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ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में पिछड़ी आधी आबादी

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 04 Apr 2021 11:20 PM IST
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महिलाएं आज हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। चाहे ट्रेन चलानी हो या लड़ाकू विमान, हर जगह वह पुरुषों से कंधे से कंधा मिलाकर नाम रोशन कर रही हैं। लेकिन जिले में संभागीय परिवहन विभाग का एक आंकड़ा चौंकाने वाला है। जनपद में लाइसेंस बनवाने के मामले में महिलाओं की रफ्तार काफी धीमी है। वर्ष 2019 और 20 में पुरुषों के 42 हजार से अधिक ड्राइविंग लाइसेंस बने तो महिलाओं की संख्या मात्र एक हजार 714 रही है।
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जनपद भर में करीब छह लाख से अधिक छोटे और बड़े वाहन एआरटीओ कार्यालय में रजिस्टर्ड हैं। विभागीय अफसरों के अनुसार स्कूटी अधिकांश महिलाओं की पहली पसंद होती है। बिना गियर के इस वाहन को महिला चालकों के लिए सहज माना जाता है। एक अनुमान के अनुसार पंजीकृत वाहनों में से करीब 20 प्रतिशत वाहन महिलाओं के नाम पर हैं। इसके बावजूद लाइसेंस लेने के मामले में महिलाओं की रुचि न के बराबर है। वहीं, महिला वाहन चालकों के चालान के नाम पर भी एआरटीओ कार्यालय में कोई तथ्यात्मक डाटा नहीं है। साथ ही महिलाओं को ड्राइविंग लाइसेंस के लिए जागरूक करने के लिए भी विभाग कोई अभियान नहीं चलाता है।
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खानापूर्ति बनकर रह गया मिशन शक्ति अभियान
प्रदेश सरकार ने मिशन शक्ति अभियान के तहत जनपद के हर सरकारी विभाग में अभियान चलाकर महिलाओं को सरकारी योजनाओं से लाभान्वित करने का निर्देश दिया हुआ है। इस क्रम में संभागीय परिवहन विभाग ने भी योजना के तहत महिलाओं के लाइसेंस बनवाने के लिए शिविर लगवाए थे, लेकिन यह महज औपचारिकता बनकर रह गई। एक दिन के कैंप में मात्र 12 महिलाओं ने ही लाइसेंस के लिए आवेदन किए। इसके अलावा 43 अन्य महिलाओं के आवेदन लिए गए। जिसमें 14 परमानेंट और 15 लर्निंग लाइसेंस बनाए जा चुके है और शेष महिलाओं के लाइसेंस के लिए आवेदन किए गए।
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चार लाख से अधिक हैं जिले में दो पहिया वाहन
संभागीय परिवहन कार्यालय में चार लाख 16 हजार 290 दो पहिया वाहन पंजीकृत हैं। जिसमें 16 हजार 919 मोपेड वाहन और तीन लाख 99 हजार 371 वाहनों में मोटर साइकिल और एक्टिवा आदि शामिल हैं। इसके अलावा जनपद में 27 हजार 786 वाहन पेट्रोल के और छह हजार से अधिक वाहन डीजल के चार पहिया वाहन पंजीकृत है।

बिना लाइसेंस वाहन चलाने पर यह है नुकसान
परिवहन अफसरों के अनुसार बिना ड्राइविंग लाइसेंस के वाहन चलाने पर पांच हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाता है। कोई घटना, दुर्घटना होती है तो वाहन चलाने वाले चालक की पूरी जिम्मेदारी होती है। चालक के पास अगर लाइसेंस नहीं है तो बीमा कंपनी की भी कोई जिम्मेदारी नहीं होती। वाहन चालक बीमा कंपनी को क्षतिपूर्ति क्लेम नहीं कर सकता है। यदि हादसे में किसी की मौत हो जाती है तो चालक पर धारा 304 यानी गैर इरादतन हत्या का मुकदमा तक दर्ज होता है।


गत दो वर्षों में डीएल बनवाने वालों की संख्या
वर्ष महिलाओं की संख्या पुरुष की संख्या कुल संख्या
2019 845 23,658 24,503
2020 869 18,542 19,411
2021 284 5,565 5,849
कुल योग 1,998 47,765 49,763
नोट : यह आंकड़े 28 फरवरी 2021 तक के हैं।

बिना ड्राइविंग लाइसेंस के वाहन चलाना अपराध है, यह सभी को समझना चाहिए। प्रतिदिन लर्निंग लाइसेंस टेस्ट के लिए नाममात्र महिला आवदेक कार्यालय आती हैं। जिनमें 30 फीसदी फेल हो जाती हैं। लर्निंग लाइसेंस टेस्ट में यदि किसी महिला को कंप्यूटर चलाने में परेशानी होती है तो उसकी मदद कर दी जाती है। विभाग की ओर से अभियान चलाकर भी महिलाओं को लाइसेंस बनवाने के प्रति जागरूक किया जाता है। - मो. कय्यूम, एआरटीओ प्रशासन

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