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पंचायत चुनाव : ऋण चुकता नहीं किया तो चुनाव लड़ने का सपना रह जाएगा अधूरा
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पंचायत चुनाव : ऋण चुकता नहीं किया तो चुनाव लड़ने का सपना रह जाएगा अधूरा
बुलंदशहर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारी कर रहे ऐसे ग्रामीणों के मंसूबों पर पानी फिर सकता है, जिनपर सहकारी समितियों और बैंकों का ऋण बकाया चल रहा है। ऐसे ग्रामीणों को सहकारी समिति व बैंकों से नोड्यूज लेना जरूरी होगा। शासन के आदेश पर डीएम ने एआर को-ऑपरेटिव को निर्देश दे दिए हैं। जनपद में वर्तमान समय में 30 हजार से अधिक ऐसे ग्रामीण हैं, जिन पर करीब 100 करोड़ बकाया चल रहा है। बकाया भुगतान किए बिना उनका पंचायत चुनाव लड़ना मुश्किल होगा।
जनपद में सहकारी समितियों की संख्या 60 से अधिक है। इनसे हजारों किसान जुड़े हुए हैं। अधिकतर किसानों ने सहकारी समिति के माध्यम से सहकारी बैंक से ऋण भी लिया हुआ है। ऋण लेने वालों में गांव के वह भी शामिल हैं, जो प्रधान आदि पदों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। सहकारिता विभाग के अफसरों ने बताया कि इस समय ग्रामीणों पर समितियों और सहकारी बैंक का 100 करोड़ से अधिक बकाया चल रहा है। शासन ने आदेश जारी किया है कि चुनाव लड़ने वाले पर यदि समिति का बकाया चल रहा है तो वह बिना नोड्यूज प्राप्त किए नामांकन नहीं भर सकेगा। यह आदेश मिलने पर डीएम रविंद्र कुमार ने एआर को-ऑपरेटिव को निर्देश जारी कर दिए हैं। एआर को-आपरेटिव डॉ. प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि चुनाव लड़ने वाले सभी प्रत्याशियों को सहकारी समिति और सहकारी बैंक से यदि उन्होंने ऋण लिया और वह बकायेदार चल रहे हैं तो नामांकन से पहले उन्हें नोड्यूज लेना जरूरी है। ऐसे लोग बिना नोड्यूज के चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। उन्होंने बताया कि समिति पर 30 जून तक बकाया चुकाना होता है। इस तिथि तक बकाया न चुकाने वालों को बकायेदार घोषित कर कर दिया जाता है। इस बार उन लोगों को बकायेदार की श्रेणी में रखा जाएगा, जो एक साल से ज्यादा पुराने बकायेदार हैं। जनपद में ऐसे बकायेदारों की संख्या 30 हजार से अधिक है। उन्होंने यह भी बताया कि यदि किसी बकायेदार की मृत्यु हो जाती है तो उसके वारिस को भी बकाया चुकाना होता है। यदि बकायेदार का वारिस चुनाव लड़ रहा है तो उसे भी नोड्यूज प्रमाणपत्र लेना होगा।
आरक्षण के लिए अफसरों को दिया जाएगा प्रशिक्षण
बुलंदशहर। शासन ने जनपद में ग्राम पंचायतों के लिए आरक्षण लागू कर दिया गया है। किस ग्राम पंचायत में कौन सीट आरक्षित होनी है। इसको लेकर जनपद के अधिकारियों को दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद उनके द्वारा ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों को ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके बाद उनके द्वारा पंचायतवार आरक्षण लागू किया जाएगा। इसके लिए जिला प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है।
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प्रदेश मुख्यालय से जनपद के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष से लेकर ब्लॉक प्रमुख और ग्राम पंचायतों के लिए आरक्षण लागू कर दिया है। इसके अलावा 951 ग्राम पंचायतों के लिए भी आरक्षण लागू किया है। लेकिन अभी ये स्थिति साफ नहीं है कि कौन से गांव में कौन सी सीट आरक्षित रहेगी। इसको लेकर जिला स्तर पर अधिकारी शासन में प्रशिक्षण लेने के लिए जाएंगे। वहां से प्रशिक्षण के बाद अधिकारी ब्लॉक स्तर के अधिकारी और कर्मचारियों को इसका प्रशिक्षण देंगे। इसके बाद में वहां पर गांव की स्थिति साफ होगी। इस संबंध में जिला पंचायत राज अधिकारी नन्दलाल ने बताया कि 20 फरवरी से एक मार्च तक जिले में आरक्षित सीटों का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।
इस तरह से चलेगी आरक्षण की कार्रवाई
- 16 और 17 फरवरी तक जिला स्तरीय अधिकारियों को लखनऊ में प्रशिक्षण।
- 18 और 19 फरवरी को जनपद स्तर पर ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों को प्रशिक्षण।
- 20 फरवरी से एक मार्च तक ग्राम प्रधान, जिला पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य और ग्राम पंचायत सदस्य के आरक्षण और आवंटन का प्रस्ताव तैयार होगा।
- दो मार्च से तीन मार्च तक डीएम विभिन्न पदों के आवंटन की सूची का प्रकाशन करेंगे।
- चार से आठ मार्च तक आपत्तियां मांगी जाएंगी।
- नौ मार्च को आपत्तियों को जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय में एकत्र किया जाएगा।
- 10 से 12 मार्च तक डीएम की अध्यक्षता में गठित कमेटी आपत्तियों का निस्तारण कर अंतिम सूची तैयार करेगी।
- 13 और 14 मार्च तक डीएम ग्राम प्रधान समेत अन्य पदों की अंतिम सूची का प्रकाशन करेंगे।
- 15 मार्च को डीएम पंचायत राज निदेशालय को सूचना उपलब्ध कराएंगे।
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बुलंदशहर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारी कर रहे ऐसे ग्रामीणों के मंसूबों पर पानी फिर सकता है, जिनपर सहकारी समितियों और बैंकों का ऋण बकाया चल रहा है। ऐसे ग्रामीणों को सहकारी समिति व बैंकों से नोड्यूज लेना जरूरी होगा। शासन के आदेश पर डीएम ने एआर को-ऑपरेटिव को निर्देश दे दिए हैं। जनपद में वर्तमान समय में 30 हजार से अधिक ऐसे ग्रामीण हैं, जिन पर करीब 100 करोड़ बकाया चल रहा है। बकाया भुगतान किए बिना उनका पंचायत चुनाव लड़ना मुश्किल होगा।
जनपद में सहकारी समितियों की संख्या 60 से अधिक है। इनसे हजारों किसान जुड़े हुए हैं। अधिकतर किसानों ने सहकारी समिति के माध्यम से सहकारी बैंक से ऋण भी लिया हुआ है। ऋण लेने वालों में गांव के वह भी शामिल हैं, जो प्रधान आदि पदों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। सहकारिता विभाग के अफसरों ने बताया कि इस समय ग्रामीणों पर समितियों और सहकारी बैंक का 100 करोड़ से अधिक बकाया चल रहा है। शासन ने आदेश जारी किया है कि चुनाव लड़ने वाले पर यदि समिति का बकाया चल रहा है तो वह बिना नोड्यूज प्राप्त किए नामांकन नहीं भर सकेगा। यह आदेश मिलने पर डीएम रविंद्र कुमार ने एआर को-ऑपरेटिव को निर्देश जारी कर दिए हैं। एआर को-आपरेटिव डॉ. प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि चुनाव लड़ने वाले सभी प्रत्याशियों को सहकारी समिति और सहकारी बैंक से यदि उन्होंने ऋण लिया और वह बकायेदार चल रहे हैं तो नामांकन से पहले उन्हें नोड्यूज लेना जरूरी है। ऐसे लोग बिना नोड्यूज के चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। उन्होंने बताया कि समिति पर 30 जून तक बकाया चुकाना होता है। इस तिथि तक बकाया न चुकाने वालों को बकायेदार घोषित कर कर दिया जाता है। इस बार उन लोगों को बकायेदार की श्रेणी में रखा जाएगा, जो एक साल से ज्यादा पुराने बकायेदार हैं। जनपद में ऐसे बकायेदारों की संख्या 30 हजार से अधिक है। उन्होंने यह भी बताया कि यदि किसी बकायेदार की मृत्यु हो जाती है तो उसके वारिस को भी बकाया चुकाना होता है। यदि बकायेदार का वारिस चुनाव लड़ रहा है तो उसे भी नोड्यूज प्रमाणपत्र लेना होगा।
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आरक्षण के लिए अफसरों को दिया जाएगा प्रशिक्षण
बुलंदशहर। शासन ने जनपद में ग्राम पंचायतों के लिए आरक्षण लागू कर दिया गया है। किस ग्राम पंचायत में कौन सीट आरक्षित होनी है। इसको लेकर जनपद के अधिकारियों को दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद उनके द्वारा ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों को ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके बाद उनके द्वारा पंचायतवार आरक्षण लागू किया जाएगा। इसके लिए जिला प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है।
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प्रदेश मुख्यालय से जनपद के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष से लेकर ब्लॉक प्रमुख और ग्राम पंचायतों के लिए आरक्षण लागू कर दिया है। इसके अलावा 951 ग्राम पंचायतों के लिए भी आरक्षण लागू किया है। लेकिन अभी ये स्थिति साफ नहीं है कि कौन से गांव में कौन सी सीट आरक्षित रहेगी। इसको लेकर जिला स्तर पर अधिकारी शासन में प्रशिक्षण लेने के लिए जाएंगे। वहां से प्रशिक्षण के बाद अधिकारी ब्लॉक स्तर के अधिकारी और कर्मचारियों को इसका प्रशिक्षण देंगे। इसके बाद में वहां पर गांव की स्थिति साफ होगी। इस संबंध में जिला पंचायत राज अधिकारी नन्दलाल ने बताया कि 20 फरवरी से एक मार्च तक जिले में आरक्षित सीटों का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।
इस तरह से चलेगी आरक्षण की कार्रवाई
- 16 और 17 फरवरी तक जिला स्तरीय अधिकारियों को लखनऊ में प्रशिक्षण।
- 18 और 19 फरवरी को जनपद स्तर पर ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों को प्रशिक्षण।
- 20 फरवरी से एक मार्च तक ग्राम प्रधान, जिला पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य और ग्राम पंचायत सदस्य के आरक्षण और आवंटन का प्रस्ताव तैयार होगा।
- दो मार्च से तीन मार्च तक डीएम विभिन्न पदों के आवंटन की सूची का प्रकाशन करेंगे।
- चार से आठ मार्च तक आपत्तियां मांगी जाएंगी।
- नौ मार्च को आपत्तियों को जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय में एकत्र किया जाएगा।
- 10 से 12 मार्च तक डीएम की अध्यक्षता में गठित कमेटी आपत्तियों का निस्तारण कर अंतिम सूची तैयार करेगी।
- 13 और 14 मार्च तक डीएम ग्राम प्रधान समेत अन्य पदों की अंतिम सूची का प्रकाशन करेंगे।
- 15 मार्च को डीएम पंचायत राज निदेशालय को सूचना उपलब्ध कराएंगे।