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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bulandshahar News ›   Hospitals are facing shortage of resources, patients are facing problems

Bulandshahar News: चिकित्सालयों पर संसाधनों की कमी, मरीज हो रहे परेशान

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 30 Aug 2025 10:46 PM IST
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बुलंदशहर। सरकारी चिकित्सालयों में संसाधन की कमी के कारण मरीजों को समय पर इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की इमरजेंसी में मरीज को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर कर दिया जाता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों को डिजिटल एक्सरे व अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं मिल रही हैं। अधिकांश जगह मशीनें लगी है पर प्रशिक्षित स्टाफ नहीं हैं।
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गांवों में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने का सरकारी दावा जिले में पूरी तरह से फेल है। जिला चिकित्सालय, जिला महिला चिकित्सालय, एसएसएमजे चिकित्सालय खुर्जा, संयुक्त चिकित्सालय सिकंदराबाद, राजकीय महिला चिकित्सालय खुर्जा और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहासू, शिकारपुर, जहांगीराबाद, अनूपशहर, स्याना, बीबीनगर, डिबाई, गुलावठी, ऊंचागांव, दानपुर, मुनी, लखावटी व अगौता हैं।
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इसके अलावा नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित है। सभी जगह इमरजेंसी में इलाज की सुविधा के लिए संसाधन लगाए गए हैं लेकिन चिकित्सकों की कमी से मरीज धक्के खाने को मजबूर हैं। गरीब मरीजों को निजी अस्पतालों में जाकर महंगा इलाज कराना पड़ता है। इससे उनकी परेशानी और बढ़ रही है। इसके अलावा सरकारी चिकित्सालयों की अधिकांश पैथोलॉजी लैब में थायराइड जांच के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में मरीजों को निजी लैब पर जाकर मोटी रकम खर्च कर एक्सरे और जांच करानी पड़ रही है।
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ऑपरेशन थिएटर है लेकिन विशेषज्ञ नहीं
संयुक्त चिकित्सालय सिकंदराबाद में ऑपरेशन थिएटर है लेकिन हड्डी रोग विशेषज्ञ की तैनाती न होने के चलते मरीजों को सुविधा नहीं मिल पा रही। हादसे के मरीजों को प्राथमिक उपचार कर जिला चिकित्सालय को रेफर कर दिया जाता है। शिकारपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर भी ऑपरेशन थिएटर बना हुआ है। यहां पर सर्जन और हड्डी रोग विशेषज्ञ की तैनाती न होने पर गंभीर मरीजों को समय पर नहीं मिल पा रहा है।
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रेडियोलॉजिस्ट न होने पर नहीं हो रहा अल्ट्रासाउंड
खुर्जा के सेठ सूरजमल जटिया चिकित्सालय में अल्ट्रासाउंड की मशीन तो है लेकिन रेडियोलॉजिस्ट नहीं हैं। इसके चलते चिकित्सालय में अल्ट्रासाउंड की जांच नहीं हो पा रही है। साथ ही चिकित्सालय में सभी मशीन युक्त नेत्र परीक्षण केंद्र भी है लेकिन विशेषज्ञ नहीं होने के कारण यह व्यवस्था भी ठप पड़ी है। चिकित्सालय में दंत रोग विशेषज्ञ और ईएनटी विशेषज्ञ तो हैं लेकिन पर्याप्त मशीन और उपकरण नहीं हैं। ऐसे में विशेषज्ञ होने के बावजूद जांच के लिए मरीजों को जिला चिकित्सालय रेफर किया जा रहा है।

Iसरकारी चिकित्सालयों में चिकित्सकों की कमी के चलते स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ रहा है। चिकित्सकों की तैनाती के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी गई है। मौजूदा संसाधनों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का प्रयास किया जा रहा है। - डॉ. सुनील कुमार दोहरे, सीएमओI
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