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नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को दस साल की जेल
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नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को दस साल की जेल
बुलंदशहर। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट गुलाम मुस्तफा की कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को दस साल कठोर कारावास की सजा सुनाई है। विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो अधिनियम धर्मेंद्र सिंह राघव ने बताया कि दोषी ने बहला-फुसलाकर नाबालिग के साथ एक साल तक दुष्कर्म किया था। कोर्ट ने दोषी को 22 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो धर्मेंद्र सिंह राघव ने बताया कि 17 मार्च 2015 को खुर्जा नगर कोतवाली में पीड़ित ने शिकायत देकर बताया था कि पड़ोस में रहने वाले आरोपी वकील पुत्र फतेह मोहम्मद एक आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति है। आरोपी ने उसकी 13 वर्षीय बेटी को डरा धमकाकर और पिस्तौल के दम पर करीब एक वर्ष तक शोषण किया था। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर मामले में आरोपी के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पेश की थी। विभिन्न पहलू और तथ्यों पर विचार करने और दोनों पक्ष के अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने सोमवार को आरोपी वकील को दोषी माना है।
इनके दर्ज हुए बयान
कोर्ट ने सबसे पहले दुष्कर्म पीड़िता, मेडिकल परीक्षण करने वाली डॉ. उर्मिला सिंह, विवेचना अधिकारी एसआई शैलेश त्यागी, मौ अब्बास और जमील खां के बयान दर्ज किए थे।
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बुलंदशहर। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट गुलाम मुस्तफा की कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को दस साल कठोर कारावास की सजा सुनाई है। विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो अधिनियम धर्मेंद्र सिंह राघव ने बताया कि दोषी ने बहला-फुसलाकर नाबालिग के साथ एक साल तक दुष्कर्म किया था। कोर्ट ने दोषी को 22 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो धर्मेंद्र सिंह राघव ने बताया कि 17 मार्च 2015 को खुर्जा नगर कोतवाली में पीड़ित ने शिकायत देकर बताया था कि पड़ोस में रहने वाले आरोपी वकील पुत्र फतेह मोहम्मद एक आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति है। आरोपी ने उसकी 13 वर्षीय बेटी को डरा धमकाकर और पिस्तौल के दम पर करीब एक वर्ष तक शोषण किया था। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर मामले में आरोपी के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पेश की थी। विभिन्न पहलू और तथ्यों पर विचार करने और दोनों पक्ष के अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने सोमवार को आरोपी वकील को दोषी माना है।
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इनके दर्ज हुए बयान
कोर्ट ने सबसे पहले दुष्कर्म पीड़िता, मेडिकल परीक्षण करने वाली डॉ. उर्मिला सिंह, विवेचना अधिकारी एसआई शैलेश त्यागी, मौ अब्बास और जमील खां के बयान दर्ज किए थे।
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