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Bulandshahar News: मारपीट में युवक की मौत के मामले में चार को दस-दस साल की कैद
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अनूपशहर। डिबाई कोतवाली क्षेत्र के गांव खुशालाबाद में अगस्त 2022 को घर के बाहर खड़े युवक राजकुमार की पीट पीटकर गैर इरादतन हत्या के मामले में एडीजे अनूपशहर विनीत चौधरी के न्यायालय ने चार अभियुक्तों को दोषी करार दिया है। साथ ही उन्हें दस-दस वर्ष का कारावास और 22-22 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है।
वादी मुकदमा रोशन लाल ने डिबाई कोतवाली में तहरीर देकर बताया था कि 22 अगस्त 2022 को उनका पुत्र राज कुमार घर के बाहर खड़ंजे पर खड़ा हुआ था। उसी दौरान घर के सामने रहने वाले आरोपी अनिल ने उनके पुत्र को बुलाया। राज कुमार के उनके पास पहुंचते ही आरोपी अनिल, उसके पिता शिवदयाल, प्रेमपाल, रामकिशन और एक अन्य बाल अपचारी ने मारपीट करनी शुरू कर दी। शोर सुनकर जब राज कुमार के पिता रोशन लाल वहां पहुंचे तो उनके साथ भी मारपीट की गई।
गंभीर रूप से घायल राज कुमार को सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। रोशन लाल की तहरीर पर 27 अगस्त 2022 को थाना डिबाई में धारा 147, 323, 504 और 304 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने जांच के दौरान घटनास्थल का नक्शा तैयार किया और गवाहों के बयान दर्ज किए। अभियुक्त शिवदयाल की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त गुनिया और अनिल की निशानदेही पर डंडा बरामद किया गया।
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विवेचना के बाद पुलिस ने अनूपशहर स्थित एडीजे कोर्ट में आरोप पत्र प्रेषित किया। कोर्ट ने गवाहों के बयानों के आधार पर अनिल, शिवदयाल, प्रेमपाल और रामकिशन को दोषी पाया। चारों को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास और 22-22 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया है। अर्थदंड न चुकाने पर आरोपियों को एक-एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। पांचवें आरोपी बाल अपचारी का मामला किशोर न्यायालय में विचाराधीन है।
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आइस कैंडी में सैकरीन मिलाने वाले दोषी को 23 वर्ष बाद छह माह का कारावास
बुलंदशहर। परिवादी हर्षनाथ यादव खाद्य निरीक्षक शिकारपुर ने 12 दिसंबर 2002 को न्यायालय में परिवाद दायर किया था। जिसमें उन्होंने बताया था कि 20 जून 2002 को सुबह छतारी में आईस कैंडी 18 रुपये में आरोपी शमी अहमद के यहां से खाद्य निरीक्षक ने खरीदी थी। जिसके बाद आईस कैंडी को तीन बराबर भागों में साफ सूखी शीशियों में विभाजित किया गया। साथ ही शीशियों पर लेबल चिपकाए गए।
उक्त तीनों सैंपल को स्थानीय स्वास्थ्य प्राधिकारी के पास सुरक्षित नमूना भेजने की सूचना सहित जमा किया गया। जांच के दौरान नमूने में शुगर उपस्थित नहीं मिली। जबकि, आईस कैंडी में कम से कम दस प्रतिशत शुगर होनी चाहिए।
नमूना सैकरीन से मीठा किया गया। जो कि वर्जित है। साथ ही एक अकार्बनिक रंजक पदार्थ टाइटेनियम डाई ऑक्साइड भी मिला है, जिसका प्रयोग इस खाद्य पदार्थ में वर्जित है। जिस पर करीब 23 वर्ष बाद अब एसीजेएम प्रथम मोहम्मद जुल्करनैन आलम ने आरोपी को दोषी करार दिया है। साथ ही उसे छह माह का कारावास व एक हजार रुपये का अर्थदंड सुनाया है।
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वादी मुकदमा रोशन लाल ने डिबाई कोतवाली में तहरीर देकर बताया था कि 22 अगस्त 2022 को उनका पुत्र राज कुमार घर के बाहर खड़ंजे पर खड़ा हुआ था। उसी दौरान घर के सामने रहने वाले आरोपी अनिल ने उनके पुत्र को बुलाया। राज कुमार के उनके पास पहुंचते ही आरोपी अनिल, उसके पिता शिवदयाल, प्रेमपाल, रामकिशन और एक अन्य बाल अपचारी ने मारपीट करनी शुरू कर दी। शोर सुनकर जब राज कुमार के पिता रोशन लाल वहां पहुंचे तो उनके साथ भी मारपीट की गई।
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गंभीर रूप से घायल राज कुमार को सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। रोशन लाल की तहरीर पर 27 अगस्त 2022 को थाना डिबाई में धारा 147, 323, 504 और 304 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने जांच के दौरान घटनास्थल का नक्शा तैयार किया और गवाहों के बयान दर्ज किए। अभियुक्त शिवदयाल की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त गुनिया और अनिल की निशानदेही पर डंडा बरामद किया गया।
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विवेचना के बाद पुलिस ने अनूपशहर स्थित एडीजे कोर्ट में आरोप पत्र प्रेषित किया। कोर्ट ने गवाहों के बयानों के आधार पर अनिल, शिवदयाल, प्रेमपाल और रामकिशन को दोषी पाया। चारों को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास और 22-22 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया है। अर्थदंड न चुकाने पर आरोपियों को एक-एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। पांचवें आरोपी बाल अपचारी का मामला किशोर न्यायालय में विचाराधीन है।
आइस कैंडी में सैकरीन मिलाने वाले दोषी को 23 वर्ष बाद छह माह का कारावास
बुलंदशहर। परिवादी हर्षनाथ यादव खाद्य निरीक्षक शिकारपुर ने 12 दिसंबर 2002 को न्यायालय में परिवाद दायर किया था। जिसमें उन्होंने बताया था कि 20 जून 2002 को सुबह छतारी में आईस कैंडी 18 रुपये में आरोपी शमी अहमद के यहां से खाद्य निरीक्षक ने खरीदी थी। जिसके बाद आईस कैंडी को तीन बराबर भागों में साफ सूखी शीशियों में विभाजित किया गया। साथ ही शीशियों पर लेबल चिपकाए गए।
उक्त तीनों सैंपल को स्थानीय स्वास्थ्य प्राधिकारी के पास सुरक्षित नमूना भेजने की सूचना सहित जमा किया गया। जांच के दौरान नमूने में शुगर उपस्थित नहीं मिली। जबकि, आईस कैंडी में कम से कम दस प्रतिशत शुगर होनी चाहिए।
नमूना सैकरीन से मीठा किया गया। जो कि वर्जित है। साथ ही एक अकार्बनिक रंजक पदार्थ टाइटेनियम डाई ऑक्साइड भी मिला है, जिसका प्रयोग इस खाद्य पदार्थ में वर्जित है। जिस पर करीब 23 वर्ष बाद अब एसीजेएम प्रथम मोहम्मद जुल्करनैन आलम ने आरोपी को दोषी करार दिया है। साथ ही उसे छह माह का कारावास व एक हजार रुपये का अर्थदंड सुनाया है।