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डीएम साहिबा! जाम और ई-रिक्शा से मुक्ति दिलाइए
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर
Updated Fri, 20 May 2016 09:31 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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जिलाधिकारी महोदय, शहर ई- रिक्शा संचालकों की मनमानी से बंधक बना हुआ है। शहर की सड़कों पर गाड़ी तो दूर पैदल सफर करना भी मुश्किल हो गया है। अतिक्रमण के चलते पहले से सड़कों पर जाम की स्थिति रहती थी, अब तो हाल और खराब है।
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ई-रिक्शों की तेजी से बढ़ती संख्या और इनके चालकाें का बेतरतीब ढंग से चलाना मुसीबत बन गया है। नगरवासी रोज ही जाम की समस्या से जूझते हुए डीएम साहिबा से कुछ इसी तरह से गुहार लगा रहे हैं।
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शहर के अधिकांश मार्गों पर बुरी स्थिति रहती है। सबसे ज्यादा खराब हालात स्याना अड्डे से कालाआम तक है। स्याना अड्डे की तरफ से शहर में अनूपशहर, डिबाई, स्याना, औरंगाबाद, जहांगीराबाद, नरौरा समेत 250 से 300 गांवों के हजारों लोगों का रोजाना आवागमन होता है।
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यदि कोई आपात स्थिति में आ रहा हो तो उसे कालाआम तक पहुंचने में दो से तीन घंटे का समय लग जाएगा। काली नदी रोड, डिप्टी गंज, बूरा बाजार, धमेड़ा मोड़, अंबर रोड की भी यही हालत है। यहां से गुजरने की सोचना भी जाम का डर पैदा कर देता है। भीषण गर्मी में जाम के कारण राहगीरों को काफी दिक्कत होती है।
शहर में हर समय जाम के कारण छवि भी खराब होती है। लोग बुलंदशहर के बाजारों में जाम के कारण घुसना भी नहीं चाहते हैं। कई बार ऐसे हालात बन जाते हैं कि जाम में गंभीर अवस्था में मरीजों को ला रही एंबुलेंस फंस जाती है।
कहां है रोडमैप
तत्कालीन जिलाधिकारी बी. चंद्रकला की अध्यक्षता में एआरटीओ, नगर पालिका और पुलिस अफसरों की बैठक हुई थी। बैठक में ई-रिक्शों पर नियंत्रण के लिए एक रोडमैप तैयार किया गया। रोडमैप को लागू करने के लिए अफसरों ने बड़े-बड़े दावे किए। लेकिन वह दावे अब फुस्स हो गए हैं।
रूटों का हुआ था निर्धारण
बुलंदशहर और खुर्जा में ई-रिक्शा संचालन के लिए बकायदा रूटों का निर्धारण किया गया। यह भी तय हुआ कि किस रूट पर कौन से रंग और कितने ई-रिक्शा चलेंगे। लेकिन यह सब प्लान अफसरों की फाइलों में दबे हुए हैं।
अभी नहीं तो कभी नहीं
शहर में जाम का प्रमुख कारण बने ई-रिक्शों पर प्रशासन को सख्त कदम उठाना ही होगा। ई-रिक्शों के कारण इस समय शहर की ट्रैफिक व्यवस्था बुरी तरह चरमराई हुई है।
ई-रिक्शों की संख्या बहुत तेजी के साथ बढ़ रही है। नगर पालिका में दर्ज आंकड़े बेशक इनकी संख्या 1500 के आसपास बताते हों, लेकिन अनुमान के अनुसार इनकी संख्या 5000 से भी ज्यादा है। यदि ऐसे में इन पर अभी नियंत्रण नहीं लगा तो फिर कभी नहीं लगेेगा।
शहर को जाम मुक्त बनाने के लिए हर प्रयास किए जाएंगे। अतिक्रमण और ई-रिक्शों के संचालन को लेकर अफसरों के साथ बैठक कर रणनीति बनाई जाएगी। - शुभ्रा सक्सेना, जिलाधिकारी