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Bulandshahar News: घाट वाली नहर में नहीं है पानी, कैसे होगा गणपति विसर्जन
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बुलंदशहर। नगर में गणेश विसर्जन को लेकर लोगों की चिंता बढ़ने लगी है। वलीपुरा गंग नहर पर बने विसर्जन वाले घाट पर पिछले काफी दिनों से पानी नहीं आ रहा है। नहर में घास उग आई है। अब विसर्जन करने वाले भक्तों की चिंता बढ़ने लगी है कि वह मूर्ति को कहां विसर्जित करेंगे। घाट से पहले ही गंग नहर के पानी को दूसरी नहर में मोड़ दिया गया है। लोगों ने प्रशासन से वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की है।
इस बार 19 सितंबर से शुरू हुए गणेश उत्सव का समापन 28 सितंबर को होगा। नगर में घर-घर और जगह-जगह गणेश की प्रतिमा स्थापित की गई है। अब गणेश विसर्जन के लिए छह दिन शेष रह गए हैं। गणेश विसर्जन गंग नहर पर बने घाट पर होता है। यहां पर पिछले कई वर्ष से विसर्जन होता आया है। लेकिन इस समय घाट वाली गंग नहर में पानी नहीं है। इस नहर का पानी साथ वाली नहर में घाट से कुछ दूरी पर पुल से पहले ही काट दिया गया है। इस नहर में गणेश विसर्जन करने की कोई जगह नहीं है। यह नहर काफी गहरी भी है, जिसके चलते यहां पर गणेश विसर्जन करना श्रद्धालुओं के लिए मुश्किल भरा होगा। घाट वाली नहर में पानी न होने के कारण गणेश विसर्जन की तैयारियों में जुटे श्रद्धालुओं का कहना है कि समझ में नहीं आ रहा कि अब कहां पर गणेश भगवान को विदाई दी जाएगी। गणेश विसर्जन पर दो से तीन दिन मेले जैसा माहौल रहता है।
बोले श्रद्धालु
विसर्जन को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। जिला प्रशासन से मांग है कि जल्द ही वैकल्पिक व्यवस्था कर दें, जिससे गणेश विसर्जन किया जा सके। - पवन कुमार।
गणेश विसर्जन का समय नजदीक आ गया है। गणपति की विदाई के लिए भी तैयारियां शुरू हो गई हैं। समझ में नहीं आ रहा कि इस बार गणेश विसर्जन कहां होगा। मध्य गंग नहर का पक्का घाट ही विसर्जन के लिए सुरक्षित है। - प्रीति।
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घाट वाली नहर में पानी नहीं हैं। दूसरी नहर गहरी होने के कारण जान को खतरा रहता है। काफी संख्या में विसर्जन के दौरान बच्चे भी साथ रहते हैं। उनकी सुरक्षा का भी डर रहता है। - नलिनी गोयल।
गणेश उत्सव और गणेश विसर्जन का मौका साल में एक बार ही मिलता है। ऐसे में जिला प्रशासन को इस ओर विशेष ध्यान देने की जरूरत है, ताकि श्रद्धालु इस कार्य को सकुशल पूरा कर सकें। - एड. दीपक कुमार।
श्रद्धालुओं को गणेश विसर्जन कराने केलिए जल्द ही वैकल्पिक व्यवस्था कर दी जाएगी। इसके लिए सिटी मजिस्ट्रेट को प्रभारी अधिकारी बनाया गया है। संबंधित विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर रणनीति तय की जाएगी। - डा. प्रशांत कुमार, एडीएम प्रशासन
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इस बार 19 सितंबर से शुरू हुए गणेश उत्सव का समापन 28 सितंबर को होगा। नगर में घर-घर और जगह-जगह गणेश की प्रतिमा स्थापित की गई है। अब गणेश विसर्जन के लिए छह दिन शेष रह गए हैं। गणेश विसर्जन गंग नहर पर बने घाट पर होता है। यहां पर पिछले कई वर्ष से विसर्जन होता आया है। लेकिन इस समय घाट वाली गंग नहर में पानी नहीं है। इस नहर का पानी साथ वाली नहर में घाट से कुछ दूरी पर पुल से पहले ही काट दिया गया है। इस नहर में गणेश विसर्जन करने की कोई जगह नहीं है। यह नहर काफी गहरी भी है, जिसके चलते यहां पर गणेश विसर्जन करना श्रद्धालुओं के लिए मुश्किल भरा होगा। घाट वाली नहर में पानी न होने के कारण गणेश विसर्जन की तैयारियों में जुटे श्रद्धालुओं का कहना है कि समझ में नहीं आ रहा कि अब कहां पर गणेश भगवान को विदाई दी जाएगी। गणेश विसर्जन पर दो से तीन दिन मेले जैसा माहौल रहता है।
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बोले श्रद्धालु
विसर्जन को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। जिला प्रशासन से मांग है कि जल्द ही वैकल्पिक व्यवस्था कर दें, जिससे गणेश विसर्जन किया जा सके। - पवन कुमार।
गणेश विसर्जन का समय नजदीक आ गया है। गणपति की विदाई के लिए भी तैयारियां शुरू हो गई हैं। समझ में नहीं आ रहा कि इस बार गणेश विसर्जन कहां होगा। मध्य गंग नहर का पक्का घाट ही विसर्जन के लिए सुरक्षित है। - प्रीति।
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घाट वाली नहर में पानी नहीं हैं। दूसरी नहर गहरी होने के कारण जान को खतरा रहता है। काफी संख्या में विसर्जन के दौरान बच्चे भी साथ रहते हैं। उनकी सुरक्षा का भी डर रहता है। - नलिनी गोयल।
गणेश उत्सव और गणेश विसर्जन का मौका साल में एक बार ही मिलता है। ऐसे में जिला प्रशासन को इस ओर विशेष ध्यान देने की जरूरत है, ताकि श्रद्धालु इस कार्य को सकुशल पूरा कर सकें। - एड. दीपक कुमार।
श्रद्धालुओं को गणेश विसर्जन कराने केलिए जल्द ही वैकल्पिक व्यवस्था कर दी जाएगी। इसके लिए सिटी मजिस्ट्रेट को प्रभारी अधिकारी बनाया गया है। संबंधित विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर रणनीति तय की जाएगी। - डा. प्रशांत कुमार, एडीएम प्रशासन