फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bulandshahar News ›   election

23 साल में भी दिल्ली से नहीं जुड़ पाया बुलंदशहर

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 11 Jan 2022 10:33 PM IST
विज्ञापन
election
23 साल में भी दिल्ली से नहीं जुड़ पाया बुलंदशहर
विज्ञापन

बुलंदशहर। जिले में गेहूं, चावल, चीनी, गुड़, फल, सब्जी और दूध की पैदावार ज्यादा होती है लेकिन पिछले 23 वर्षों में रेलवे लाइन का विस्तार नहीं होने से जिले का विकास लटक गया है। रेलवे सलाहकार समिति उत्तर रेलवे के पूर्व सदस्य और विकास संघर्ष मंच ने रेलवे लाइन व स्टेशन बनाने को लेकर धरना प्रदर्शन और आंदोलन किया। स्थिति यह हुई कि वर्ष 2013 में 115 किलोमीटर का प्रोजेक्ट बनाकर रेल बजट में सर्वेक्षण के लिए प्रस्तावित कर दिया गया। सरकार बदलने के बाद इस मामले में सुनवाई नहीं हुई। लोगों का कहना है कि रेलवे लाइन का विस्तार होता तो जिले का विकास तेजी से होता। नई सरकार से उम्मीद है कि वह इस मांग को पूरा कराएगी।
रेलवे सलाहकार समिति उत्तर रेलवे के पूर्व सदस्य वीरपाल सिंह का कहना है कि विकास के क्षेत्र में बुलंदशहर के पिछड़ने का बड़ा कारण रेलवे लाइन का विस्तार नहीं होना है। यदि रेलवे लाइन का विस्तार हो गया होता तो बुलंदशहर खुर्जा की तरह देश और विदेश में जाना जाता। इस जिले की पहचान खुर्जा की पॉटरी और नरौरा परमाणु केंद्र तक ही सीमित होकर रह गई। रेल बुलंदशहर से सीधे दिल्ली के लिए जाती तो जिले का किसान गेहूं, चावल, चीनी, गुड़, फल, सब्जी और दूध को दिल्ली व अन्य शहर में सीधे पहुंचा सकते थे लेकिन अब यह बिचौलियों पर ही निर्भर होकर रह गए हैं। वर्ष 1998 से लगातार रेल की मांग की जा रही है।
विज्ञापन

व्यापारी सुरक्षा फोरम के जिलाध्यक्ष राकेश मित्तल का कहना है कि कपड़ा या दवा व्यापारी को सामान लेने के लिए दिल्ली जाना पड़ता है तो वह निजी वाहन से जाता है, जिससे ज्यादा खर्चा होता है। यदि रेल गाड़ी सीधे बुलंदशहर से दिल्ली के लिए चलती तो व्यापारियों को ज्यादा लाभ होता। ट्रांसपोर्ट में कम पैसे खर्च होते और उसका लाभ जिले के आम लोगों को मिलता। एक ट्रेन दिल्ली के लिए वाया हापुड़ चलती तो है लेकिन उसके संचालन का समय सुबह पांच बजे होने के कारण उसका लाभ अधिक लोगों को नहीं मिल पाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

इस रूट पर की थी रेलवे लाइन जोड़ने की मांग
विकास संघर्ष मंच के महामंत्री कुंवर देवेंद्र सिंह लोधी एडवोकेट ने बताया कि 2007 में रेल गाड़ी और रेल लाइन के विस्तार की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया। उन्होंने बताया कि 30 जून 1993 को नरौरा परमाणु केंद्र में एक बड़ा हादसा होते-होते बचा था। उस समय शासन और प्रशासन ने रेलवे लाइन के विस्तारीकरण पर जोर दिया था। उसके बाद इसकी सुनवाई नहीं हुई। 2007 के आंदोलन की सुनवाई 2013 में हुई। इसमें तत्कालीन रेल मंत्री पवन बंसल ने नरौरा, राजघाट स्टेशन से कर्णवास, अनूपशहर, जहांगीराबाद, बुलंदशहर, सिकंदराबाद, दादरी, गाजियाबाद होते हुए दिल्ली से जोडने की मांग थी। इस मांग को 2013 के रेल बजट में 115 किलोमीटर का प्रोजेक्ट बनाकर रेल मंत्रालय ने 2013 के रेल बजट में पूरे रूट को दर्शाते हुए सर्वेक्षण के लिए प्रस्तावित कर दिया था। सर्वेक्षण की लागत भी निर्धारित कर दी गई थी, 2014 में चुनाव हो गया लेकिन उसके बाद इस पर कोई सुनवाई नहीं हुई।
यह था रेलवे लाइन जोड़ने का दूसरा रूट
रेलवे सलाहकार समिति की पूर्व सदस्य गीता कुमारी का कहना है कि 28 अगस्त 1997 को डीआरयूसी की विशेष बैठक में यह प्रस्ताव रखा था। उस समय रेल मंत्री रामविलास पासवान थे। प्रतिनिधिमंडल ने रेलमंत्री से मुलाकात कर 55 किमी लंबे इस रूट पर रेलवे लाइन बिछवाने की मांग की थी। बुलंदशहर से औरंगाबाद, लखावटी, स्याना होते हुए गढ़मुक्तेश्वर को जोड़ना था। रेलमंत्री को फिर से पत्र भेजकर 23 साल से लंबित प्रस्ताव को बजट में शामिल करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि इसके अलावा बुलंदशहर से दिल्ली तक सीधी रेल सेवा, बुलंदशहर स्टेशन पर माल उतारने के लिए नये प्लेटफार्म, बुलंदशहर स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेन का मार्ग बढ़ाने और स्टेशन पर यात्रियों की सुविधाएं के लिए संसाधनों की व्यवस्था करने की मांग की है।

जिले में जल्द दौड़ेगी रैपिड रेल : डॉ. भोला सिंह
सांसद डा. भोला सिंह ने बताया कि 2019 में रेलवे की मांग की गई थी। उस पर काम चल रहा था। अब जेवर में एयरपोर्ट बन रहा है। जल्द ही जिले में आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम) के तहत रैपिड रेल दौड़ेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed