिर गई हैं। इससे ग्राहकों के साथ-साथ व्यापारियों को भी फायदा है। तेल, चीनी, आटा और चावल के गिरते रेट ने रसोई के खर्च को कम कर दिया है।
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आलू-मटर इतना सस्ता, किसान की हालत हुई खस्ता
नोटबंदी के बाद बाजार में सब्जियों का राजा आलू अपने सहयोगी मटर के साथ कम दाम में भी खरीददार के झोले में भर जाने को बेताब है। लेकिन भाव गिरने से उत्पादक किसानों की हालात पतली हो रही है। फिलहाल बाजार में आलू 15 से 20 रुपये में पांच किलो बिक रहा है। मटर, गोभी समेत सभी सब्जियों के दाम भी तेजी से गिरे हैं।
स्थानीय मार्केट में सब्जियों के दाम गिरने और दिल्ली-एनसीआर में मांग घटने से सब्जी उत्पादक किसान आर्थिक संकट में है। वह अपनी फसल की लागत भी नहीं निकाल पा रहा है। ऐसे में लागत बढ़ने के डर से वह फसल को खेत पर ही नष्ट करने को मजबूर है। नोटबंदी के बाद कैश की किल्लत के चलते बाजार में सब्जियों की मांग नहीं बढ़ पा रही है।
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दाल के दामों में जहां 80 से 90 रुपये प्रतिकिलो तक की गिरावट आई है, वहीं सरसों, सोया, मूंगफली, रिफाइंड ऑयल के साथ आटा, चावल, चीनी और अन्य रोजमर्रा का सामान भी सस्ता हुआ है। किराना व्यापारियों की माने तो आने वाले समय में दालों के रेट में और भी कमी आएगी। ऐसे में इस बार होली के त्योहार रंगों की मस्ती के साथ आम आदमी की जेब भी खनकती रहेगी।
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कुछ माह पहले तक दालों की कीमतें जो आसमान छू रहीं थी, अब उनमें काफी गिरावट आई है। राम नगर किराना मंडी के व्यापारी नरेंद्र चड्ढा ने बताया कि दालों की कीमतें 50 फीसदी तक गिर गई हैं। इससे ग्राहकों के साथ-साथ व्यापारियों को भी फायदा है। तेल, चीनी, आटा और चावल के गिरते रेट ने रसोई के खर्च को कम कर दिया है।
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आलू-मटर इतना सस्ता, किसान की हालत हुई खस्ता
नोटबंदी के बाद बाजार में सब्जियों का राजा आलू अपने सहयोगी मटर के साथ कम दाम में भी खरीददार के झोले में भर जाने को बेताब है। लेकिन भाव गिरने से उत्पादक किसानों की हालात पतली हो रही है। फिलहाल बाजार में आलू 15 से 20 रुपये में पांच किलो बिक रहा है। मटर, गोभी समेत सभी सब्जियों के दाम भी तेजी से गिरे हैं।
स्थानीय मार्केट में सब्जियों के दाम गिरने और दिल्ली-एनसीआर में मांग घटने से सब्जी उत्पादक किसान आर्थिक संकट में है। वह अपनी फसल की लागत भी नहीं निकाल पा रहा है। ऐसे में लागत बढ़ने के डर से वह फसल को खेत पर ही नष्ट करने को मजबूर है। नोटबंदी के बाद कैश की किल्लत के चलते बाजार में सब्जियों की मांग नहीं बढ़ पा रही है।