{"_id":"69a1cda5fdf664458805f85a","slug":"holika-dahan-will-be-held-on-march-2-holi-will-be-on-march-4-bulandshahr-news-c-133-1-bul1002-149414-2026-02-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bulandshahar News: दो मार्च को होगा होलिका दहन, चार को रहेगी होली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bulandshahar News: दो मार्च को होगा होलिका दहन, चार को रहेगी होली
विज्ञापन
बुलंदशहर। इस बार होलिका दहन दो मार्च और होली चार मार्च की रहेगी। पंडितों के अनुसार होलाष्टक के बाद चंद्र ग्रहण लग रहा है। सूतक काल ग्रहण से नौ घंटे पहले लग जाएगा। ऐसे में होलिका दहन के दूसरे दिन तीन मार्च को रंगोत्सव नहीं मनाया जाएगा। होली चार मार्च को खेली जाएगी। जिले में शहर से लेकर देहात तक 2,382 स्थानों पर होलिका दहन का आयोजन होगा।
पंडित कैलाश शर्मा और पंडित पंकज शर्मा ने बताया कि इस बार तीन मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा के दिन साल का पहला चंद्र ग्रहण लगेगा। यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए इसका धार्मिक असर पूरे देश पर पड़ेगा।
पंचांग के मुताबिक चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से करीब 9 घंटे पहले लग जाएगा। ऐसे में तीन मार्च की सुबह से ही सूतक काल शुरू हो जाएगा और शाम को ग्रहण खत्म होने के बाद ही पूजा-पाठ और मांगलिक काम किए जा सकेंगे। इस बार दो मार्च की रात को होलिका दहन किया जाएगा।
विज्ञापन
तीन मार्च को चंद्र ग्रहण रहेगा और चार मार्च को रंगों वाली होली मनाई जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि सूतक लगते ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। इस दौरान पूजा-पाठ, मूर्ति स्पर्श और भोजन पकाना व खाना वर्जित माना जाता है।
हालांकि बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को छूट रहेगी। पंंडित नरेश कुमार शर्मा ने बताया कि 24 फरवरी से शुरू हुआ होलाष्टक 3 मार्च को खत्म होगा। इसी दिन चंद्र ग्रहण भी है। शास्त्रों के अनुसार ग्रहण और सूतक काल के दौरान कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता। ऐसे में होलिका दहन दो मार्च को ही किया जाएगा।
विज्ञापन
पंडित कैलाश शर्मा और पंडित पंकज शर्मा ने बताया कि इस बार तीन मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा के दिन साल का पहला चंद्र ग्रहण लगेगा। यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए इसका धार्मिक असर पूरे देश पर पड़ेगा।
विज्ञापन
पंचांग के मुताबिक चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से करीब 9 घंटे पहले लग जाएगा। ऐसे में तीन मार्च की सुबह से ही सूतक काल शुरू हो जाएगा और शाम को ग्रहण खत्म होने के बाद ही पूजा-पाठ और मांगलिक काम किए जा सकेंगे। इस बार दो मार्च की रात को होलिका दहन किया जाएगा।
विज्ञापन
तीन मार्च को चंद्र ग्रहण रहेगा और चार मार्च को रंगों वाली होली मनाई जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि सूतक लगते ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। इस दौरान पूजा-पाठ, मूर्ति स्पर्श और भोजन पकाना व खाना वर्जित माना जाता है।
हालांकि बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को छूट रहेगी। पंंडित नरेश कुमार शर्मा ने बताया कि 24 फरवरी से शुरू हुआ होलाष्टक 3 मार्च को खत्म होगा। इसी दिन चंद्र ग्रहण भी है। शास्त्रों के अनुसार ग्रहण और सूतक काल के दौरान कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता। ऐसे में होलिका दहन दो मार्च को ही किया जाएगा।