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'20 मिनट तक पीटा दरवाजा': हैवानों ने मां के सामने मासूम को तीसरी मंजिल से फेंका, दरिंदे बोले- हम नशे में थे

Sun, 04 Jan 2026 10:57 PM IST
विकास कुमार विकास वत्स, अमर उजाला, बुलंदशहर
विकास वत्स, अमर उजाला, बुलंदशहर Published by: विकास कुमार Updated Sun, 04 Jan 2026 10:57 PM IST
सार

घटना के बाद इलाके में भारी तनाव है। एसएसपी दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। मामला रेयरेस्ट ऑफ रेयर की श्रेणी में आता है। साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। 

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harassment and murder minor girl body thrown from third floor in bulandshahr
Bulandshahr harassment - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

'बेटी की चप्पलें दरिंदों के बिस्तर के नीचे पड़ी थीं। मैंने शोर मचाया तो एक दरिंदा अचेत बेटी को रसोईघर से गोद में उठाकर बाहर की ओर भागा। दूसरे ने मुझे धक्का देकर गिरा दिया। मैं चीखती रही, गिड़गिड़ाती रही लेकिन उनकी हैवानियत के आगे बेबस रह गई। दरिंदों ने मेरी आंखों के सामने मेरी मासूम बच्ची को तीसरी मंजिल से नीचे फेंक दिया।'

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दास्तां बताते हुए कई बार सहम उठी मां
यह दर्द उस मां का है, जिसकी छह वर्षीय बेटी उस उम्र में हैवानियत की शिकार हो गई, जिसमें उसके हाथों में खिलौने और किताबें होनी चाहिए थीं। यूपी के यूपी के बुलंदशहर स्थित सिकंदराबाद के एक गांव में शुक्रवार रात मासूम के साथ हुई दरिंदगी की तस्वीरें उनकी आंखों में आंसू बनकर तैर रही हैं। रविवार को फोन पर हुई बातचीत में रुंधे गले और नम आंखों से उस रात की दास्तां बताते हुए वह कई बार सहम उठीं।

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'मां, मैं बाहर भाई के साथ खेल रही हूं'
उन्होंने बताया कि शाम के करीब छह बज रहे थे। वह खाना बनाने की तैयारी कर रही थीं। तभी बेटी उनके पास आई और बोली- मां, आप सब्जी बना लो। मैं बाहर भाई के साथ खेल रही हूं। उन्होंने बेटी के सिर पर हाथ फेरा और रसोई में चली गईं। उन्हें क्या मालूम था कि उनकी लाडो आखिरी बार 'मां' कहकर पुकार रही है।

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आंधे घंटे बाद देखने आई मां तो नहीं थी बेटी
करीब आधे घंटे बाद जब वह सब्जी बनाकर बाहर आईं तो तीन साल का बेटा वहीं था लेकिन बेटी नहीं दिखी। गली-मोहल्ला छान मारा। पड़ोसियों के घर जाकर पता किया। फिर भी बेटी नहीं मिली। इससे मन घबराने लगा। थक-हारकर डर से कांपते हुए वह घर की तीसरी मंजिल पर पहुंचीं। वहां लाइन से कमरे बने हुए हैं, जिन्हें किराये पर दिया गया है।

20 मिनट तक पीटती रहीं दरवाजा
तीसरी मंजिल पर सन्नाटा पसरा था। वहां मां की नजर एक बंद कमरे पर पड़ी। पड़ोस की एक महिला ने बताया कि कुछ देर पहले बच्ची उसी कमरे के बाहर खेल रही थी। उन्होंने दरवाजा खटखटाया लेकिन जवाब नहीं मिला। वह लगातार 20 मिनट तक दरवाजे को पीटती रहीं। भीतर सन्नाटा था लेकिन दिल कह रहा था कि बेटी इसी खामोशी के पीछे कहीं कैद है। जब पड़ोस के एक युवक की मदद से दरवाजा खुलवाया तो अंदर का नजारा देख सन्न रह गईं। दो युवक बिस्तर पर ऐसे लेटे थे, मानो गहरी नींद में हों। जैसे ही उन्होंने कमरे में घुसकर तलाशी लेनी शुरू की तो आरोपी हड़बड़ी में उठकर खड़े हो गए। उनको रसोई की तरफ जाने से रोकने लगे। तभी आरोपियों के बिस्तर में बेटी की एक चप्पल नजर आई। इससे यकीन हो गया कि बेटी उन्हीं के पास है। वह उसे कमरे में ढूंढने लगीं। आरोपी उनको रोक रहे थे। धक्का दे रहे थे। जैसे ही वह किचन की तरफ बढ़ीं, एक दरिंदे ने वहां बेसुध पड़ी मासूम को अपनी गोद में उठा लिया। उसे पकड़ने की कोशिश की तो दूसरे ने जोर से धक्का देकर गिरा दिया। वह संभलती, इससे पहले ही हैवान ने मासूम को तीसरी मंजिल से नीचे खेत में फेंक दिया। आसपास के लोग जब तक खेत में पहुंचे, तब तक बच्ची की मौत हो चुकी थी।

साहब! मेरी आंखों के सामने हो फांसी, तभी कलेजे को मिलेगी ठंडक
मूल रूप से फिरोजाबाद जिले के रहने वाले पीड़ित परिवार के आंसू थम नहीं रहे हैं। बेटी की मौत के बाद मां बेहाल है। वह बार-बार एक ही बात दोहरा रही हैं। साहब, उन्होंने मेरी बच्ची पर रहम नहीं किया, उन्हें भी रहम न मिले। जैसे उन्होंने मेरी आंखों के सामने मेरी फूल-सी बच्ची को नीचे फेंका, वैसे ही उन्हें मेरी आंखों के सामने फांसी के फंदे पर लटकाया जाए। तभी मेरे कलेजे को ठंडक मिलेगी। पिता की हालत भी दयनीय है। वह कहते हैं कि जिस शहर ने उनकी बेटी को निगल लिया, वहां अब कभी नहीं जाएंगे।

हम नशे में थे...
पकड़े जाने के बाद भी आरोपियों के चेहरे पर कोई पछतावा नहीं था। दोनों बार-बार कहते रहे कि वे नशे में थे और सो रहे थे, इसलिए गेट नहीं खोला। हालांकि, जब पुलिस शनिवार शाम उन्हें न्यायिक हिरासत में ले जाने लगी तो दोनों की पोल खुल गई। वे एक-दूसरे पर बच्ची के साथ गलत काम करने और उसे नीचे फेंकने का आरोप लगाने लगे।

40 कमरे और अनजान चेहरे
यह वारदात जिस मकान में हुई, वहां 40 से अधिक कमरे हैं। अधिकांश कमरों में बाहरी मजदूर किराये पर रहते हैं। लोगों का आरोप है कि यहां रहने वाले परिवारों का न कोई रिकॉर्ड है और न ही पुलिस वेरिफिकेशन।

कोर्ट में पैरवी की तैयारी
घटना के बाद इलाके में भारी तनाव है। एसएसपी दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। मामला रेयरेस्ट ऑफ रेयर की श्रेणी में आता है। साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। जल्द ही आरोपियों बलरामपुर जिले के भगवानपुर स्थित रेहरा बाजार निवासी राजू और लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ निवासी वीरू कश्यप के खिलाफ जांच पूरी कर सख्त से सख्त चार्जशीट तैयार कर न्यायालय में दाखिल की जाएगी। उन्होंने दावा किया कि आरोपियों को ऐसी सजा दिलाई जाएगी, जो नजीर बनेगी।

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