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राष्ट्र चेतना मिशन के 80 से अधिक पदाधिकारी करेंगे नेत्रदान
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राष्ट्र चेतना मिशन के 80 से अधिक पदाधिकारी करेंगे नेत्रदान
बुलंदशहर। आंखों के बिना जिंदगी की कल्पना करना बेमानी है। यदि जन्मजात या किसी दुर्घटना में आंखों की रोशनी खो बैठे व्यक्ति को यदि रोशनी मिल जाए तो मानो उसे दूसरी जिंदगी मिल जाती है। ऐसी ही सकारात्मक सोच रखते हुए जनपद के राष्ट्र चेतना मिशन के युवा सदस्यों ने मरने के उपरांत नेत्रदान करने का निर्णय लिया है। इसके लिए 80 से अधिक पदाधिकारी नई दिल्ली की दधिची देह दान समिति में नेत्रदान के लिए अपना पंजीकरण करा चुके हैं।
10 जून को प्रतिवर्ष विश्व दृष्टिदान दिवस का आयोजन किया जाता है। इस दौरान जनपद समेत प्रदेश में लोगों को नेत्रदान के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। लेकिन गत दो वर्ष से कोरोना काल के चलते कार्यक्रम का आयोजन नहीं हो रहा हैं। इसके बावजूद जनपद में 80 से अधिक ऐसे युवा भी है जिन्होंने आंखों की उपयोगिता को देखते हुए संसार में मरणोपरांत नेत्रदान करने का संकल्प लिया हैं। इनमें 20 दंपति और 40 युवा शामिल हैं। साथ ही सात लोगों ने देहदान करने के लिए अपना पंजीकरण कराया हैं। इन सभी को इसके कार्ड मिल गए हें। जिससे ये जहां भी होंगे, वहीं नेत्रदान कर सकेंगे। वहीं, अभी भी युवाओं को नेत्रदान कर किसी नेत्रहीन की दुनिया रोशन करने के लिए जागरूक करते रहते हैं। चिकित्सकाें के अनुसार जनपद में करीब एक हजार लोग नेत्रहीन है। कुछ लोग बचपन से नेत्रहीन है तो कुछ हादसे में अपनी आंख खो बैठे हैं।
एसीएमओ डॉ. रोहताश यादव ने बताया कि किसी व्यक्ति की मृत्यु होने के छह घंटे के भीतर आंख से कार्निया निकालकर सुरक्षित रखना जरूरी होता है। तभी वह किसी दूसरे व्यक्ति की आंखों के लिए कामयाब हो सकता है। क्योंकि भारत में अंधता की सबसे बड़ी वजह कार्निया जनित रोग हैं। चिकित्सकों के अनुसार आंख का सबसे सामने वाला पारदर्शी कांच जैसा हिस्सा कार्निया कहलाता है। प्रकाश की किरणें कार्निया से होते हुए आंख में प्रवेश करती हैं और लैंस से होते हुए अंत में रेटिना (पर्दे) पर फोकस होता है। कार्निया की सतह पर आंसू एक महीन परत बनकर रहते हैं।
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बोले नेत्रदानी
बिना आंखों के लोगों को कार्य करते देखकर सोचा था कि अगर इनकी आंख होती तो कितना अच्छा होता। फिर मन में प्रण लिया था कि नेत्रहीन लोगों की दुनिया रोशन करने के लिए मरणोपरांत नेत्रदान करने के लिए पंजीकरण कराया। - हेमंत सिंह, संयोजक राष्ट्र चेतना मिशन
दुनिया कितनी रंगीन है ये उन लोगों को पता नहीं रहता जो जन्मजात नेत्रहीन हैं। सभी दुनिया को अपनी आंखों से देख सके ं इसके लिए नेत्रदान करने का संक ल्प लेकर पंजीकरण करवाया है। - सीए मनीष मांगलिक, संरक्षक राष्ट्र चेतना मिशन
पति ने अनजान लोगों की दुनिया रोशन करने के लिए नेत्रदान का संकल्प लिया तो स्वयं को भी नेत्रदान करने के संकल्प से नहीं रोक सकी। नेत्रदान करने से किसी की दुनिया जहां रोशन होगी तो उसे वह नई जिंदगी मिलने के सामान है। - प्रियंका सिंह
समाज में बदलाव लाना है तो सबसे पहले हमें अपनी सोच बदलनी होगी। समाज अपने आप बदल जाएगी। कुछ लोग नेत्रहीन को देखकर उनका मजाक उड़ाते हैं। ऐसा नहीं करना चाहिए, बल्कि उनकी दुनिया रोशन करने के लिए नेत्रदान का संकल्प लेना चाहिए। - पूनम मांगलिक
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बुलंदशहर। आंखों के बिना जिंदगी की कल्पना करना बेमानी है। यदि जन्मजात या किसी दुर्घटना में आंखों की रोशनी खो बैठे व्यक्ति को यदि रोशनी मिल जाए तो मानो उसे दूसरी जिंदगी मिल जाती है। ऐसी ही सकारात्मक सोच रखते हुए जनपद के राष्ट्र चेतना मिशन के युवा सदस्यों ने मरने के उपरांत नेत्रदान करने का निर्णय लिया है। इसके लिए 80 से अधिक पदाधिकारी नई दिल्ली की दधिची देह दान समिति में नेत्रदान के लिए अपना पंजीकरण करा चुके हैं।
10 जून को प्रतिवर्ष विश्व दृष्टिदान दिवस का आयोजन किया जाता है। इस दौरान जनपद समेत प्रदेश में लोगों को नेत्रदान के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। लेकिन गत दो वर्ष से कोरोना काल के चलते कार्यक्रम का आयोजन नहीं हो रहा हैं। इसके बावजूद जनपद में 80 से अधिक ऐसे युवा भी है जिन्होंने आंखों की उपयोगिता को देखते हुए संसार में मरणोपरांत नेत्रदान करने का संकल्प लिया हैं। इनमें 20 दंपति और 40 युवा शामिल हैं। साथ ही सात लोगों ने देहदान करने के लिए अपना पंजीकरण कराया हैं। इन सभी को इसके कार्ड मिल गए हें। जिससे ये जहां भी होंगे, वहीं नेत्रदान कर सकेंगे। वहीं, अभी भी युवाओं को नेत्रदान कर किसी नेत्रहीन की दुनिया रोशन करने के लिए जागरूक करते रहते हैं। चिकित्सकाें के अनुसार जनपद में करीब एक हजार लोग नेत्रहीन है। कुछ लोग बचपन से नेत्रहीन है तो कुछ हादसे में अपनी आंख खो बैठे हैं।
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एसीएमओ डॉ. रोहताश यादव ने बताया कि किसी व्यक्ति की मृत्यु होने के छह घंटे के भीतर आंख से कार्निया निकालकर सुरक्षित रखना जरूरी होता है। तभी वह किसी दूसरे व्यक्ति की आंखों के लिए कामयाब हो सकता है। क्योंकि भारत में अंधता की सबसे बड़ी वजह कार्निया जनित रोग हैं। चिकित्सकों के अनुसार आंख का सबसे सामने वाला पारदर्शी कांच जैसा हिस्सा कार्निया कहलाता है। प्रकाश की किरणें कार्निया से होते हुए आंख में प्रवेश करती हैं और लैंस से होते हुए अंत में रेटिना (पर्दे) पर फोकस होता है। कार्निया की सतह पर आंसू एक महीन परत बनकर रहते हैं।
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बोले नेत्रदानी
बिना आंखों के लोगों को कार्य करते देखकर सोचा था कि अगर इनकी आंख होती तो कितना अच्छा होता। फिर मन में प्रण लिया था कि नेत्रहीन लोगों की दुनिया रोशन करने के लिए मरणोपरांत नेत्रदान करने के लिए पंजीकरण कराया। - हेमंत सिंह, संयोजक राष्ट्र चेतना मिशन
दुनिया कितनी रंगीन है ये उन लोगों को पता नहीं रहता जो जन्मजात नेत्रहीन हैं। सभी दुनिया को अपनी आंखों से देख सके ं इसके लिए नेत्रदान करने का संक ल्प लेकर पंजीकरण करवाया है। - सीए मनीष मांगलिक, संरक्षक राष्ट्र चेतना मिशन
पति ने अनजान लोगों की दुनिया रोशन करने के लिए नेत्रदान का संकल्प लिया तो स्वयं को भी नेत्रदान करने के संकल्प से नहीं रोक सकी। नेत्रदान करने से किसी की दुनिया जहां रोशन होगी तो उसे वह नई जिंदगी मिलने के सामान है। - प्रियंका सिंह
समाज में बदलाव लाना है तो सबसे पहले हमें अपनी सोच बदलनी होगी। समाज अपने आप बदल जाएगी। कुछ लोग नेत्रहीन को देखकर उनका मजाक उड़ाते हैं। ऐसा नहीं करना चाहिए, बल्कि उनकी दुनिया रोशन करने के लिए नेत्रदान का संकल्प लेना चाहिए। - पूनम मांगलिक