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ई-बाइक की डीलरशिप के नाम पर 4.35 लाख की ठगी
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ई-बाइक की डीलरशिप के नाम पर 4.35 लाख की ठगी
बुलंदशहर। नगर क्षेत्र के मोहल्ला आवास विकास प्रथम निवासी अजीत सिंह को ई-बाइक की डीलरशिप दिलाने के नाम पर 4.35 लाख रुपये की ठगी किए जाने का मामला सामने आया है। नगर कोतवाली पुलिस ने मामले में तहरीर के आधार पर दो नामजद आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है।
आवास विकास प्रथम निवासी अजीत सिंह ने तहरीर देकर बताया कि डीएम रोड पर उसकी जीत मोटर्स के नाम से डीलरशिप है। पीड़ित ने नवंबर 2020 में रिवोल्ट इंटेलीकॉर्प लि. पता मानेसर गुरुग्राम हरियाणा नामक कंपनी से ई-बाइक की डीलरशिप लेने के लिए ऑनलाइन एप्लीकेशन फार्म भरा था, जिस पर कंपनी ने उसे प्रतीक्षारत कर दिया था। बीते दिनों पीड़ित के फोन पर एक अंजान नंबर से कॉल आई। फोन करने वाले ने अपना नाम रोहन बताया और उक्त कंपनी में सीआरएम के पद पर तैनात होने की बात कही। साथ ही आरोपी ने एक रजिस्ट्रेशन फार्म पीड़ित के मेल आईडी पर दिया और रजिस्ट्रेशन के नाम पर 1.35 लाख रुपये की मांग की। पीड़ित ने फार्म भरकर आरोपी द्वारा दिए गए खाते में 1.35 लाख रुपये आरटीजीएस कर दिए। इसके बाद एक अन्य नंबर से कॉल आई, जिसमें उसने अपना नाम नीलेश शर्मा बताया तथा कहा कि 12 बाइक और पार्ट्स के बदले 5.75 लाख रुपये देने होंगे। जिस पर पीड़ित ने उसे तीन लाख रुपये बताए गए खाते में आरटीजीएस कर दिए। पीड़ित को ठगे जाने की जानकारी तब हुई जब आरोपियों ने न तो कोई लैटर दिया और न ही बाइक भिजवाईं। नगर कोतवाल संजीव कुमार शर्मा ने बताया कि मामले में तहरीर के आधार पर दोनों नामजद आरोपियाें के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। जल्द ही राजफाश कर दिया जाएगा।
पूर्व में भी हुई वारदात
ई-बाइक की डीलरशिप दिलाने के नाम पर जनपद में पूर्व में भी एक व्यक्ति से करीब चार लाख रुपये की रकम ऐंठ ली गई। उक्त प्रकरण में साइबर सेल की जांच के बाद नगर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। लेकिन, उक्त प्रकरण का अभी तक राजफाश नहीं हो सका है।
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इस तरह से बचें
- किसी भी कंपनी की एजेंसी या डीलरशिप लेने के लिए ऑनलाइन संपर्क के अलावा उक्त कंपनी से सीधे संपर्क करें।
- इंटरनेट पर शातिर साइबर ठगों ने विभिन्न कंपनियों के फर्जी पेज बनाए हुए हैं, उनसे बचें।
- बिना पूरी जानकारी एकत्रित किए रकम न दें।
साइबर ठगी से बचने के लिए लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। इंटरनेट पर ठगों के द्वारा फर्जी पेज बनाकर ठगी की जा रही है। जांच पड़ताल करने के बाद ही रुपयाें से संबंधित लेन-देन करें।
- कमलेश बहादुर, एसपी क्राइम
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बुलंदशहर। नगर क्षेत्र के मोहल्ला आवास विकास प्रथम निवासी अजीत सिंह को ई-बाइक की डीलरशिप दिलाने के नाम पर 4.35 लाख रुपये की ठगी किए जाने का मामला सामने आया है। नगर कोतवाली पुलिस ने मामले में तहरीर के आधार पर दो नामजद आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है।
आवास विकास प्रथम निवासी अजीत सिंह ने तहरीर देकर बताया कि डीएम रोड पर उसकी जीत मोटर्स के नाम से डीलरशिप है। पीड़ित ने नवंबर 2020 में रिवोल्ट इंटेलीकॉर्प लि. पता मानेसर गुरुग्राम हरियाणा नामक कंपनी से ई-बाइक की डीलरशिप लेने के लिए ऑनलाइन एप्लीकेशन फार्म भरा था, जिस पर कंपनी ने उसे प्रतीक्षारत कर दिया था। बीते दिनों पीड़ित के फोन पर एक अंजान नंबर से कॉल आई। फोन करने वाले ने अपना नाम रोहन बताया और उक्त कंपनी में सीआरएम के पद पर तैनात होने की बात कही। साथ ही आरोपी ने एक रजिस्ट्रेशन फार्म पीड़ित के मेल आईडी पर दिया और रजिस्ट्रेशन के नाम पर 1.35 लाख रुपये की मांग की। पीड़ित ने फार्म भरकर आरोपी द्वारा दिए गए खाते में 1.35 लाख रुपये आरटीजीएस कर दिए। इसके बाद एक अन्य नंबर से कॉल आई, जिसमें उसने अपना नाम नीलेश शर्मा बताया तथा कहा कि 12 बाइक और पार्ट्स के बदले 5.75 लाख रुपये देने होंगे। जिस पर पीड़ित ने उसे तीन लाख रुपये बताए गए खाते में आरटीजीएस कर दिए। पीड़ित को ठगे जाने की जानकारी तब हुई जब आरोपियों ने न तो कोई लैटर दिया और न ही बाइक भिजवाईं। नगर कोतवाल संजीव कुमार शर्मा ने बताया कि मामले में तहरीर के आधार पर दोनों नामजद आरोपियाें के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। जल्द ही राजफाश कर दिया जाएगा।
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पूर्व में भी हुई वारदात
ई-बाइक की डीलरशिप दिलाने के नाम पर जनपद में पूर्व में भी एक व्यक्ति से करीब चार लाख रुपये की रकम ऐंठ ली गई। उक्त प्रकरण में साइबर सेल की जांच के बाद नगर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। लेकिन, उक्त प्रकरण का अभी तक राजफाश नहीं हो सका है।
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इस तरह से बचें
- किसी भी कंपनी की एजेंसी या डीलरशिप लेने के लिए ऑनलाइन संपर्क के अलावा उक्त कंपनी से सीधे संपर्क करें।
- इंटरनेट पर शातिर साइबर ठगों ने विभिन्न कंपनियों के फर्जी पेज बनाए हुए हैं, उनसे बचें।
- बिना पूरी जानकारी एकत्रित किए रकम न दें।
साइबर ठगी से बचने के लिए लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। इंटरनेट पर ठगों के द्वारा फर्जी पेज बनाकर ठगी की जा रही है। जांच पड़ताल करने के बाद ही रुपयाें से संबंधित लेन-देन करें।
- कमलेश बहादुर, एसपी क्राइम