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Bulandshahar News: बढ़ रहे हृदय रोगी, डॉक्टर और जांच की नहीं सुविधा
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बुलंदशहर। मौसम में बदलाव के साथ ही हृदय रोगियों की संख्या भी बढ़ने लगी है, लेकिन जिले के सरकारी चिकित्सालयों में हृदय रोग विशेषज्ञ और जांच की सुविधा नहीं है। ऐसे में मरीजों को निजी अस्पतालों या मेरठ, गाजियाबाद और दिल्ली की दौड़ लगानी पड़ रही है।
जिला अस्पताल समेत किसी भी सरकारी चिकित्सालय में अभी तक कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं हुई है। जबकि सरकारी चिकित्सालयों में प्रतिदिन 3500 से 4000 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। जिसमें औसतन 300 से 350 मरीज हृदय रोग से संबंधित आते हैं। अब सर्दी बढ़ने पर हृदय रोगियों की भी परेशानियां बढ़नी शुरू होने लगी हैं। ऐसे में इस बार भी हृदय रोग से पीड़ित मरीजों को सरकारी चिकित्सालयों में विशेषज्ञ न होने, ईसीजी व ईको जांच की सुविधा न होने के अभाव में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ईसीजी टेक्नीशियन का स्थानांतरण
जिला अस्पताल में डेढ़ साल पूर्व तक ईसीजी होती थी, लेकिन टेक्नीशियन का स्थानांतरण अन्य जनपद में होने पर जांच की सुविधा भी बंद हो गई। ऐसे में मरीजों को निजी अस्पतालों में जाकर ईसीजी करानी पड़ रही है।
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हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती के लिए शासन को कई बार पत्र भेजकर मांग की जा चुकी है। सरकारी चिकित्सालयों में आने वाले रोगियों का प्राथमिक इलाज कर हायर सेंटर भेज दिया जाता है। - डॉ. विनय कुमार सिंह, सीएमओ
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जिला अस्पताल समेत किसी भी सरकारी चिकित्सालय में अभी तक कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं हुई है। जबकि सरकारी चिकित्सालयों में प्रतिदिन 3500 से 4000 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। जिसमें औसतन 300 से 350 मरीज हृदय रोग से संबंधित आते हैं। अब सर्दी बढ़ने पर हृदय रोगियों की भी परेशानियां बढ़नी शुरू होने लगी हैं। ऐसे में इस बार भी हृदय रोग से पीड़ित मरीजों को सरकारी चिकित्सालयों में विशेषज्ञ न होने, ईसीजी व ईको जांच की सुविधा न होने के अभाव में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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ईसीजी टेक्नीशियन का स्थानांतरण
जिला अस्पताल में डेढ़ साल पूर्व तक ईसीजी होती थी, लेकिन टेक्नीशियन का स्थानांतरण अन्य जनपद में होने पर जांच की सुविधा भी बंद हो गई। ऐसे में मरीजों को निजी अस्पतालों में जाकर ईसीजी करानी पड़ रही है।
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हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती के लिए शासन को कई बार पत्र भेजकर मांग की जा चुकी है। सरकारी चिकित्सालयों में आने वाले रोगियों का प्राथमिक इलाज कर हायर सेंटर भेज दिया जाता है। - डॉ. विनय कुमार सिंह, सीएमओ