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महिला अस्पताल में वेंटिलेटर न होने से दम तोड़ रहे नवजात

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 06 Mar 2022 10:26 PM IST
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new born care unit
महिला अस्पताल में वेंटिलेटर न होने से दम तोड़ रहे नवजात
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बुलंदशहर। सरकार जिले में एक तरफ मेडिकल कॉलेज बनवा रही है, लेकिन जिला महिला अस्पताल में अब तक वेंटिलेटर की सुविधा नहीं है। इसका खामियाजा लोगों को उठाना पड़ रहा है। वेंटिलेटर न होने से अस्पताल में 10 महीने में 24 नवजात दम तोड़ चुके हैं। जिला महिला अस्पताल ने इस संबंध में शासन को रिपोर्ट भेजी है।
निमोनिया, हृदय रोग, कुपोषित, कमजोर और संक्रमण के शिकार नवजात बच्चों के उपचार के लिए जिला महिला अस्पताल में पांच वर्ष पूर्व से एसएनसीयू (सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट) संचालित है। यहां वार्मर मशीन और ऑक्सीजन की व्यवस्था तो है लेकिन अब तक वेंटिलेटर की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में जरा सी हालत बिगड़ने पर नवजातों को रेफर कर दिया जाता है। पिछले 10 माह में 689 नवजात एसएनसीयू में भर्ती किए गए। इनमें 24 की मौत हो गई। जबकि 160 नवजातों को गंभीर हालत में हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।
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यह है व्यवस्था
एसएनसीयू में दो बाल रोग विशेषज्ञ समेत तीन चिकित्सक, करीब 10 स्टाफ नर्सों की तैनाती है। जिला महिला अस्पताल के साथ ही जिले के अन्य सरकारी चिकित्सालयों के अलावा निजी अस्पतालों में जन्म लेने वाले गंभीर नवजातों को भर्ती किया जाता है। यहां भर्ती होने वाले नवजात 24 घंटे विशेषज्ञ चिकित्सक और स्टाफ की निगरानी में रहते हैं।
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जुलाई व जनवरी माह में हुई सर्वाधिक मौत
एसएनसीयू वार्ड में अप्रैल माह से जनवरी माह तक 689 नवजात भर्ती किए गए। इसमें सर्वाधिक मौत जुलाई माह में पांच और नवंबर व जनवरी माह में चार-चार नवजातों की मौत हुई है। जबकि सितंबर माह में तीन, अगस्त, अक्तूबर व दिसंबर माह में दो-दो नवजातों की मौत हुई है। साथ ही अप्रैल-जून एक-एक नवजात की मौत हुई। वहीं, मई माह में मौत का आंकड़ा शून्य रहा।
एसएनसीयू में बाल रोग विशेषज्ञ समेत संसाधनों की कमी के लिए शासन को पत्र भेजा जा चुका है। वेंटिलेटर प्राप्त हो जाएं तो नवजातों को रेफर नहीं करना पड़ेगा। - डॉ. ज्योत्सना, सीएमएस महिला अस्पताल

नवजात की मौत कई कारणों से होती है। एसएनसीयू वार्ड में कई नवजात ऐसे भर्ती होते हैं, जिनकी हालत बेहद नाजुक होती है। उन्हें समय से भर्ती न कराने पर भी मौत हो जाती है। एसएनसीयू वार्ड में शिशु मृत्यु दर को बढ़ने से रोकने का प्रयास किया जाएगा। - डॉ. विनय कुमार सिंह, सीएमओ
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