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जिले में निरंकुश पुलिस पहले भी ले चुकी है जान

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 11 Oct 2021 11:21 PM IST
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E-rikshaw driver death case
छतारी क्षेत्र के गांव चौढ़ेरा में गौरीशंकर की मौत के बाद मौके पर मौजूद एसएसपी, डीएम और राज्यमंत्र - फोटो : KHURJA
जिले में निरंकुश पुलिस पहले भी ले चुकी है जान
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बुलंदशहर। पुलिस की निरंकुशता का जिले में यह कोई पहला मामला नहीं है।
जनपद में वर्ष 2008 में गुलावठी थाने में एक युवक की थर्ड डिग्री से मौत हुई थी। उक्त प्रकरण की गूंज लखनऊ और दिल्ली के गलियारों तक गूंजी थी। बताया गया था कि उस दौरान तत्कालीन थाना प्रभारी समय सिंह ने एक युवक को किसी वारदात में शामिल होने की आशंका पर पूछताछ के लिए पकड़ा था। जिसके बाद उसे थर्ड डिग्री दी गई, जिससे उसकी मौत हो गई। मामले में थाना प्रभारी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई और उन्हें जेल भी जाना पड़ा था।
जून 2014 में पहासू थाने की हवालात में एक युवक चांद का शव फंदे से लटका हुआ मिला था। बताया गया था कि युवक को पुलिस ने पांच दिन तक हिरासत में रख कर थर्ड डिग्री दी। जिससे आहत होकर उसने हवालात में ही अपने गमछे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। प्रकरण में तत्कालीन सीओ समेत थाने पर तैनात अन्य 19 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया था। कुछ दिन बाद यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला गया। खुर्जा नगर कोतवाली में भी कुछ माह पूर्व एक युवक की पुलिस की पिटाई से मौत का मामला सामने आया था। लेकिन, बाद में यह मामला रफादफा हो गया।
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न एफआईआर होती, न कार्रवाई
पुलिस की पिटाई से मौत हो या फिर क्षुब्ध होकर आत्महत्या का मामला, ऐसे कई मामले कुछ समय हाईलाइट में रहने के बाद रफा-दफा हो जाते हैं। पुलिस भी कई मामलों में आला अफसरों के निर्देश पर रिपोर्ट दर्ज करने के बाद कोई कार्रवाई नहीं करती है।
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