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दुधमुंही बच्ची से दुष्कर्म के दोषी को आजीवन कारावास
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दुधमुंही बच्ची से दुष्कर्म के दोषी को आजीवन कारावास
बुलंदशहर। नौ माह की मासूम बच्ची से दुष्कर्म के आरोपी को विशेष न्यायाधीश पॅाक्सो अधिनियम डा. पल्लवी अग्रवाल ने रिकॉर्ड समय पांच महीने के अंदर दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अदालत ने अर्थदंड की राशि पीड़िता के परिजनों को देने का आदेश दिया है। अदालत के इस फैसले से पीड़ित परिजनों ने खुशी जताई है।
जिला शासकीय अधिवक्ता राहुल उपाध्याय और विशेष लोक अभियोजक महेश कुमार सिंह राघव और भरत शर्मा ने बताया कि खुर्जा देहात थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी महिला ने 18 जुलाई 2021 को थाने पर तहरीर दी थी। जिसमें उन्होंने बताया कि उनकी नौ माह की बेटी को सुबह करीब नौ बजे खेलाने के बहाने पड़ोस में रहने वाला युवक राजा अपने घर ले गया था। करीब एक घंटे बाद बच्ची को घर पर लिटा कर चला गया। घर पर आने के बाद बेटी लगातार रोए जा रही थी। उसे चुप कराने की कोशिश की तो देखा कि बेटी ने शौच की हुई है, खून भी बह रहा था। इस पर उसे अंदेशा हुआ कि पड़ोसी ने बेटी के साथ गलत काम किया है। मामले में थाना पुलिस ने तहरीर के आधार पर आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की। साथ ही उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जांच के बाद आरोपी के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर की गई। न्यायालय ने अब विभिन्न साक्ष्यों और दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलों को सुनने के बाद आरोपी राजा को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
मुझसे गलती हो गई, माफ कर दो
सजा सुनाए जाने के बाद आरोपी राजा ने कहा कि उससे गलती हो गई है, उसे माफ कर दिया जाए। अभियुक्त की ओर से कम उम्र होने का हवाला देते हुए सजा कम किए जाने की भी अपील की गई। गौरतलब है कि युवक ने खुद को नाबालिग बताया था। इसके बाद पुलिस ने उसके उम्र की जांच कराई थी। जांच रिपोर्ट में उसकी उम्र 18 वर्ष से अधिक आई थी।
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बच्चे होते हैं समाज का भविष्य : न्यायालय
न्यायाधीश डा. पल्लवी अग्रवाल ने सजा सुनाने से पहले टिप्पणी करते हुए कहा कि बच्चे समाज का भविष्य होते हैं। स्वामी विवेकानंद ने भी कहा था कि स्त्री राष्ट्र का कल है। एक राष्ट्र को बनाने व संवारने में नारी सर्वाधिक महत्वपूर्ण है।
पूर्व में भी न्यायालय ने 52 और 83 दिन के भीतर सुनाई हैं सजाएं
न्यायालय ने सात मार्च 2021 को भी दुष्कर्म के एक मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। न्यायाधीश डा. पल्लवी अग्रवाल ने डिबाई थाना क्षेत्र में किशोरी से दुष्कर्म के आरोपी को 52 दिन में दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास सुनाया था। न्यायाधीश वीरेंद्र कुमार सिंह के न्यायालय ने 16 सितंबर 2021 को दुष्कर्म के आरोपी को दोषी मानते हुए 83 दिन के भीतर 20 साल की कारावास की सजा सुनाई थी।
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बुलंदशहर। नौ माह की मासूम बच्ची से दुष्कर्म के आरोपी को विशेष न्यायाधीश पॅाक्सो अधिनियम डा. पल्लवी अग्रवाल ने रिकॉर्ड समय पांच महीने के अंदर दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अदालत ने अर्थदंड की राशि पीड़िता के परिजनों को देने का आदेश दिया है। अदालत के इस फैसले से पीड़ित परिजनों ने खुशी जताई है।
जिला शासकीय अधिवक्ता राहुल उपाध्याय और विशेष लोक अभियोजक महेश कुमार सिंह राघव और भरत शर्मा ने बताया कि खुर्जा देहात थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी महिला ने 18 जुलाई 2021 को थाने पर तहरीर दी थी। जिसमें उन्होंने बताया कि उनकी नौ माह की बेटी को सुबह करीब नौ बजे खेलाने के बहाने पड़ोस में रहने वाला युवक राजा अपने घर ले गया था। करीब एक घंटे बाद बच्ची को घर पर लिटा कर चला गया। घर पर आने के बाद बेटी लगातार रोए जा रही थी। उसे चुप कराने की कोशिश की तो देखा कि बेटी ने शौच की हुई है, खून भी बह रहा था। इस पर उसे अंदेशा हुआ कि पड़ोसी ने बेटी के साथ गलत काम किया है। मामले में थाना पुलिस ने तहरीर के आधार पर आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की। साथ ही उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जांच के बाद आरोपी के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर की गई। न्यायालय ने अब विभिन्न साक्ष्यों और दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलों को सुनने के बाद आरोपी राजा को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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मुझसे गलती हो गई, माफ कर दो
सजा सुनाए जाने के बाद आरोपी राजा ने कहा कि उससे गलती हो गई है, उसे माफ कर दिया जाए। अभियुक्त की ओर से कम उम्र होने का हवाला देते हुए सजा कम किए जाने की भी अपील की गई। गौरतलब है कि युवक ने खुद को नाबालिग बताया था। इसके बाद पुलिस ने उसके उम्र की जांच कराई थी। जांच रिपोर्ट में उसकी उम्र 18 वर्ष से अधिक आई थी।
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बच्चे होते हैं समाज का भविष्य : न्यायालय
न्यायाधीश डा. पल्लवी अग्रवाल ने सजा सुनाने से पहले टिप्पणी करते हुए कहा कि बच्चे समाज का भविष्य होते हैं। स्वामी विवेकानंद ने भी कहा था कि स्त्री राष्ट्र का कल है। एक राष्ट्र को बनाने व संवारने में नारी सर्वाधिक महत्वपूर्ण है।
पूर्व में भी न्यायालय ने 52 और 83 दिन के भीतर सुनाई हैं सजाएं
न्यायालय ने सात मार्च 2021 को भी दुष्कर्म के एक मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। न्यायाधीश डा. पल्लवी अग्रवाल ने डिबाई थाना क्षेत्र में किशोरी से दुष्कर्म के आरोपी को 52 दिन में दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास सुनाया था। न्यायाधीश वीरेंद्र कुमार सिंह के न्यायालय ने 16 सितंबर 2021 को दुष्कर्म के आरोपी को दोषी मानते हुए 83 दिन के भीतर 20 साल की कारावास की सजा सुनाई थी।