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स्याना के आम की दुनियाभर में बादशाहत
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आम।
- फोटो : BULANDSHAHR
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स्याना के आम की दुनियाभर में बादशाहत
स्याना/बुगरासी। स्याना फल पट्टी के आम की दुनिया भर में बादशाहत है। सिंगापुर से जापान, बांग्लादेश और नेपाल तक लोग यहां के आम के दीवाने हैं। रिश्तों में मिठास घोलने के लिए लोग यहां के आम की पेटियां तोहफे में भी भेजते हैं।
स्याना फलपट्टी में केसर, दशहरी, लंगड़ा, पुस्ता, रटौल, चौसा, फजली, मल्लिका, आम्रपाली जैसी आम की 50 से ज्यादा प्रजातियां हैं। देशी, दशहरी व रामकेला का अचार सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। यहां बने अचार को भी लोग अपनों को उपहार में भेजते हैं। प्रतिगतिशील किसान केदारनाथ त्यागी बताते हैं कि एक्सपोर्ट हाऊस के एजेंट आम खरीदकर विदेश भेजते हैं।
पैकेजिंग हाऊस की जरूरत
स्याना फलपट्टी में पैकेजिंग हाउस की जरूरत है। इससे लोगों को रोजगार भी मिलेगा। आम का निर्यात बढ़ने से बागबानों को राहत मिलेगी।
बुलंदशहर में खास है आम:
- आम का रकबा: 14 हजार हेक्टेयर
- उत्पादन: 2.50 लाख मीट्रिक टन
- आम उत्पादक किसान: 1500
- निर्यात 1.50 लाख मीट्रिक टन
सुविधाएं मिलें तो बढ़े मिठास
आम में रोग लगने और आंधी भारी नुकसान होता है। यहां पैकेजिंग हाउस और सरकारी मदद मिले तो फसल में और ज्यादा मिठास घुल जाएगी।
-बागान किसान, मुनेश प्रधान।
खास है यहां का आम
स्याना फलपट्टी का आम बेहद खास है। पिछले साल कोरोना के चलते बाहर की मंडियों तक आम नहीं जा सका था। इस बार उत्पादन अच्छा रहा तो दाम बहुत कम मिले हैं। - बागान किसान, लायक राम सिंह।
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फलोें के राजा पर भी कोरोना का साया
इस बार कोरोना काल के चलते बहुत कम आम विदेशों तक पहुंचा है। इस बार निर्यात होने वाले आम का आंकड़ा जुटाया जा रहा है। - डॉ. धीरेंद्र सिंह, जिला उद्यान अधिकारी
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स्याना/बुगरासी। स्याना फल पट्टी के आम की दुनिया भर में बादशाहत है। सिंगापुर से जापान, बांग्लादेश और नेपाल तक लोग यहां के आम के दीवाने हैं। रिश्तों में मिठास घोलने के लिए लोग यहां के आम की पेटियां तोहफे में भी भेजते हैं।
स्याना फलपट्टी में केसर, दशहरी, लंगड़ा, पुस्ता, रटौल, चौसा, फजली, मल्लिका, आम्रपाली जैसी आम की 50 से ज्यादा प्रजातियां हैं। देशी, दशहरी व रामकेला का अचार सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। यहां बने अचार को भी लोग अपनों को उपहार में भेजते हैं। प्रतिगतिशील किसान केदारनाथ त्यागी बताते हैं कि एक्सपोर्ट हाऊस के एजेंट आम खरीदकर विदेश भेजते हैं।
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पैकेजिंग हाऊस की जरूरत
स्याना फलपट्टी में पैकेजिंग हाउस की जरूरत है। इससे लोगों को रोजगार भी मिलेगा। आम का निर्यात बढ़ने से बागबानों को राहत मिलेगी।
बुलंदशहर में खास है आम:
- आम का रकबा: 14 हजार हेक्टेयर
- उत्पादन: 2.50 लाख मीट्रिक टन
- आम उत्पादक किसान: 1500
- निर्यात 1.50 लाख मीट्रिक टन
सुविधाएं मिलें तो बढ़े मिठास
आम में रोग लगने और आंधी भारी नुकसान होता है। यहां पैकेजिंग हाउस और सरकारी मदद मिले तो फसल में और ज्यादा मिठास घुल जाएगी।
-बागान किसान, मुनेश प्रधान।
खास है यहां का आम
स्याना फलपट्टी का आम बेहद खास है। पिछले साल कोरोना के चलते बाहर की मंडियों तक आम नहीं जा सका था। इस बार उत्पादन अच्छा रहा तो दाम बहुत कम मिले हैं। - बागान किसान, लायक राम सिंह।
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फलोें के राजा पर भी कोरोना का साया
इस बार कोरोना काल के चलते बहुत कम आम विदेशों तक पहुंचा है। इस बार निर्यात होने वाले आम का आंकड़ा जुटाया जा रहा है। - डॉ. धीरेंद्र सिंह, जिला उद्यान अधिकारी