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एक्यूआई 424 : सांस लेने लायक नहीं बची हवा, बिगड़ रही लोगों की सेहत
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स्याना रोड पर स्मॉग के बीच गुजरते वाहन।
- फोटो : BULANDSHAHR
एक्यूआई 424 : सांस लेने लायक नहीं बची हवा, बिगड़ रही लोगों की सेहत
बुलंदशहर। दिवाली पर प्रतिबंध के बावजूद खूब आतिशबाजी होने से प्रदूषण खतरनाक स्तर को पार कर गया है। जिले का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) लगातार तीसरे दिन 400 के ऊपर रहा। 424 एक्यूआई के साथ बुलंदशहर जिला देश के सबसे अधिक प्रदूषित शहरों में दसवें नंबर पर रहा। स्वच्छ हवा न मिलने के कारण सांस और खांसी के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है।
जनपद की हवा की गुणवत्ता गत माह से खराब चल रही है। दिवाली पर आतिशबाजी ने वायु प्रदूषण को खतरनाक स्तर को पार करा दिया। दिन प्रति दिन सांस और अस्थमा के रोगियों की परेशानी बढ़ रही है। आंखों में जलन और त्वचा रोग की शिकायतें भी आने लगी हैं। स्मॉग की सफेद चादर के चलते शनिवार और रविवार को सुबह दृश्यता काफी कम रही। वाहन चालकों को काफी परेशानी उठानी पड़ी।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार तेज हवा चलने और बारिश के बाद ही स्मॉग से छुटकारा मिल सकती है। पर्यावरण अधिकारी और जिला प्रशासन लोगों से पुआल, कूड़ा न जलाने, निर्माण कार्य न करने की अपील कर रहे हैं।
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बरतें सावधानी, हो सकती है परेशानी
स्मॉग में सल्फर डाई ऑक्साइड की मात्रा काफी अधिक रहती है। पर्यावरण में ऑक्सीजन कम हो जाती है। सांस रोगियों को ऐसे वातावरण में घर से बाहर निकलने से परहेज करना चाहिए। स्मॉग के रहते बारिश होती है तो इससे भी हानिकारक धूल कण पानी के साथ नीचे आएंगे। इसलिए इस बारिश में नहीं भीगना चाहिए।
मास्क का इस्तेमाल करें
आइएमए के सचिव डॉ. संजीव अग्रवाल ने बताया कि वायु प्रदूषण के चलते खांसी के मरीजों की संख्या पहले से दोगुना हो गई है। निजी अस्पतालों में पहले जहां नाममात्र मरीज खांसी की समस्या को लेकर पहुंचते थे, वहीं अब प्रत्येक निजी अस्पताल में 25 से 30 मरीज प्रतिदिन आ रहे हैं। वायु प्रदूषण से बचने के लिए सभी को खासकर छोटे बच्चे, बीमार, बुजुर्ग आदि को अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है। घर से बाहर निकलते समय मास्क और चश्मा का प्रयोग करें।
प्रदूषण से बचाव के उपाय
- मुंह और नाक पर कपड़ा रखकर घर से बाहर निकलें।
- पेड़ और हरियाली वाले स्थान पर अधिक समय बिताएं।
- दमा-सांस के मरीज बहुत जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें।
- सांस लेने में किसी भी तरह की परेशानी होने पर तत्काल चिकित्सक की सलाह लें।
- सुबह और शाम के समय टहलने से बचें।
सबसे प्रदूषित शहरों का एक्यूआई
शहर का नाम एक्यूआई
जींद 463
गाजियाबाद 455
नोएडा 446
हापुड़ 444
फिरोजाबाद 443
बागपत 440
वृंदावन 435
दिल्ली/हिसार 428
बल्लभगढ़ 426
बुलंदशहर 424
लगातार तापमान गिरने के कारण भी एक्यूआई में बढ़ोतरी हो रही है। औद्योगिक क्षेत्रों में लगातार निगरानी की जा रही है। जहां भी एनजीटी के नियमों का उल्लंघन मिलेगा, संबंधित पर कार्रवाई की जाएगी।
-सपना श्रीवास्तव, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी
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बुलंदशहर। दिवाली पर प्रतिबंध के बावजूद खूब आतिशबाजी होने से प्रदूषण खतरनाक स्तर को पार कर गया है। जिले का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) लगातार तीसरे दिन 400 के ऊपर रहा। 424 एक्यूआई के साथ बुलंदशहर जिला देश के सबसे अधिक प्रदूषित शहरों में दसवें नंबर पर रहा। स्वच्छ हवा न मिलने के कारण सांस और खांसी के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है।
जनपद की हवा की गुणवत्ता गत माह से खराब चल रही है। दिवाली पर आतिशबाजी ने वायु प्रदूषण को खतरनाक स्तर को पार करा दिया। दिन प्रति दिन सांस और अस्थमा के रोगियों की परेशानी बढ़ रही है। आंखों में जलन और त्वचा रोग की शिकायतें भी आने लगी हैं। स्मॉग की सफेद चादर के चलते शनिवार और रविवार को सुबह दृश्यता काफी कम रही। वाहन चालकों को काफी परेशानी उठानी पड़ी।
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मौसम विशेषज्ञों के अनुसार तेज हवा चलने और बारिश के बाद ही स्मॉग से छुटकारा मिल सकती है। पर्यावरण अधिकारी और जिला प्रशासन लोगों से पुआल, कूड़ा न जलाने, निर्माण कार्य न करने की अपील कर रहे हैं।
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बरतें सावधानी, हो सकती है परेशानी
स्मॉग में सल्फर डाई ऑक्साइड की मात्रा काफी अधिक रहती है। पर्यावरण में ऑक्सीजन कम हो जाती है। सांस रोगियों को ऐसे वातावरण में घर से बाहर निकलने से परहेज करना चाहिए। स्मॉग के रहते बारिश होती है तो इससे भी हानिकारक धूल कण पानी के साथ नीचे आएंगे। इसलिए इस बारिश में नहीं भीगना चाहिए।
मास्क का इस्तेमाल करें
आइएमए के सचिव डॉ. संजीव अग्रवाल ने बताया कि वायु प्रदूषण के चलते खांसी के मरीजों की संख्या पहले से दोगुना हो गई है। निजी अस्पतालों में पहले जहां नाममात्र मरीज खांसी की समस्या को लेकर पहुंचते थे, वहीं अब प्रत्येक निजी अस्पताल में 25 से 30 मरीज प्रतिदिन आ रहे हैं। वायु प्रदूषण से बचने के लिए सभी को खासकर छोटे बच्चे, बीमार, बुजुर्ग आदि को अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है। घर से बाहर निकलते समय मास्क और चश्मा का प्रयोग करें।
प्रदूषण से बचाव के उपाय
- मुंह और नाक पर कपड़ा रखकर घर से बाहर निकलें।
- पेड़ और हरियाली वाले स्थान पर अधिक समय बिताएं।
- दमा-सांस के मरीज बहुत जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें।
- सांस लेने में किसी भी तरह की परेशानी होने पर तत्काल चिकित्सक की सलाह लें।
- सुबह और शाम के समय टहलने से बचें।
सबसे प्रदूषित शहरों का एक्यूआई
शहर का नाम एक्यूआई
जींद 463
गाजियाबाद 455
नोएडा 446
हापुड़ 444
फिरोजाबाद 443
बागपत 440
वृंदावन 435
दिल्ली/हिसार 428
बल्लभगढ़ 426
बुलंदशहर 424
लगातार तापमान गिरने के कारण भी एक्यूआई में बढ़ोतरी हो रही है। औद्योगिक क्षेत्रों में लगातार निगरानी की जा रही है। जहां भी एनजीटी के नियमों का उल्लंघन मिलेगा, संबंधित पर कार्रवाई की जाएगी।
-सपना श्रीवास्तव, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी