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Bulandshahar News: पराली जलाने वाले किसानों से वसूला जाएगा जुर्माना
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बुलंदशहर। धान की फसल कटने के बाद खेतों में पराली जलाई गई तो किसान से जुर्माना वसूला जाएगा। वसूली होगी। पराली जलाने से रोक को लेकर कृषि विभाग की ओर से अभी से सतर्कता बरती जा रही है। वहीं, फसल अवशेष जलाने की जिले में दिल्ली में सेटेलाइट से निगरानी की जा रही है। साथ ही पराली जलाने से रोकने के लिए सभी 16 ब्लॉकों पर टीम गठित कर दी हे।
उप कृषि निदेशक बबलू कुमार और जिला कृषि अधिकारी रामकुमार यादव ने बताया कि बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण को देखते हुए सरकार ने धान की पराली (फसल अवशेष) जलाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा रखा है। यदि कोई किसान दो एकड़ से कम क्षेत्र में पराली जलाता है तो ढाई रुपये, दो से पांच एकड़ के बीच पांच हजार रुपये और पांच एकड़ से अधिक खेत में पराली जलाने पर 15 हजार रुपये तक का जुर्माना वसूला जाएगा। पुनरावृत्ति करने पर संबंधित के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी
वहीं बिना एक्स्ट्रा रीपर या सुपर मैनेजमेंट सिस्टम के धान की कटाई करने वाली हार्वेस्टिंग मशीन (कंबाइन) के संचालकों को भी राष्ट्रीय हरित अभिकरण के नियम की परिधि में रखा जाएगा। उनकी लापरवाही सामने आने पर मशीन सीज की जाएगी। वहीं कंबाइन स्वामी के व्यय पर हार्वेस्टिंग मशीन में सुपर मैनेजमेंट सिस्टम लगाने के बाद ही उन्हें छोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि पराली जलाना पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और वायु प्रदूषण का कारण बनता है। पराली जलाने से भूमि की उर्वरा शक्ति भी कम होती है। साथ ही जमीन के मित्र कीट मर जाते हैं। इसलिए किसानों को चाहिए कि वह पराली न जलाकर उसे खेत में मिलाकर खाद बना सकते हैं।
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उप कृषि निदेशक बबलू कुमार और जिला कृषि अधिकारी रामकुमार यादव ने बताया कि बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण को देखते हुए सरकार ने धान की पराली (फसल अवशेष) जलाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा रखा है। यदि कोई किसान दो एकड़ से कम क्षेत्र में पराली जलाता है तो ढाई रुपये, दो से पांच एकड़ के बीच पांच हजार रुपये और पांच एकड़ से अधिक खेत में पराली जलाने पर 15 हजार रुपये तक का जुर्माना वसूला जाएगा। पुनरावृत्ति करने पर संबंधित के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी
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वहीं बिना एक्स्ट्रा रीपर या सुपर मैनेजमेंट सिस्टम के धान की कटाई करने वाली हार्वेस्टिंग मशीन (कंबाइन) के संचालकों को भी राष्ट्रीय हरित अभिकरण के नियम की परिधि में रखा जाएगा। उनकी लापरवाही सामने आने पर मशीन सीज की जाएगी। वहीं कंबाइन स्वामी के व्यय पर हार्वेस्टिंग मशीन में सुपर मैनेजमेंट सिस्टम लगाने के बाद ही उन्हें छोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि पराली जलाना पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और वायु प्रदूषण का कारण बनता है। पराली जलाने से भूमि की उर्वरा शक्ति भी कम होती है। साथ ही जमीन के मित्र कीट मर जाते हैं। इसलिए किसानों को चाहिए कि वह पराली न जलाकर उसे खेत में मिलाकर खाद बना सकते हैं।
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