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निजी कंपनियों से बिजली खरीद रहीं औद्योगिक इकाइयां, निगम को नुकसान
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निजी कंपनियों से बिजली खरीद रहीं औद्योगिक इकाइयां, निगम को नुकसान
सिकंदराबाद। निजी कंपनियों द्वारा औद्योगिक इकाइयों को सस्ती बिजली देने के चलते ऊर्जा निगम को प्रतिमाह 25 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। क्षेत्र की 16 इकाइयों द्वारा निजी कंपनियों से बिजली लेना शुरू किया तो खंड का न केवल राजस्व गिरा, बल्कि लाइन लॉस भी बढ़ गया। क्योंकि इन कंपनियों द्वारा नियम से 25 करोड़ रुपये का बिल विभाग के खाते में जमा कराया जा रहा था।
जिले के व्यावसायिक, घरेलू उपभोक्ताओं को अभी तक ऊर्जा निगम द्वारा ही बिजली सप्लाई दी जा रही थी। उपभोक्ता भी निगम के खाते में ही बिल जमा करते थे। अब बड़ी औद्योगिक इकाइयों में निजी कंपनियों द्वारा बिजली सप्लाई दी जा रही है। औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित अंबा शक्ति, श्री सीमेंट, अल्ट्राटेक सीमेंट, सैनी स्टील, आरएमजी पॉली, प्रीमियम पॉली, कनौडिया सीमेंट, हाईजीन, गुडलक स्टील और हाईटेक पाइप समेत कुल 16 औद्योगिक इकाइयों ऐसी हैं, जिनमें निजी कंपनियों द्वारा करीब 85 मेगावाट बिजली खरीद के लिए अनुबंध किया है। जिसके चलते अब करीब 25 करोड़ रुपये प्रतिमाह के बिल का भुगतान निजी कंपनियों को किया जा रहा है। इन कंपनियों द्वारा ऊर्जा निगम की लाइन का ही प्रयोग किया जा रहा है, जिसके लिए निगम को कुल रेवेन्यू का 0.04 फीसदी किराए का भुगतान निजी कंपनियों द्वारा किया जा रहा है। खंड के कुल राजस्व में से 25 करोड़ का राजस्व निजी कंपनियों के खाते में जाने के बाद अब लाइन लॉस और बढ़ गया।
सस्ती बिजली के चलते किया गया अनुबंध
निजी कंपनियों और सरकारी बिजली की दरों में काफी अंतर है। बताया जा रहा है कि निजी कंपनियों द्वारा छह रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली दी जा रही है, जबकि ऊर्जा निगम द्वारा साढ़े आठ से नौ रुपये प्रति यूनिट की वसूली की जाती है। ऐसे में उद्योगपतियों ने निजी कंपनियों से बिजली खरीद को प्राथमिकता दी।
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क्षेत्र की 16 औद्योगिक इकाइयों में करीब 85 मेगावाट की बिजली सप्लाई निजी कंप नी कर रहीं हैं। निगम को कुल राजस्व का 0.04 फीसदी लाइन चार्ज मिलता है। जबकि पूर्व में इन फैक्ट्रियों के संचालकों द्वारा समय पर बिल का भुगतान किया जाता था, जिससे निगम का रेवेन्यू भी ठीक रहता था। - नितिन वर्मा, एसडीओ, ऊर्जा निगम
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सिकंदराबाद। निजी कंपनियों द्वारा औद्योगिक इकाइयों को सस्ती बिजली देने के चलते ऊर्जा निगम को प्रतिमाह 25 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। क्षेत्र की 16 इकाइयों द्वारा निजी कंपनियों से बिजली लेना शुरू किया तो खंड का न केवल राजस्व गिरा, बल्कि लाइन लॉस भी बढ़ गया। क्योंकि इन कंपनियों द्वारा नियम से 25 करोड़ रुपये का बिल विभाग के खाते में जमा कराया जा रहा था।
जिले के व्यावसायिक, घरेलू उपभोक्ताओं को अभी तक ऊर्जा निगम द्वारा ही बिजली सप्लाई दी जा रही थी। उपभोक्ता भी निगम के खाते में ही बिल जमा करते थे। अब बड़ी औद्योगिक इकाइयों में निजी कंपनियों द्वारा बिजली सप्लाई दी जा रही है। औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित अंबा शक्ति, श्री सीमेंट, अल्ट्राटेक सीमेंट, सैनी स्टील, आरएमजी पॉली, प्रीमियम पॉली, कनौडिया सीमेंट, हाईजीन, गुडलक स्टील और हाईटेक पाइप समेत कुल 16 औद्योगिक इकाइयों ऐसी हैं, जिनमें निजी कंपनियों द्वारा करीब 85 मेगावाट बिजली खरीद के लिए अनुबंध किया है। जिसके चलते अब करीब 25 करोड़ रुपये प्रतिमाह के बिल का भुगतान निजी कंपनियों को किया जा रहा है। इन कंपनियों द्वारा ऊर्जा निगम की लाइन का ही प्रयोग किया जा रहा है, जिसके लिए निगम को कुल रेवेन्यू का 0.04 फीसदी किराए का भुगतान निजी कंपनियों द्वारा किया जा रहा है। खंड के कुल राजस्व में से 25 करोड़ का राजस्व निजी कंपनियों के खाते में जाने के बाद अब लाइन लॉस और बढ़ गया।
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सस्ती बिजली के चलते किया गया अनुबंध
निजी कंपनियों और सरकारी बिजली की दरों में काफी अंतर है। बताया जा रहा है कि निजी कंपनियों द्वारा छह रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली दी जा रही है, जबकि ऊर्जा निगम द्वारा साढ़े आठ से नौ रुपये प्रति यूनिट की वसूली की जाती है। ऐसे में उद्योगपतियों ने निजी कंपनियों से बिजली खरीद को प्राथमिकता दी।
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क्षेत्र की 16 औद्योगिक इकाइयों में करीब 85 मेगावाट की बिजली सप्लाई निजी कंप नी कर रहीं हैं। निगम को कुल राजस्व का 0.04 फीसदी लाइन चार्ज मिलता है। जबकि पूर्व में इन फैक्ट्रियों के संचालकों द्वारा समय पर बिल का भुगतान किया जाता था, जिससे निगम का रेवेन्यू भी ठीक रहता था। - नितिन वर्मा, एसडीओ, ऊर्जा निगम