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योगी सरकार में प्रदेश के गरीब-किसान बर्बाद हुए : सुभाषिनी अली
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सहायक श्रमायुक्त को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपते मार्क्सवादी पार्टी के पदाधिकारी। स्रोत: संगठन
पालित ब्यूरो की सदस्य सुभाषिनी अली सहगल ने कहा कि लाल झंडे के संघर्ष से ही विकल्प पैदा होगा। किसान-मजदूर की एकता के आधार पर वर्ग संघर्ष तेज कर वाम जनवादी विकल्प तैयार करेंगे। सम्मेलन में साथी आए हैं वह उत्तर प्रदेश के हालात कैसे बदलेंगे। योगी सरकार में प्रदेश के गरीब किसान बर्बाद हुए हैं। उत्तर प्रदेश की जनता ने लोकसभा में भाजपा की ताकत को कमजोर किया है।
सुभाषिनी अली सहगल ने यह बात श्रम विभाग के कार्यालय पर भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी उत्तर प्रदेश राज्य के 24वें सम्मेलन के अवसर पर आयोजित आमसभा को संबोधित करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि संविधान सभा में आरएसएस के लोगों ने संविधान का विरोध किया था। वह मनुस्मृति को संविधान के रूप में स्वीकार करने की बात करते है।
आरएसएस समानता के सिद्धांत की विरोधी है। यह मनुस्मृति के आधार पर देश चलाना चाहती है। आरएसएस चुनाव प्रक्रिया को दूषित करने की कोशिश कर रही है। जाति धर्म के नाम पर बांटा जा रहा है। भाजपा को कुर्सी से हटाना पूंजीवादी व्यवस्था को समाप्त कर समाजवाद का निर्माण करना है। जहां किसान, मजदूर, छात्र, नौजवान और महिलाओं को बराबरी का अधिकार अधिकार दिला सके।
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अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सांसद और सीपीआईएम के केंद्रीय कमेटी के सदस्य अमराराम ने कहा कि अप्रैल में राष्ट्रीय अधिवेशन होगा। 10 साल से भाजपा की सरकार है। इन 10 सालों में जो वादा किए, वह आज तक पूरे नहीं हो सके हैं। विक्रम सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश के सभी आंदोलन सांप्रदायिक कॉरपोरेट गठजोड़ के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं।
पार्टी के राज्य सचिव हीरालाल यादव ने कहा कि प्रदेश की हालत बदलने के लिए तीन दिन कार्य नीति और रणनीति पर चर्चा होगी। इसमें किसान-मजदूर से जुड़े कई मुद्दे शामिल किए जाएंगे। आमसभा की अध्यक्षता कामरेड सुरेंद्र सिंह ने और संचालन चंद्रपाल सिंह ने किया। इस दौरान सहायक श्रमायुक्त पल्लवी अग्रवाल को अपनी मांगों का ज्ञापन भी सौंपा गया।
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सुभाषिनी अली सहगल ने यह बात श्रम विभाग के कार्यालय पर भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी उत्तर प्रदेश राज्य के 24वें सम्मेलन के अवसर पर आयोजित आमसभा को संबोधित करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि संविधान सभा में आरएसएस के लोगों ने संविधान का विरोध किया था। वह मनुस्मृति को संविधान के रूप में स्वीकार करने की बात करते है।
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आरएसएस समानता के सिद्धांत की विरोधी है। यह मनुस्मृति के आधार पर देश चलाना चाहती है। आरएसएस चुनाव प्रक्रिया को दूषित करने की कोशिश कर रही है। जाति धर्म के नाम पर बांटा जा रहा है। भाजपा को कुर्सी से हटाना पूंजीवादी व्यवस्था को समाप्त कर समाजवाद का निर्माण करना है। जहां किसान, मजदूर, छात्र, नौजवान और महिलाओं को बराबरी का अधिकार अधिकार दिला सके।
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अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सांसद और सीपीआईएम के केंद्रीय कमेटी के सदस्य अमराराम ने कहा कि अप्रैल में राष्ट्रीय अधिवेशन होगा। 10 साल से भाजपा की सरकार है। इन 10 सालों में जो वादा किए, वह आज तक पूरे नहीं हो सके हैं। विक्रम सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश के सभी आंदोलन सांप्रदायिक कॉरपोरेट गठजोड़ के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं।
पार्टी के राज्य सचिव हीरालाल यादव ने कहा कि प्रदेश की हालत बदलने के लिए तीन दिन कार्य नीति और रणनीति पर चर्चा होगी। इसमें किसान-मजदूर से जुड़े कई मुद्दे शामिल किए जाएंगे। आमसभा की अध्यक्षता कामरेड सुरेंद्र सिंह ने और संचालन चंद्रपाल सिंह ने किया। इस दौरान सहायक श्रमायुक्त पल्लवी अग्रवाल को अपनी मांगों का ज्ञापन भी सौंपा गया।