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Bulandshahar News: दुष्कर्म मामले में पीड़िता व गवाह हुए पक्षद्रोही, फिर भी अपहरणकर्ता को हुई सजा
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बुलंदशहर। न्यायालय विशेष न्यायाधीश पाक्सो (अधिनियम) अपर सत्र न्यायाधीश ध्रुव राय के न्यायालय में किशोरी का अपहरण कर दुष्कर्म के एक मामले में अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी का मामला सामने आया है। मामले में पीड़िता, वादी और अन्य गवाहों के पक्ष द्रोही होने के बावजूद अभियोजन पक्ष ने मुख्य आरोपी को अपहरण के मामले में दोषी साबित कराते हुए सजा कराई है। न्यायालय ने उसे सात वर्ष कारावास व 30 हजार रुपये का अर्थदंड सुनाया है। जबकि, तीन आरोपियों को दोषमुक्त किया गया है।
एडीजीसी वरुण कौशिक, धर्मेंद्र राघव और भरत शर्मा ने बताया कि अक्टूबर 2016 को थाना अहमदगढ़ में एक पीड़ित पिता ने दर्ज कराए मुकदमे में बताया था कि उनकी 15 वर्षीय बेटी 11 अक्तूबर 2016 को संदिग्ध परिस्थिति में लापता हो गई। 18 अक्टूबर 2016 को उनकी बेटी शिकारपुर थाना क्षेत्र में रोती-बिलखती मिली। पूछताछ में किशोरी ने एक परिचित और तीन अज्ञात पर अगवा कर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया था। पीड़िता की तहरीर पर पुलिस ने मुख्य आरोपी सरवर और तीन अन्य नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया था। साथ ही जांच पड़ताल के बाद चारों के खिलाफ चार्जशीट न्यायालय में दाखिल कर दी थी। लेकिन, मामला विचारण के दौरान वादी मुकदमा, पीड़िता व अन्य गवाह पक्षद्रोही हो गए थे। जिससे मुकदमा छूटने की कगार पर आ गया था। लेकिन, अभियोजन पक्ष की ओर से मामले में कड़ी पैरवी की गई। अभियोजन की ओर से पक्ष रखा गया कि आरोपी सरवर की जमानत के दौरान पीड़ित पक्ष ने उसकी शिनाख्त की थी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी सरवर ही उसे बहला फुसलाकर अपहरण कर ले गया। हालांकि, दुष्कर्म की पुष्टि न्यायालय के समक्ष नहीं हो सकी। गवाहों के पक्ष द्रोही होने के कारण अन्य तीन आरोपियों को भी लाभ मिल गया। न्यायालय ने सिर्फ मुख्य आरोपी सरवर को बहला फुसलाकर अपहरण कर ले जाने का दोषी माना है। जिसे सात वर्ष का कारावास व 30 हजार रुपये का अर्थदंड सुनाया गया है। साथ ही अर्थदंड की राशि में से 20 हजार रुपये पीड़िता को देने का भी आदेश सुनाया है।
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एडीजीसी वरुण कौशिक, धर्मेंद्र राघव और भरत शर्मा ने बताया कि अक्टूबर 2016 को थाना अहमदगढ़ में एक पीड़ित पिता ने दर्ज कराए मुकदमे में बताया था कि उनकी 15 वर्षीय बेटी 11 अक्तूबर 2016 को संदिग्ध परिस्थिति में लापता हो गई। 18 अक्टूबर 2016 को उनकी बेटी शिकारपुर थाना क्षेत्र में रोती-बिलखती मिली। पूछताछ में किशोरी ने एक परिचित और तीन अज्ञात पर अगवा कर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया था। पीड़िता की तहरीर पर पुलिस ने मुख्य आरोपी सरवर और तीन अन्य नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया था। साथ ही जांच पड़ताल के बाद चारों के खिलाफ चार्जशीट न्यायालय में दाखिल कर दी थी। लेकिन, मामला विचारण के दौरान वादी मुकदमा, पीड़िता व अन्य गवाह पक्षद्रोही हो गए थे। जिससे मुकदमा छूटने की कगार पर आ गया था। लेकिन, अभियोजन पक्ष की ओर से मामले में कड़ी पैरवी की गई। अभियोजन की ओर से पक्ष रखा गया कि आरोपी सरवर की जमानत के दौरान पीड़ित पक्ष ने उसकी शिनाख्त की थी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी सरवर ही उसे बहला फुसलाकर अपहरण कर ले गया। हालांकि, दुष्कर्म की पुष्टि न्यायालय के समक्ष नहीं हो सकी। गवाहों के पक्ष द्रोही होने के कारण अन्य तीन आरोपियों को भी लाभ मिल गया। न्यायालय ने सिर्फ मुख्य आरोपी सरवर को बहला फुसलाकर अपहरण कर ले जाने का दोषी माना है। जिसे सात वर्ष का कारावास व 30 हजार रुपये का अर्थदंड सुनाया गया है। साथ ही अर्थदंड की राशि में से 20 हजार रुपये पीड़िता को देने का भी आदेश सुनाया है।
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