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फर्जी एमबी बनाकर किया नौ लाख का फर्जीवाड़ा
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फर्जी एमबी बनाकर किया नौ लाख का फर्जीवाड़ा
बुलंदशहर। फर्जीवाड़े के लिए शुमार पावर कॉरपोरेशन में अब एक और फर्जीवाड़ा का मामला सामने आया है। डिबाई खंड में तैनात एक बाबू पर बिना अनुबंध एक ठेकेदार को नौ लाख रुपये का भुगतान किए जाने की शिकायत की गई है। मामले में मुख्यमंत्री और प्रबंध निदेशक से शिकायत होने के बाद विभाग ने जांच शुरू करवा दी है।
डिबाई निवासी शिकायतकर्ता नरेंद्र कुमार शर्मा द्वारा दिए गए पत्र के अनुसार वर्ष 2011-12 में डिबाई खंड में परिवर्तक ढुलाई के काम का अनुबंध हुआ था। लेकिन काम नहीं किया गया और संबंधित ठेकेदार की फर्म को नौ लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। आरोप है कि इस अनुबंध को करने और भुगतान को करने में जिस जेई प्रभारी की एमबी जारी की गई थी। उस पर फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे। मामले की जानकारी मिलने पर संबंधित जेई प्रभारी ने लिखित पत्र देते हुए एमबी पर किए हस्ताक्षर फर्जी बताए। फिलहाल जेई सेवानिवृत्त है। वहीं, शिकायतकर्ता द्वारा आरटीआई मांगने पर जनवरी 2020 में एक्सईएन डिबाई ने कमेटी गठित कर एसई से जांच कराने की मांग की गई। अब शिकायकर्ता द्वारा पुन: मामले में शिकायत किए जाने पर मामला चर्चाओं में आ गया है। जानकारी के अनुसार संबंधित एमबी (मापन पुस्तिका) 200 पेज की बताई जा रही है और 115 नंबर की एमबी के पेज नंबर 116 और 117 पर फर्जी हस्ताक्षर कर भुगतान करने का आरोप है। वहीं, मामले के मास्टर माइंड बाबू द्वारा अपने भाई की जगह फर्जीवाड़ा कर नौकरी करने का भी आरोप लग चुका है। जिसकी जांच अभी चल रही है। विभागीय अफसरों के अनुसार मामले की शिकायत के बाद संबंधित बाबू द्वारा ने कुछ समय बाद रूपये जमा कर दिए गए थे। चीफ इंजीनियर आरपीएस तोमर ने बताया कि संबंधित मामला संज्ञान में नहीं हैं। संबंधित बाबू की नियुक्ति के मामले में एसई को जांच के निर्देश दिए गए हैं। अभी कोई जवाब नहीं आया है।
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बुलंदशहर। फर्जीवाड़े के लिए शुमार पावर कॉरपोरेशन में अब एक और फर्जीवाड़ा का मामला सामने आया है। डिबाई खंड में तैनात एक बाबू पर बिना अनुबंध एक ठेकेदार को नौ लाख रुपये का भुगतान किए जाने की शिकायत की गई है। मामले में मुख्यमंत्री और प्रबंध निदेशक से शिकायत होने के बाद विभाग ने जांच शुरू करवा दी है।
डिबाई निवासी शिकायतकर्ता नरेंद्र कुमार शर्मा द्वारा दिए गए पत्र के अनुसार वर्ष 2011-12 में डिबाई खंड में परिवर्तक ढुलाई के काम का अनुबंध हुआ था। लेकिन काम नहीं किया गया और संबंधित ठेकेदार की फर्म को नौ लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। आरोप है कि इस अनुबंध को करने और भुगतान को करने में जिस जेई प्रभारी की एमबी जारी की गई थी। उस पर फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे। मामले की जानकारी मिलने पर संबंधित जेई प्रभारी ने लिखित पत्र देते हुए एमबी पर किए हस्ताक्षर फर्जी बताए। फिलहाल जेई सेवानिवृत्त है। वहीं, शिकायतकर्ता द्वारा आरटीआई मांगने पर जनवरी 2020 में एक्सईएन डिबाई ने कमेटी गठित कर एसई से जांच कराने की मांग की गई। अब शिकायकर्ता द्वारा पुन: मामले में शिकायत किए जाने पर मामला चर्चाओं में आ गया है। जानकारी के अनुसार संबंधित एमबी (मापन पुस्तिका) 200 पेज की बताई जा रही है और 115 नंबर की एमबी के पेज नंबर 116 और 117 पर फर्जी हस्ताक्षर कर भुगतान करने का आरोप है। वहीं, मामले के मास्टर माइंड बाबू द्वारा अपने भाई की जगह फर्जीवाड़ा कर नौकरी करने का भी आरोप लग चुका है। जिसकी जांच अभी चल रही है। विभागीय अफसरों के अनुसार मामले की शिकायत के बाद संबंधित बाबू द्वारा ने कुछ समय बाद रूपये जमा कर दिए गए थे। चीफ इंजीनियर आरपीएस तोमर ने बताया कि संबंधित मामला संज्ञान में नहीं हैं। संबंधित बाबू की नियुक्ति के मामले में एसई को जांच के निर्देश दिए गए हैं। अभी कोई जवाब नहीं आया है।
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