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फूड फॉरेस्ट विकसित होने से जिले में बढ़ेगा आम का रकबा

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 16 May 2022 10:12 PM IST
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food forest
फूड फॉरेस्ट विकसित होने से जिले में बढ़ेगा आम का रकबा
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बुलंदशहर। जिले में स्याना क्षेत्र को फल पट्टी के नाम से जाना जाता है। अब सरकार ने 15 जनपदों में फूड फॉरेस्ट विकसित करने का निर्णय लिया है। इसमें जनपद को भी शामिल किया गया है। फूड फॉरेस्ट विकसित होने से जनपद में बागान का रकबा बढ़ने के साथ आम का उत्पादन भी बढे़गा। खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को भी कच्चा माल उपलब्ध हो सकेगा। साथ ही निर्यात योग्य आम भी आसानी से मिल सकेगा।
प्रदेश सरकार फूड फॉरेस्ट विकसित कर हरियाली बढ़ाकर पर्यावरण संरक्षण की पहल कर रही है। इसके लिए प्रदेश में 15 जिलों की फल पट्टियों को शामिल किया गया है। इसमें जनपद की आम फल पट्टी भी शामिल है। योजना धरातल पर उतरी तो न सिर्फ जनपद में गुणवत्तायुक्त आम का उत्पादन बढे़गा बल्कि आम के निर्यात और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को कच्चा माल आसानी से उपलब्ध होगा। सरकार ने जनपद में स्याना फल पट्टी घोषित कर रखी है। फल पट्टी में बीबीनगर, ऊंचागांव, खानपुर, औरंगाबाद, दौलतपुर आदि शामिल हैं। जनपद की फल पट्टी में आम का फूड फॉरेस्ट विकसित करने से वहां उच्च गुणवत्तायुक्त आम का उत्पादन के साथ ही क्षेत्रफल में भी बढ़ोतरी होगी। इसके अलावा जिले में अमरूद, आडू और बेर आदि फलों के बाग भी हैं। शासन की इन योजनाओं से इनके बागान किसानों को भी लाभ मिलेगा। बुलंदशहर में बागान का रकबा 20 हजार हेक्टेयर से अधिक है। इसमें 14 हजार हेक्टेयर आम तो शेष भूमि में अन्य फलों के बाग लगे हुए हैं।
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खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को मिलेगा कच्चा माल
जनपद में आम का अचार, जैम, जेली बनाने वाली इकाइयां भी चल रही हैं। शासन द्वारा प्रस्तावित आम का फूड फॉरेस्ट विकसित करने से इन इकाइयों को पर्याप्त मात्रा में कच्चा माल आसानी से उपलब्ध हो सकेगा। इसके अलावा निर्यात के लिए भी उच्च गुणवत्ता का आम भी आसानी से मिल सकेगा। ऐसा होने इन इकाइयों को चलाने वालों की आय में भी इजाफा होगा।
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फूड फॉरेस्ट विकसित करने की योजना से निश्चित तौर पर जनपद में आम का क्षेत्रफल बढे़गा। इससे खाद्य प्रसंस्करण करने वाली इकाइयों को भी कच्चा माल उपलब्ध होने में आसानी रहेगी। इसके लिए शासन की ओर से जल्द ही दिशा-निर्देश मिलने की उम्मीद है। शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही कार्रवाई शुरू की जाएगी। - एनके सहानिया, जिला उद्यान अधिकारी।
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