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तब पूरा गांव चौपाल पर इकट्ठा होकर सुनता था रेडियो
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रामकली देवी।
- फोटो : BULANDSHAHR
तब पूरा गांव चौपाल पर इकट्ठा होकर सुनता था रेडियो
बुलंदशहर। वर्ष 1927 में देश में शुरू हुआ रेडियो का सफर इन 94 सालों में रोचक किस्सों- कहानियों से भरा है। नई पीढ़ी भले ही मोबाइल और कारों में रेडियो लेकर चलती हो पर एक जमाना था जब रेडियो किसी अजूबे से कम नहीं था। तब रेडियो के लिए लाइसेंस लेना होता था। उस जमाने के बुजुर्गों के जेहन में आज भी उन अनदेखे चेहरों की आवाज है जो वह रेडियो पर सुना करते थे।
मोहल्ला आवास विकास गोकुलधाम निवासी करीब 100 वर्षीय रामकली देवी ने बताया कि वर्ष 1962 में उनके घर रेडियो आया था। तब रेडियो प्रसारण सुनने के लिए लाइसेंस लेना होता था। डोमेस्टिक लाइसेंस अपने लिए लिया जाता था और कॉमर्शियल लाइसेंस अन्य लोगों को प्रसारण सुनवाने के लिए लिया जाता था। उस समय पूरे मोहल्ले में चुनिंदा घरों में ही रेडियो था। जिस तरह टीवी पर रामायण और महाभारत देखने के लिए घरों में भीड़ जुटती थी, उसी तरह रेडियो सुनने के लिए भी लोग एकत्रित हुआ करते थे। तब रेडियो दहेज में भी दिया जाता था।
1952 में खरीदा पहला रेडियो
नगर के पुरानी मंडी निवासी 97 वर्षीय जगतप्रकाश की आंखों से जरूर धुंधला दिखाई देता है, लेकिन, रेडियो से जुड़ी यादें आज भी उनके जेहन में उजली हैं। वर्ष 1952 में उन्होंने रेडियो खरीदा था। मुस्कुराते हुए बताते हैं कि रात नौ बजे के बुलेटिन में एक ही आवाज सुनाई देती थी... ये आकाशवाणी है.. अब आप देवकीनंदन से समाचार सुनिए।
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रेडियो पर ही सुना भारत-पाक और कारगिल युद्ध का हाल
अगौता थाना क्षेत्र के गांव लुहारली निवासी 88 वर्षीय ओमवीर सिंह बताते हैं कि रेडियो उनका पुराना साथी रहा है। खेती से भारत-पाकिस्तान युद्ध और कारगिल युद्ध तक की सूचनाएं उन्हें रेडियो से ही मिली। वर्ष 1967 में उन्होंने रेडियो खरीदा और लाइसेंस भी लिया था। तब जिस घर में रेडियो होता था उसे समृद्ध माना जाता था। ओमवीर कहते हैं कि आज मोबाइल फोन में ही रेडियो आ गया है।
रसूलपुर के रूप ने 1977 में खरीदा था पहला रेडियो
सलेमपुर क्षेत्र के गांव रसूलपुर निवासी 74 वर्षीय रूप सिंह बताते हैं कि वर्ष 1977 में अपना पहला मर्फी रेडियो खरीदा था। समाचार, आपकी पसंद के गाने, कृषि से जुड़े कार्यक्रम तब उनकी पसंद थे। जब वह रेडियो सुना करते थे तो गांव र्के लोग उनके पास आ जाते। सब मिलने वाली जानकारी व समाचारों पर चर्चा किया करते थे।
जिला कारागार में चलता है ‘जेल रेडियो’
जिला कारागार में एकमात्र जेल रेडियो का प्रसारण किया जा रहा है। जेल अधीक्षक मिजाजी लाल ने बताया कि जिला कारागार में जनवरी 2020 में जेल रेडियो का प्रसारण शुरू किया गया। जिसका प्रसारण आज भी प्रतिदिन दोपहर दो बजे से शाम चार बजे तक होता है। जिसमें जेल में निरुद्ध एक बंदी के द्वारा रेडियो जॉकी की भूमिका निभाई जाती है। जेल रेडियो पर कैदियों की पसंद के गाने व समाचार भी प्रसारित किए जाते हैं।
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बुलंदशहर। वर्ष 1927 में देश में शुरू हुआ रेडियो का सफर इन 94 सालों में रोचक किस्सों- कहानियों से भरा है। नई पीढ़ी भले ही मोबाइल और कारों में रेडियो लेकर चलती हो पर एक जमाना था जब रेडियो किसी अजूबे से कम नहीं था। तब रेडियो के लिए लाइसेंस लेना होता था। उस जमाने के बुजुर्गों के जेहन में आज भी उन अनदेखे चेहरों की आवाज है जो वह रेडियो पर सुना करते थे।
मोहल्ला आवास विकास गोकुलधाम निवासी करीब 100 वर्षीय रामकली देवी ने बताया कि वर्ष 1962 में उनके घर रेडियो आया था। तब रेडियो प्रसारण सुनने के लिए लाइसेंस लेना होता था। डोमेस्टिक लाइसेंस अपने लिए लिया जाता था और कॉमर्शियल लाइसेंस अन्य लोगों को प्रसारण सुनवाने के लिए लिया जाता था। उस समय पूरे मोहल्ले में चुनिंदा घरों में ही रेडियो था। जिस तरह टीवी पर रामायण और महाभारत देखने के लिए घरों में भीड़ जुटती थी, उसी तरह रेडियो सुनने के लिए भी लोग एकत्रित हुआ करते थे। तब रेडियो दहेज में भी दिया जाता था।
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1952 में खरीदा पहला रेडियो
नगर के पुरानी मंडी निवासी 97 वर्षीय जगतप्रकाश की आंखों से जरूर धुंधला दिखाई देता है, लेकिन, रेडियो से जुड़ी यादें आज भी उनके जेहन में उजली हैं। वर्ष 1952 में उन्होंने रेडियो खरीदा था। मुस्कुराते हुए बताते हैं कि रात नौ बजे के बुलेटिन में एक ही आवाज सुनाई देती थी... ये आकाशवाणी है.. अब आप देवकीनंदन से समाचार सुनिए।
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रेडियो पर ही सुना भारत-पाक और कारगिल युद्ध का हाल
अगौता थाना क्षेत्र के गांव लुहारली निवासी 88 वर्षीय ओमवीर सिंह बताते हैं कि रेडियो उनका पुराना साथी रहा है। खेती से भारत-पाकिस्तान युद्ध और कारगिल युद्ध तक की सूचनाएं उन्हें रेडियो से ही मिली। वर्ष 1967 में उन्होंने रेडियो खरीदा और लाइसेंस भी लिया था। तब जिस घर में रेडियो होता था उसे समृद्ध माना जाता था। ओमवीर कहते हैं कि आज मोबाइल फोन में ही रेडियो आ गया है।
रसूलपुर के रूप ने 1977 में खरीदा था पहला रेडियो
सलेमपुर क्षेत्र के गांव रसूलपुर निवासी 74 वर्षीय रूप सिंह बताते हैं कि वर्ष 1977 में अपना पहला मर्फी रेडियो खरीदा था। समाचार, आपकी पसंद के गाने, कृषि से जुड़े कार्यक्रम तब उनकी पसंद थे। जब वह रेडियो सुना करते थे तो गांव र्के लोग उनके पास आ जाते। सब मिलने वाली जानकारी व समाचारों पर चर्चा किया करते थे।
जिला कारागार में चलता है ‘जेल रेडियो’
जिला कारागार में एकमात्र जेल रेडियो का प्रसारण किया जा रहा है। जेल अधीक्षक मिजाजी लाल ने बताया कि जिला कारागार में जनवरी 2020 में जेल रेडियो का प्रसारण शुरू किया गया। जिसका प्रसारण आज भी प्रतिदिन दोपहर दो बजे से शाम चार बजे तक होता है। जिसमें जेल में निरुद्ध एक बंदी के द्वारा रेडियो जॉकी की भूमिका निभाई जाती है। जेल रेडियो पर कैदियों की पसंद के गाने व समाचार भी प्रसारित किए जाते हैं।