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पास में स्कूल-कॉलेज नहीं, दूर जाने पर शोहदे करते हैं परेशान
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पास में स्कूल-कॉलेज नहीं, दूर जाने पर शोहदे करते हैं परेशान
बुलंदशहर। आपको यकीन नहीं होगा लेकिन सच यही है। देश की राजधानी दिल्ली से महज 70 से 80 किलोमीटर दूर स्थित जहांगीराबाद ब्लॉक के 10 गांवों की बेटियों ने आठवीं के बाद पढ़ाई इसलिए छोड़ दी क्योंकि आगे की पढ़ाई के लिए नजदीक में स्कूल और कॉलेज नहीं हैं। 12 से 15 किलोमीटर दूर जो स्कूल-कॉलेज हैं भी वहां तक पहुंचने के लिए सार्वजनिक परिवहन नहीं है। कुछ ने हिम्मत करके साइकिल से जाने का फैसला किया लेकिन शोहदों के दुस्साहस के आगे बेटियां हार गईं। अमर उजाला की टीम ने इन गांवों का दौरा किया तो यह कड़वी सच्चाई सामने आई।
गांव बामनपुर ताल्लुका के खेत में काम कर रहीं श्वेता, अंजलि, भारती, कोको, काजल ने बताया कि वह पढ़ना चाहती हैं, लेकिन गांव में कक्षा आठ के बाद पढ़ने की सुविधा नहीं है। आगे की पढ़ाई करना है तो उसके लिए 12 किलोमीटर दूर जाना पड़ेगा। वहां जाने आने के लिए कोई साधन भी नहीं है। साइकिल से जाएं भी तो रास्ते सुनसान रहते हैं, आए दिन लड़कियों से छेड़छाड़ की घटनाएं होती हैं। परिवार के लोग इससे डरे हुए हैं। माता-पिता की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं है कि वह निजी स्कूलों में दाखिला कराते हुए फीस भरने के साथ स्कूल वाहनों का खर्चा दे सकें।
छेड़छाड़ के बाद छोड़ दी पढ़ाई
भिरौली गांव निवासी दो बेटियों ने बताया कि जनवरी में उनके गांव से शिवाली स्कूल जाते समय छात्राओं के साथ छेड़छाड़ हुई थी। मामला काफी बढ़ने पर गांव के अंदर पंचायत भी की गई। पुलिस ने उस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। उसी दौरान पीड़ित छात्राओं की पढ़ाई तो रुकी ही, उनके साथ अन्य परिजनों ने अपनी बेटियों की पढ़ाई भी छुड़वा दी। काफी छात्राओं की पढ़ाई आठवीं के बाद एक साथ बंद हो गई। गांव या आसपास में कालेज होता तो शिक्षा के माध्यम से हम भी आगे का भविष्य बेहतर कर पाते।
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बांसुरी गांव की बेटियों को रास्ते में लगता है डर
बांसुरी गांव की बेटी खुशी और ज्योति ने बताया कि गांव से स्कूल की दूरी करीब 10 किलोमीटर दूर है। आठवीं के बाद हमने पढ़ने की इच्छा जताई, परिवार के लोग इसके लिए तैयार भी हो गए। इसी दौरान रास्ते में आए दिन छात्राओं के साथ छेड़छाड़ की सूचना मिलने लगी। उन्होंने स्कूल भेजने से साफ मना कर दिया। इस गांव में कई ऐसे परिवार हैं, जो बड़े जमीदार हैं, वह भी अपनी बेटियों को पढ़ने के लिए नहीं भेजते हैं।
20 से अधिक परिवारों ने छुड़वा दी बेटियों की पढ़ाई
आंजनी गांव की प्रधान के पति अरविंद कुमार शर्मा ने बताया कि स्कूल की दूरी नौ किलोमीटर से ज्यादा है। अभिभावक छेड़छाड़ और अन्य घटनाओं के कारण उन्हें भेजने में डरते हैं। आठवीं के बाद छात्राओं की आगे पढ़ाई जारी रखने के लिए 20 से अधिक परिवारों से मिलकर कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में प्रवेश कराने की अपील की, लेकिन अभिभावकों ने डर के कारण बेटियों को पढ़ने के लिए नहीं भेजा।
इन गांव की बच्चियों की बंद हुई पढ़ाई
महगौरा, बामनपुर ताल्लुका, बहीर खेड़ा, मुरादगढ़ी, जनौरा, भिरौली, नौबतपुर, बालखा, गढ़िया, किशनपुर, खनपुरा, आंजनी, बांसरी, नबीनगर, कुरैना, कोठरा, फतेहपुर गांव में आठवीं के बाद पढ़ाई की व्यवस्था नहीं है।
बोले अभिभावक
मैंने अपनी बेटी की पढ़ाई कक्षा आठ के बाद बंद करा दी क्योंकि गांव में आगे की पढ़ाई की कोई व्यवस्था नहीं है। बाहर भेजने से डर लगता है। - बलवीर अभिभावक गांव बामनपुर
मेरी दो भतीजी हैं। दोनों ही स्कूल जाती थीं लेकिन गांव के बाहर छेड़छाड़ की घटनाओं से डरकर उन्हें स्कूल भेजना बंद कर दिया है। वह घर के काम में हाथ बंटाती हैं। - सोनू कुमार, अभिभावक गांव भिरौली
मेरे गांव की 40 फीसदी से ज्यादा बेटियां कक्षा आठ के बाद पढ़ ही नहीं पाती हैं। गांव से 12 किलोमीटर दूर स्कूल है। अभिभावक डर के कारण उन्हें नहीं भेजते हैं। गांव में कई बार स्कूल बनवाने की मांग की गई है।- श्रीपाल सिंह, ग्राम प्रधान बामनपुर ताल्लुका
स्कूल जाने आने के दौरान छात्राओं के साथ लगातार छेड़छाड़ की घटनाएं हो रही थीं। इस कारण अभिभावकों ने बेटियों को स्कूल भेजना बंद कर दिया। कई गांव की पंचायत हुई। पुलिस ने फैसला कराकर मामला शांत करा दिया। - संजीव कुमार, ग्राम प्रधान भिरौली
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बुलंदशहर। आपको यकीन नहीं होगा लेकिन सच यही है। देश की राजधानी दिल्ली से महज 70 से 80 किलोमीटर दूर स्थित जहांगीराबाद ब्लॉक के 10 गांवों की बेटियों ने आठवीं के बाद पढ़ाई इसलिए छोड़ दी क्योंकि आगे की पढ़ाई के लिए नजदीक में स्कूल और कॉलेज नहीं हैं। 12 से 15 किलोमीटर दूर जो स्कूल-कॉलेज हैं भी वहां तक पहुंचने के लिए सार्वजनिक परिवहन नहीं है। कुछ ने हिम्मत करके साइकिल से जाने का फैसला किया लेकिन शोहदों के दुस्साहस के आगे बेटियां हार गईं। अमर उजाला की टीम ने इन गांवों का दौरा किया तो यह कड़वी सच्चाई सामने आई।
गांव बामनपुर ताल्लुका के खेत में काम कर रहीं श्वेता, अंजलि, भारती, कोको, काजल ने बताया कि वह पढ़ना चाहती हैं, लेकिन गांव में कक्षा आठ के बाद पढ़ने की सुविधा नहीं है। आगे की पढ़ाई करना है तो उसके लिए 12 किलोमीटर दूर जाना पड़ेगा। वहां जाने आने के लिए कोई साधन भी नहीं है। साइकिल से जाएं भी तो रास्ते सुनसान रहते हैं, आए दिन लड़कियों से छेड़छाड़ की घटनाएं होती हैं। परिवार के लोग इससे डरे हुए हैं। माता-पिता की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं है कि वह निजी स्कूलों में दाखिला कराते हुए फीस भरने के साथ स्कूल वाहनों का खर्चा दे सकें।
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छेड़छाड़ के बाद छोड़ दी पढ़ाई
भिरौली गांव निवासी दो बेटियों ने बताया कि जनवरी में उनके गांव से शिवाली स्कूल जाते समय छात्राओं के साथ छेड़छाड़ हुई थी। मामला काफी बढ़ने पर गांव के अंदर पंचायत भी की गई। पुलिस ने उस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। उसी दौरान पीड़ित छात्राओं की पढ़ाई तो रुकी ही, उनके साथ अन्य परिजनों ने अपनी बेटियों की पढ़ाई भी छुड़वा दी। काफी छात्राओं की पढ़ाई आठवीं के बाद एक साथ बंद हो गई। गांव या आसपास में कालेज होता तो शिक्षा के माध्यम से हम भी आगे का भविष्य बेहतर कर पाते।
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बांसुरी गांव की बेटियों को रास्ते में लगता है डर
बांसुरी गांव की बेटी खुशी और ज्योति ने बताया कि गांव से स्कूल की दूरी करीब 10 किलोमीटर दूर है। आठवीं के बाद हमने पढ़ने की इच्छा जताई, परिवार के लोग इसके लिए तैयार भी हो गए। इसी दौरान रास्ते में आए दिन छात्राओं के साथ छेड़छाड़ की सूचना मिलने लगी। उन्होंने स्कूल भेजने से साफ मना कर दिया। इस गांव में कई ऐसे परिवार हैं, जो बड़े जमीदार हैं, वह भी अपनी बेटियों को पढ़ने के लिए नहीं भेजते हैं।
20 से अधिक परिवारों ने छुड़वा दी बेटियों की पढ़ाई
आंजनी गांव की प्रधान के पति अरविंद कुमार शर्मा ने बताया कि स्कूल की दूरी नौ किलोमीटर से ज्यादा है। अभिभावक छेड़छाड़ और अन्य घटनाओं के कारण उन्हें भेजने में डरते हैं। आठवीं के बाद छात्राओं की आगे पढ़ाई जारी रखने के लिए 20 से अधिक परिवारों से मिलकर कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में प्रवेश कराने की अपील की, लेकिन अभिभावकों ने डर के कारण बेटियों को पढ़ने के लिए नहीं भेजा।
इन गांव की बच्चियों की बंद हुई पढ़ाई
महगौरा, बामनपुर ताल्लुका, बहीर खेड़ा, मुरादगढ़ी, जनौरा, भिरौली, नौबतपुर, बालखा, गढ़िया, किशनपुर, खनपुरा, आंजनी, बांसरी, नबीनगर, कुरैना, कोठरा, फतेहपुर गांव में आठवीं के बाद पढ़ाई की व्यवस्था नहीं है।
बोले अभिभावक
मैंने अपनी बेटी की पढ़ाई कक्षा आठ के बाद बंद करा दी क्योंकि गांव में आगे की पढ़ाई की कोई व्यवस्था नहीं है। बाहर भेजने से डर लगता है। - बलवीर अभिभावक गांव बामनपुर
मेरी दो भतीजी हैं। दोनों ही स्कूल जाती थीं लेकिन गांव के बाहर छेड़छाड़ की घटनाओं से डरकर उन्हें स्कूल भेजना बंद कर दिया है। वह घर के काम में हाथ बंटाती हैं। - सोनू कुमार, अभिभावक गांव भिरौली
मेरे गांव की 40 फीसदी से ज्यादा बेटियां कक्षा आठ के बाद पढ़ ही नहीं पाती हैं। गांव से 12 किलोमीटर दूर स्कूल है। अभिभावक डर के कारण उन्हें नहीं भेजते हैं। गांव में कई बार स्कूल बनवाने की मांग की गई है।- श्रीपाल सिंह, ग्राम प्रधान बामनपुर ताल्लुका
स्कूल जाने आने के दौरान छात्राओं के साथ लगातार छेड़छाड़ की घटनाएं हो रही थीं। इस कारण अभिभावकों ने बेटियों को स्कूल भेजना बंद कर दिया। कई गांव की पंचायत हुई। पुलिस ने फैसला कराकर मामला शांत करा दिया। - संजीव कुमार, ग्राम प्रधान भिरौली