{"_id":"58b1ce824f1c1b485cb2349d","slug":"no-peon-in-charge-of-investigating-officer","type":"story","status":"publish","title_hn":"अफसर नहीं चपरासी को जांच का जिम्मा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अफसर नहीं चपरासी को जांच का जिम्मा
अमर उजाला, ब्यूरो /बुलंदशहर
Updated Sun, 26 Feb 2017 12:05 AM IST
विज्ञापन
गिराया जा रहा अवैध निर्माण
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बुलंदशहर विकास प्राधिकरण के अफसरों ने जनपद में हो रहे अवैध निर्माणों की जांच के लिए चपरासी को जिम्मेदारी दी गई। जब चपरासी यह जिम्मेदारी निर्वाहन नहीं कर सका तो उसे कारण बताओ नोटिस भी जारी कर दिया गया। मामला तूल पकड़ते ही अफसरों में हड़कंप मच गया है। अब अधिकारी जांच की बात कह रहे हैं।
विज्ञापन
बुलंदशहर विकास प्राधिकरण में चपरासी के पद पर तैनात राकेश कुमार को अफसरों ने जांच अधिकारी बना दिया। चपरासी को बुलंदशहर में 10 जगहों पर हो रहे अवैध निर्माण के लिए जांच की जिम्मेदारी सौंप दी गई।
विज्ञापन
चपरासी के पद पर तैनात राकेश कुमार को बकायदा अवैध निर्माण किए जा रहे गोदामों, दुकानों, हॉलों और मकानों की जांच के आदेश दिए गए। जब चपरासी इस जिम्मेदारी को निर्वाहन नहीं कर सका तो उसे कार्रवाई की चेतावनी जारी करते हुए नोटिस जारी कर दिया गया।
विज्ञापन
नोटिस में चपरासी को चेतावनी दी गई कि यदि तीन दिन में आपने अवैध निर्माण की जांच नहीं करने का स्पष्टीकरण नहीं दिया तो आपके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश बीडीए के सक्षम अधिकारी की तरफ से जारी किया गया है। पत्र में डिस्पैच संख्या भी दर्ज है।
दो अफसरों की लड़ाई का नतीजा
दरअसल बीडीए में इस समय काफी उथल पुथल मची हुई है। दो अफसरों के बीच कार्यक्षेत्र को लेकर चल रही जंग का नतीजा है कि कर्मियों को भी नहीं पता कि उन्हें क्या काम करना है। कभी कोई अफसर कर्मियों की ड्यूटी कहीं लगा देता है तो कभी दूसरा अफसर। दोनों अफसरों की लड़ाई से कर्मी भी परेशान हो गए हैं।
मेरे द्वारा ऐसा कोई पत्र जारी नहीं किया गया है। अब यह पत्र किस अफसर ने जारी किया है, इसकी जांच कराई जाएगी। पूरे मामले से जिलाधिकारी को अवगत कराया जाएगा। -रितु पुनिया, सचिव, बीडीए