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गांवों से बैनर-पोस्टर गायब, प्रचार के लिए सोशल मीडिया बना सहारा
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दानपुर क्षेत्र की ग्राम पंचायत सबलपुर में चुनावी चर्चा करते ग्रामीण।
- फोटो : BULANDSHAHR
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गांवों से बैनर-पोस्टर गायब, प्रचार के लिए सोशल मीडिया बना सहारा
बुलंदशहर। ग्राम पंचायतों में चुनाव चरम की ओर बढ़ रहा है। एक ओर जहां दावेदार जीत के लिए हर हथकंडा अपना रहे हैं। वहीं, गांवों में प्रचार का तरीका भी बदल गया है। प्रचार के लिए सोशल मीडिया हथियार बन गया है तो दावेदार सुबह शाम नमस्ते भी व्हाट्सएप आदि से कर रहे हैं। दावेदारों की घर से लेकर खेत तक की दौड़ हो रही है। गांवों में चुनाव को लेकर चल रही तैयारी आदि का पता करने के लिए बृहस्पतिवार को अमर उजाला के पांच ग्राम पंचायतों का दौरा किया। इस दौरान गांवों में चुनाव पर खासी चर्चा भी होती मिली।
ग्राम पंचायत इच्छावरी
ब्लॉक दानपुर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत इच्छावरी में 3600 मतदाता हैं और आठ हजार से अधिक आबादी है। प्रधान पद की सीट ओबीसी के लिए आरक्षित है। इस पद पर एक दर्जन दावेदार अपनी ताल ठोक चुके हैं। वह अपनी-अपनी जीत के लिए हर हथकंडा अपना रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि दावेदार रात में वोटरों के घर शराब भी पहुंचा रहे हैं। इस बार के चुनाव में सोशल मीडिया का प्रचलन अधिक देखने को मिल रहा है। गांव में चुनाव पर चर्चा कर रहे ग्रामीण कंचन सिंह, राकेश कुमार, राजकुमार शर्मा, राजेश और हरेंद्र कुमार ने बताया कि इस बार चुनाव में बैनर-पोस्टर कम दिखाई दे रहे हैं। प्रत्याशियों के मेसेज व्हाट्सएप पर आ रहे हैं।
ग्राम पंचायत सबलपुर
ब्लॉक दानपुर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत की आबादी नौ हजार के करीब है। यहां पर तीन हजार मतदाता हैं। प्रधान की सीट एससी वर्ग के लिए आरक्षित है। प्रधानी के चुनाव पांच में दावेदार मैदान में हैं। गांव की चौपाल पर चुनाव पर चर्चा करते मिले ग्रामीण विनोद कुमार, संजय नागर और विपिन कुमार आदि ने बताया कि इस बार का चुनाव कुछ अलग है। दावेदार वोट के लिए जहां सोशल मीडिया का प्रयोग कर रहे हैं तो जीत के लिए घर से लेकर खेत तक की दौड़ लगा रहे हैं। कोई भी दावेदार अपने को कम नहीं मान रहा है और अपनी-अपनी जीत की ताल ठोक रहा है।
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ग्राम पंचायत बनैल
ब्लॉक पहासू के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत की जनसंख्या 13 हजार से अधिक है और मतदाता 6500 हैं। इस समय ग्राम प्रधान के चुनाव को लेकर गांव में रौनक बढ़ गई है। प्रधान की सीट सामान्य है। इस पद पर चार दावेदार चुनावी मैदान में हैं। ग्रामीणों ने बताया कि सभी प्रत्याश्ी अपनी-अपनी जीत का दावा करते हुए वोट के लिए हर तरह का हथकंडा अपना रहे हैं। वर्ष 2015 में हुए चुनाव और अबकी बार हो रहे चुनाव में काफी बदलाव देखने को मिल रहा है। रात के अंधेरे में वोटरों के घर शराब पहुंचाई जा रही है।
ग्राम पंचायत मैना मौजपुर
ब्लॉक खुर्जा क्षेत्र की ग्राम पंचायत मैना मौजपुर में सात हजार मतदाता हैं और इसकी आबादी 15 हजार से अधिक है। प्रधानी पद की सीट ओबीसी के लिए आरक्षित है। इस सीट पर पांच दावेदार ताल ठाेंकते हुए उन्होंने अपनी जीत के लिए गणित बिठाने के साथ प्रचार-प्रसार तेज कर दिया है। ग्रामीणों ने बताया कि सभी प्रत्याशी अपनी जीत के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। घर-घर जाकर संपर्क करने के साथ ही गांव के विकास के सपने दिखा रहे हैं। वोटरों को रिझाने के लिए ठंडे पेयजल आदि का वितरण किया जा रहा है।
ग्राम पंचायत सुरजावली
ब्लॉक अरनिया के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत सुरजावली में 2600 मतदाता हैं और इसकी आबादी छह हजार से अधिक है। प्रधान पद ओबीसी के लिए आरक्षित है। यहां पर चार से अधिक प्रधानी के दावेदार हैं। ग्रामीणों के अनुसार नामांकन का समय नजदीक आते ही गांव में प्रचार-प्रसार तेज हो गया है। सभी दावेदारों ने वोटरों को रिझाने और वोट पक्की करने के लिए संपर्क तेज कर दिया है। इनके समर्थक गांव से बाहर रहने वालों को मतदान वाले दिन आने के लिए संपर्क कर रहे हैं।
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बुलंदशहर। ग्राम पंचायतों में चुनाव चरम की ओर बढ़ रहा है। एक ओर जहां दावेदार जीत के लिए हर हथकंडा अपना रहे हैं। वहीं, गांवों में प्रचार का तरीका भी बदल गया है। प्रचार के लिए सोशल मीडिया हथियार बन गया है तो दावेदार सुबह शाम नमस्ते भी व्हाट्सएप आदि से कर रहे हैं। दावेदारों की घर से लेकर खेत तक की दौड़ हो रही है। गांवों में चुनाव को लेकर चल रही तैयारी आदि का पता करने के लिए बृहस्पतिवार को अमर उजाला के पांच ग्राम पंचायतों का दौरा किया। इस दौरान गांवों में चुनाव पर खासी चर्चा भी होती मिली।
ग्राम पंचायत इच्छावरी
ब्लॉक दानपुर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत इच्छावरी में 3600 मतदाता हैं और आठ हजार से अधिक आबादी है। प्रधान पद की सीट ओबीसी के लिए आरक्षित है। इस पद पर एक दर्जन दावेदार अपनी ताल ठोक चुके हैं। वह अपनी-अपनी जीत के लिए हर हथकंडा अपना रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि दावेदार रात में वोटरों के घर शराब भी पहुंचा रहे हैं। इस बार के चुनाव में सोशल मीडिया का प्रचलन अधिक देखने को मिल रहा है। गांव में चुनाव पर चर्चा कर रहे ग्रामीण कंचन सिंह, राकेश कुमार, राजकुमार शर्मा, राजेश और हरेंद्र कुमार ने बताया कि इस बार चुनाव में बैनर-पोस्टर कम दिखाई दे रहे हैं। प्रत्याशियों के मेसेज व्हाट्सएप पर आ रहे हैं।
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ग्राम पंचायत सबलपुर
ब्लॉक दानपुर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत की आबादी नौ हजार के करीब है। यहां पर तीन हजार मतदाता हैं। प्रधान की सीट एससी वर्ग के लिए आरक्षित है। प्रधानी के चुनाव पांच में दावेदार मैदान में हैं। गांव की चौपाल पर चुनाव पर चर्चा करते मिले ग्रामीण विनोद कुमार, संजय नागर और विपिन कुमार आदि ने बताया कि इस बार का चुनाव कुछ अलग है। दावेदार वोट के लिए जहां सोशल मीडिया का प्रयोग कर रहे हैं तो जीत के लिए घर से लेकर खेत तक की दौड़ लगा रहे हैं। कोई भी दावेदार अपने को कम नहीं मान रहा है और अपनी-अपनी जीत की ताल ठोक रहा है।
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ग्राम पंचायत बनैल
ब्लॉक पहासू के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत की जनसंख्या 13 हजार से अधिक है और मतदाता 6500 हैं। इस समय ग्राम प्रधान के चुनाव को लेकर गांव में रौनक बढ़ गई है। प्रधान की सीट सामान्य है। इस पद पर चार दावेदार चुनावी मैदान में हैं। ग्रामीणों ने बताया कि सभी प्रत्याश्ी अपनी-अपनी जीत का दावा करते हुए वोट के लिए हर तरह का हथकंडा अपना रहे हैं। वर्ष 2015 में हुए चुनाव और अबकी बार हो रहे चुनाव में काफी बदलाव देखने को मिल रहा है। रात के अंधेरे में वोटरों के घर शराब पहुंचाई जा रही है।
ग्राम पंचायत मैना मौजपुर
ब्लॉक खुर्जा क्षेत्र की ग्राम पंचायत मैना मौजपुर में सात हजार मतदाता हैं और इसकी आबादी 15 हजार से अधिक है। प्रधानी पद की सीट ओबीसी के लिए आरक्षित है। इस सीट पर पांच दावेदार ताल ठाेंकते हुए उन्होंने अपनी जीत के लिए गणित बिठाने के साथ प्रचार-प्रसार तेज कर दिया है। ग्रामीणों ने बताया कि सभी प्रत्याशी अपनी जीत के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। घर-घर जाकर संपर्क करने के साथ ही गांव के विकास के सपने दिखा रहे हैं। वोटरों को रिझाने के लिए ठंडे पेयजल आदि का वितरण किया जा रहा है।
ग्राम पंचायत सुरजावली
ब्लॉक अरनिया के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत सुरजावली में 2600 मतदाता हैं और इसकी आबादी छह हजार से अधिक है। प्रधान पद ओबीसी के लिए आरक्षित है। यहां पर चार से अधिक प्रधानी के दावेदार हैं। ग्रामीणों के अनुसार नामांकन का समय नजदीक आते ही गांव में प्रचार-प्रसार तेज हो गया है। सभी दावेदारों ने वोटरों को रिझाने और वोट पक्की करने के लिए संपर्क तेज कर दिया है। इनके समर्थक गांव से बाहर रहने वालों को मतदान वाले दिन आने के लिए संपर्क कर रहे हैं।