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साहब की शह पर 206 गरीबों का हक हड़पा
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर
Updated Tue, 21 Mar 2017 12:20 AM IST
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साहब की शह पर 206 गरीबों के हक (सब्सिडी) हड़प लिया गया। आलम यह रहा कि जो सब्सिडी 206 गरीब युवाओं को दी जानी चाहिए थी, वह महज चार खातों में ट्रांसफर कर दी गई। सीडीओ के आदेश पर उच्च अधिकारियों द्वारा की गई जांच में मामले का खुलासा हुआ है।
20 जुलाई 2015 को अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम में 23.35 लाख रुपये की सब्सिडी घोटाला सामने आया था। आरोप है कि निगम अफसर और कर्मचारियों ने सूची में हेरफेर कर 206 लाभार्थियों को सब्सिडी राशि देने के बजाय महज चार लोगों के खातों में 23.35 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
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मिलीभगत में बैंक अफसर भी शामिल थे। इस मामले में जिला प्रबंधन वित्त विकास निगम, डिस्पेचर, अकाउंटेंट/सहायक जिला प्रबंधक और यूनियन बैंक के प्रबंधक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई थी।
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हाल ही में सीडीओ जसजीत कौर ने प्रकरण की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया था। कमेटी में एडीएम वित्त एवं राजस्व, वरिष्ठ ट्रेजरी अधिकारी और लीड बैंक मैनेजर थे। जांच रिपोर्ट में फर्जीवाड़ा पाया गया।
एडीएम के मुताबिक तेजपाल पुत्र परणदास, रमेश पुत्र किशन, सुखराम पुत्र रोशनलाल, जय प्रकाश पुत्र जीत सिंह के खाते में 23.35 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे। सब्सिडी की यह रकम 206 युवाओं को दी जानी थी। जांच में जिला प्रबंधक वित्त विकास निगम चतुर्भुज शर्मा, सहायक लेखाकार विनोद कुमार माहेश्वरी, डिस्पेचर राजेंद्र कुमार और यूनियन बैंक खुर्जा के प्रबंधक और स्टाफ को दोषी माना गया है।
जिस समय यह घपला घोटाला हुआ था,उस समय मैं बीमार था। बैंक अफसर और कर्मचारियों की साठगांठ से फर्जीवाड़े को अंजाम दिया था। मेरा इसमें लेनादेना नहीं है। - चतुर्भज शर्मा, जिला प्रबंधक,वित्त विकास निगम
जांच पूरी कर ली गई है। जल्द ही रिपोर्ट सीडीओ को सौंप दी जाएगी। फर्जीवाड़ा, वित्त विकास निगम के अधिकारी कर्मचारी और बैंक स्टाफ की मिलीभगत से अंजाम दिया गया।- बृजेश कुमार, एडीएम वित्त एवं राजस्व