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Bulandshahar News: जल शोधन व संरक्षण न करने पर 500 से अधिक उद्योगों व वाणिज्यिक इकाइयों को नोटिस
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बुलंदशहर। जनपदीय भूगर्भ जल समिति ने जल शोधन व संरक्षण न करने पर जिले में संचालित 500 से अधिक उद्योगों व वाणिज्यिक इकाइयों को नोटिस जारी किए हैं। समिति ने इन्हें जल शोधन व संरक्षण के उपाय करने के कड़े निर्देश दिए हैं, ताकि लगातार गिर रहे भूगर्भ जलस्तर को बचाया जा सके।
सीडीओ के अनुसार उत्तर प्रदेश भूगर्भ जल प्रबंधन एवं विनिमयन अधिनियम 2019 के अंतर्गत यह प्रावधान है कि उद्योग एवं वाणिज्यिक इकाई जो भूगर्भ जल का दोहन कर रही हैं, उन्हें भूगर्भ जल प्रबंधन एवं विनिमयन अधिनियम के अन्तर्गत अपना पंजीकरण एवं अनापत्ति प्रमाण पत्र रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। पंजीकरण न कराए जाने या पंजीकरण कराने के बाद दोहन किए गए भूगर्भ जल के सापेक्ष रिचार्ज न किए जाने पर अधिनियम में दंड के प्रावधान किए गए हैं।
जनपद में औद्योगिक सुगमता के दृष्टिगत उद्योगों व वाणिज्यिक इकाइयों को भूगर्भ जल निकालने की अनुमति समिति शपथ पत्र के आधार पर देती है। उन्होंने बताया कि जल दोहन करने पर इकाइयों को जल शोधन व संरक्षण का इंतजाम करना होता है। साथ ही इसकी समिति को जानकारी देनी होती है। जिन उद्योगों व वाणिज्यिक इकाइयों को नोटिस जारी किए गए, उन्होंने यह जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। ऐसे में करीब 10 दिन पहले इन सभी को नोटिस जारी किया गया। नोटिस जारी होने के बाद कुछ उद्योगों ने जल शोधन व संरक्षण करने के लिए पहल शुरू कर दी है। बताते चलें कि जिले में लगातार भूगर्भ जल स्तर गिर रहा है। 16 में से 10 ब्लॉक डार्कजोन में शामिल हो चुके हैं।
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दोगुना अधिक जल शोधन व संरक्षण जरूरी
अधिकारियों के अनुसार कोई उद्योग व वाणिज्यिक इकाई जितना जल दोहन करती है, उसे उससे दोगुना अधिक जल शोधन व संरक्षण करना जरूरी होता है। जिले में उद्योग व वाणिज्यिक इकाई ऐसा नहीं कर रही हैं। अब इसके लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही नोटिस जारी कर उन्हें जल शोधन व संरक्षण के निर्देश दिए जा रहे हैं। उन्हें अवगत कराया जा रहा है कि वह हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाकर जल शोधन कर सकते हैं। यदि उनके पास जल संरक्षण के लिए जगह नहीं हैं तो वह जनपदीय भूगर्भ जल समिति को आवेदन कर जमीन की मांग कर सकते हैं।
पांच उद्योगों ने जल संरक्षण के लिए मांगी जमीन
सीडीओ के अनुसार नोटिस जारी होने के बाद पांच उद्योगों ने जल संरक्षण के लिए जमीन की मांग की है। इन उद्योगों ने अब तक भूगर्भ जल समिति को 6 हेक्टेयर तालाबों के लिए आवेदन प्राप्त हुआ है। इन्हें प्रशासन के द्वारा विभिन्न ग्राम पंचायतों में तालाब उपलब्ध कराए जाएंगे। इन तालाबों को उक्त उद्योग अमृत सरोवर एवं मॉडल तालाबों के रूप में विकसित करेंगे। साथ ही इन उद्योगों से यह अपेक्षा की गई है कि वह तालाब की वाटर होल्डिंग कैपेसिटी बढ़ाएंगे। साथ ही साफ-सफाई एवं सौदर्यीकरण करेंगें।
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Iलगातार गिर रहे जलस्तर को बचाने के साथ उद्योग और वाणिज्यिक इकाइयों के साथ आमजन को जागरूक करने के लिए यह पहल शुरू की गई है। भूगर्भ जल समिति के द्वारा नोटिस जारी किए गए हैं। - निशा ग्रेवाल, मुख्य विकास अधिकारीI
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सीडीओ के अनुसार उत्तर प्रदेश भूगर्भ जल प्रबंधन एवं विनिमयन अधिनियम 2019 के अंतर्गत यह प्रावधान है कि उद्योग एवं वाणिज्यिक इकाई जो भूगर्भ जल का दोहन कर रही हैं, उन्हें भूगर्भ जल प्रबंधन एवं विनिमयन अधिनियम के अन्तर्गत अपना पंजीकरण एवं अनापत्ति प्रमाण पत्र रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। पंजीकरण न कराए जाने या पंजीकरण कराने के बाद दोहन किए गए भूगर्भ जल के सापेक्ष रिचार्ज न किए जाने पर अधिनियम में दंड के प्रावधान किए गए हैं।
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जनपद में औद्योगिक सुगमता के दृष्टिगत उद्योगों व वाणिज्यिक इकाइयों को भूगर्भ जल निकालने की अनुमति समिति शपथ पत्र के आधार पर देती है। उन्होंने बताया कि जल दोहन करने पर इकाइयों को जल शोधन व संरक्षण का इंतजाम करना होता है। साथ ही इसकी समिति को जानकारी देनी होती है। जिन उद्योगों व वाणिज्यिक इकाइयों को नोटिस जारी किए गए, उन्होंने यह जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। ऐसे में करीब 10 दिन पहले इन सभी को नोटिस जारी किया गया। नोटिस जारी होने के बाद कुछ उद्योगों ने जल शोधन व संरक्षण करने के लिए पहल शुरू कर दी है। बताते चलें कि जिले में लगातार भूगर्भ जल स्तर गिर रहा है। 16 में से 10 ब्लॉक डार्कजोन में शामिल हो चुके हैं।
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दोगुना अधिक जल शोधन व संरक्षण जरूरी
अधिकारियों के अनुसार कोई उद्योग व वाणिज्यिक इकाई जितना जल दोहन करती है, उसे उससे दोगुना अधिक जल शोधन व संरक्षण करना जरूरी होता है। जिले में उद्योग व वाणिज्यिक इकाई ऐसा नहीं कर रही हैं। अब इसके लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही नोटिस जारी कर उन्हें जल शोधन व संरक्षण के निर्देश दिए जा रहे हैं। उन्हें अवगत कराया जा रहा है कि वह हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाकर जल शोधन कर सकते हैं। यदि उनके पास जल संरक्षण के लिए जगह नहीं हैं तो वह जनपदीय भूगर्भ जल समिति को आवेदन कर जमीन की मांग कर सकते हैं।
पांच उद्योगों ने जल संरक्षण के लिए मांगी जमीन
सीडीओ के अनुसार नोटिस जारी होने के बाद पांच उद्योगों ने जल संरक्षण के लिए जमीन की मांग की है। इन उद्योगों ने अब तक भूगर्भ जल समिति को 6 हेक्टेयर तालाबों के लिए आवेदन प्राप्त हुआ है। इन्हें प्रशासन के द्वारा विभिन्न ग्राम पंचायतों में तालाब उपलब्ध कराए जाएंगे। इन तालाबों को उक्त उद्योग अमृत सरोवर एवं मॉडल तालाबों के रूप में विकसित करेंगे। साथ ही इन उद्योगों से यह अपेक्षा की गई है कि वह तालाब की वाटर होल्डिंग कैपेसिटी बढ़ाएंगे। साथ ही साफ-सफाई एवं सौदर्यीकरण करेंगें।
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Iलगातार गिर रहे जलस्तर को बचाने के साथ उद्योग और वाणिज्यिक इकाइयों के साथ आमजन को जागरूक करने के लिए यह पहल शुरू की गई है। भूगर्भ जल समिति के द्वारा नोटिस जारी किए गए हैं। - निशा ग्रेवाल, मुख्य विकास अधिकारीI