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बुखार से एक और मासूम की मौत, दहशत में ग्रामीण
अमर उजाला ब्यूरो, बुलंदशहर
Updated Wed, 06 Jul 2016 12:38 AM IST
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दवा बांटते कर्मचारी
- फोटो : अमर उजाला
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क्षेत्र के गांव नगला गोविंदपुर में जानलेवा बुखार तेजी से अपने पांव पसार रहा है। बीते दिन किशोर की मौत के बाद मंगलवार को मासूम बच्ची ने भी बुखार के चलते ही दम तोड़ दिया। गांव में करीब दो दर्जन से ज्यादा ग्रामीण बुखार की चपेट में हैं।
दो मौतों से ग्रामीणों में दहशत बढ़ने लगी है। उनका आरोप है कि सूचना देने पर अफसरों ने गांव में दोपहर तक कोई डॉक्टर नहीं भेजा। अलबत्ता फार्मसिस्ट भेजकर दवाइयां जरूर बंटवा दीं।
चोला क्षेत्र के गांव नगला गोविंदपुर में पिछले कई दिनों से बुखार से पीड़ित सुम्बो पुत्री अब्दुल कादिर ने मंगलवार को दम तोड़ दिया। उसका एक निजी अस्पताल में उपचार चल रहा था। सोमवार रात उसे उल्टी और दस्त हुए। परिजन उसे लेकर अस्पताल जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही बच्ची ने दम तोड़ दिया।
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बुखार से गांव में दो मौत के बाद बेशक स्वास्थ्य अफसर हरकत में न आए हों, लेकिन ग्रामीण दहशत में आ गए हैं। गांव में करीब दो दर्जन से ज्यादा ग्रामीण जानलेवा बुखार की चपेट में हैं। ग्राम प्रधान फरमुद्दीन ने बताया कि दोपहर तक कोई स्वास्थ्य टीम गांव में नहीं पहुंची
। जब बुखार से एक और मौत हो गई, तो डॉक्टरों की जगह फार्मसिस्टों को गांव में भेज दिया गया। फार्मासिस्टों ने न तो किसी ग्रामीण का चेकअप किया न ही कोई जांच। टीम ने अपने साथ लाई दवा ग्रामीणों में बांट दी और चलते बने।
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दो मौतों से ग्रामीणों में दहशत बढ़ने लगी है। उनका आरोप है कि सूचना देने पर अफसरों ने गांव में दोपहर तक कोई डॉक्टर नहीं भेजा। अलबत्ता फार्मसिस्ट भेजकर दवाइयां जरूर बंटवा दीं।
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चोला क्षेत्र के गांव नगला गोविंदपुर में पिछले कई दिनों से बुखार से पीड़ित सुम्बो पुत्री अब्दुल कादिर ने मंगलवार को दम तोड़ दिया। उसका एक निजी अस्पताल में उपचार चल रहा था। सोमवार रात उसे उल्टी और दस्त हुए। परिजन उसे लेकर अस्पताल जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही बच्ची ने दम तोड़ दिया।
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बुखार से गांव में दो मौत के बाद बेशक स्वास्थ्य अफसर हरकत में न आए हों, लेकिन ग्रामीण दहशत में आ गए हैं। गांव में करीब दो दर्जन से ज्यादा ग्रामीण जानलेवा बुखार की चपेट में हैं। ग्राम प्रधान फरमुद्दीन ने बताया कि दोपहर तक कोई स्वास्थ्य टीम गांव में नहीं पहुंची
। जब बुखार से एक और मौत हो गई, तो डॉक्टरों की जगह फार्मसिस्टों को गांव में भेज दिया गया। फार्मासिस्टों ने न तो किसी ग्रामीण का चेकअप किया न ही कोई जांच। टीम ने अपने साथ लाई दवा ग्रामीणों में बांट दी और चलते बने।