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Bulandshahar News: मालपुआ का भोग लगाकर मां कूष्मांडा का भक्तों ने किया पूजन
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सलेमपुर क्षेत्र के गांव चित्सौन में चल रही श्रीराम कथा के दौरान आरती करते श्रद्धालु। संवाद
बुलंदशहर/अहार/नरौरा। चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन मंगलवार को श्रद्धालुओं ने मालपुआ का भोग लगाकर मां के चौथे स्वरूप कूष्मांडा देवी का पूजन किया। सुबह से लेकर देर रात तक देवी मंदिरों में भक्तों की भीड़ रही। भक्तों ने घंटे-घड़ियाल बजाकर माता के जयकारे लगाए।
चैत्र नवरात्र पर व्रत रखने वाले भक्तों में उत्साह है। सुबह पांच बजे से स्नान कर श्रद्धालुओं ने घर के पूजा स्थल को शुद्ध किया। माता की चौकी पर देवी मां के कूष्मांडा स्वरूप की अर्चना की। अग्यारी कर भोग प्रसाद लगाया। इसके बाद श्रद्धालु देवी मंदिरों में जलाभिषेक के लिए पहुंचे। नगर के भवन मंदिर, अहार के अवंतिका देवी मंदिर और नरौरा के बैलोन भवानी मंदिर समेत जिलेभर के मंदिरों में सुबह से ही जलाभिषेक, दीप धूप जलाकर श्रद्धालुओं ने घर में सुख समृद्धि की कामना की। वहीं, बुधवार को मां के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता की पूजा होगी। पंडित नरेश शर्मा ने बताया कि इस बार नवरात्र आठ दिन का रहेगा।
व्रत रखने वाले भक्त प्रातः काल स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद मां का पूजन आरंभ करें। मां की प्रतिमा को गंगाजल से शुद्ध करें। मां के श्रृंगार के लिए शुभ रंगों का इस्तेमाल करना श्रेष्ठ माना गया है। स्कंदमाता और भगवान कार्तिकेय की पूजा विनम्रता के साथ करनी चाहिए। पूजा में कुमकुम, अक्षत, पुष्प, फल आदि से पूजा करें। चंदन लगाएं, माता के सामने घी का दीपक जलाएं। फूल चढ़ाएं व भोग लगाएं। मां की आरती उतार मंत्र का जाप करें। इनका प्रिय भोग केला है। खीर और सूखे मेवे का भोग भी प्रिय है।
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चैत्र नवरात्र पर व्रत रखने वाले भक्तों में उत्साह है। सुबह पांच बजे से स्नान कर श्रद्धालुओं ने घर के पूजा स्थल को शुद्ध किया। माता की चौकी पर देवी मां के कूष्मांडा स्वरूप की अर्चना की। अग्यारी कर भोग प्रसाद लगाया। इसके बाद श्रद्धालु देवी मंदिरों में जलाभिषेक के लिए पहुंचे। नगर के भवन मंदिर, अहार के अवंतिका देवी मंदिर और नरौरा के बैलोन भवानी मंदिर समेत जिलेभर के मंदिरों में सुबह से ही जलाभिषेक, दीप धूप जलाकर श्रद्धालुओं ने घर में सुख समृद्धि की कामना की। वहीं, बुधवार को मां के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता की पूजा होगी। पंडित नरेश शर्मा ने बताया कि इस बार नवरात्र आठ दिन का रहेगा।
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व्रत रखने वाले भक्त प्रातः काल स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद मां का पूजन आरंभ करें। मां की प्रतिमा को गंगाजल से शुद्ध करें। मां के श्रृंगार के लिए शुभ रंगों का इस्तेमाल करना श्रेष्ठ माना गया है। स्कंदमाता और भगवान कार्तिकेय की पूजा विनम्रता के साथ करनी चाहिए। पूजा में कुमकुम, अक्षत, पुष्प, फल आदि से पूजा करें। चंदन लगाएं, माता के सामने घी का दीपक जलाएं। फूल चढ़ाएं व भोग लगाएं। मां की आरती उतार मंत्र का जाप करें। इनका प्रिय भोग केला है। खीर और सूखे मेवे का भोग भी प्रिय है।
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