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Bulandshahar News: बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने सजा के खिलाफ शुरू की अपील की तैयारी
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बुलंदशहर। स्याना हिंसा प्रकरण में दोषियों को सजा मिलने के बाद बचाव पक्ष ने खुलकर इस पूरे प्रकरण को पुलिस की कहानी करार दिया है। उनका कहना है कि वह सजा के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील की तैयारी कर रहे हैं। जल्द ही आदेश की नकल कॉपी लेकर प्रयागराज में आदेश के खिलाफ अपील डाली जाएगी।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता अशोक डागर ने बताया कि स्याना हिंसा प्रकरण में वह हत्या के अभियुक्त लोकेंद्र, जॉनी चौधरी और बाल अपचारी समेत करीब 20 से अधिक आरोपियों के अधिवक्ता हैं। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की गहनता से चार्जशीट और केस डायरी को पढ़ा है, जो कि पूर्ण रूप से पुलिस की कहानी बयां कर रही है। दूसरी ओर बचाव पक्ष के एक अन्य अधिवक्ता संजय शर्मा ने कहा कि उनकी नजर में यह न्याय नहीं सिर्फ निर्णय है। जिसके खिलाफ उच्च न्यायालय में जाने की तैयारी की जा चुकी है। नकल मिलते ही हाईकोर्ट में आदेश को चुनौती देंगे। इसके अलावा अन्य बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने भी उच्च न्यायालय में अपील करने की तैयारी शुरू कर दी है।
समय सारणीः-
घटना का दिन-
तीन दिसंबर 2018 को घटना हुई
चार दिसंबर 2018 को एफआईआर दर्ज की गई
तीन मार्च 2019 को आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल
21 जनवरी 2022 न्यायालय में चार्ज फ्रेम किया गया
30 जुलाई को न्यायालय ने सभी अभियुक्तों को दोषी करार दिया
कुल परिक्षित गवाह- 26
करीब 450 पेज का है आर्डर
स्याना हिंसा प्रकरण में न्यायालय का आदेश करीब 400 से 450 पेज का है। न्यायालय ने इसकी एक-एक कॉपी सभी अभियुक्तों को मुफ्त में उपलब्ध कराने के आदेश भी दिए हैं। इसके लिए करीब 17000 पेज की फोटो कॉपी कराई जा रही है।
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26 गवाह ही कराए गए परीक्षित
मामले में पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद 126 साक्ष्यों की सूची पेश की थी। अभियोजन की ओर से इस मामले में सिर्फ 26 गवाह ही पेश किए गए। जिसमें 25 गवाह खुद पुलिसकर्मी थे और एकमात्र गवाह स्वतंत्र था। शेष गवाहों को अभियोजन की ओर से न्यायालय में पेश नहीं किया गया।
स्वतंत्र गवाह ने क्रॉस एग्जामिनेशन में कुबूल की थी सुमित की मौत की बात
अधिवक्ता अशोक डागर ने बताया कि उन्होंने एकमात्र स्वतंत्र गवाह से क्रॉस एग्जामिनेशन किया था। उन्होंने जब उससे सुमित की मौत के बारे में पूछा था तो उसने बताया था कि यह बात सही है कि सुमित की मृत्यु इंस्पेक्टर की गोली लगने से हुई थी। साथ ही कहा था कि वह सुमित के पिता को जानता है। सुमित की मृत्यु के बाद वह उसके घर भी गया था। यह बात उसने किसी पुलिस अधिकारी व सुमित के परिवार वालों को नहीं बताई थी कि सुमित की मृत्यु इंस्पेक्टर साहब की गोली लगने से हुई है।
दिनभर न्यायालय में चर्चाएं करते रहे लोग
स्याना हिंसा के सभी 38 दोषी शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे जिला न्यायालय पहुंच गए थे। उन्हें पहले न्यायालय की हवालात में रखा गया। इसके बाद सुबह करीब साढ़े 11 बजे सभी अभियुक्तों को न्यायालय में पेश किया गया। बाद में दोपहर लंच के समय वापस हवालात भेज दिया गया। इस दौरान न्यायालय ने बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं से सजा के प्रश्न पर बहस सुनीं और शाम को करीब छह बजे एक बार फिर अभियुक्तों को न्यायालय में पेेश किया गया और उन्हें सजा सुनाई गई। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। न्यायालय के मुख्य द्वार से कोर्ट रूम तक पुलिसकर्मियों का सख्त पहरा था। तीसरी मंजिल पर बनी न्यायालय में दोषियों के आने जाने के वक्त सभी की एंट्री निषेध कर दी गई थी। दोषियों के परिजन व समर्थक न्यायालय परिसर में इधर-उधर खड़े इंतजार कर रहे थे। दिनभर अधिवक्ता व अन्य मामलों में न्यायालय आए लोग भी स्याना कांड पर चर्चाएं करते नजर आए।
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बचाव पक्ष के अधिवक्ता अशोक डागर ने बताया कि स्याना हिंसा प्रकरण में वह हत्या के अभियुक्त लोकेंद्र, जॉनी चौधरी और बाल अपचारी समेत करीब 20 से अधिक आरोपियों के अधिवक्ता हैं। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की गहनता से चार्जशीट और केस डायरी को पढ़ा है, जो कि पूर्ण रूप से पुलिस की कहानी बयां कर रही है। दूसरी ओर बचाव पक्ष के एक अन्य अधिवक्ता संजय शर्मा ने कहा कि उनकी नजर में यह न्याय नहीं सिर्फ निर्णय है। जिसके खिलाफ उच्च न्यायालय में जाने की तैयारी की जा चुकी है। नकल मिलते ही हाईकोर्ट में आदेश को चुनौती देंगे। इसके अलावा अन्य बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने भी उच्च न्यायालय में अपील करने की तैयारी शुरू कर दी है।
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समय सारणीः-
घटना का दिन-
तीन दिसंबर 2018 को घटना हुई
चार दिसंबर 2018 को एफआईआर दर्ज की गई
तीन मार्च 2019 को आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल
21 जनवरी 2022 न्यायालय में चार्ज फ्रेम किया गया
30 जुलाई को न्यायालय ने सभी अभियुक्तों को दोषी करार दिया
कुल परिक्षित गवाह- 26
करीब 450 पेज का है आर्डर
स्याना हिंसा प्रकरण में न्यायालय का आदेश करीब 400 से 450 पेज का है। न्यायालय ने इसकी एक-एक कॉपी सभी अभियुक्तों को मुफ्त में उपलब्ध कराने के आदेश भी दिए हैं। इसके लिए करीब 17000 पेज की फोटो कॉपी कराई जा रही है।
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26 गवाह ही कराए गए परीक्षित
मामले में पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद 126 साक्ष्यों की सूची पेश की थी। अभियोजन की ओर से इस मामले में सिर्फ 26 गवाह ही पेश किए गए। जिसमें 25 गवाह खुद पुलिसकर्मी थे और एकमात्र गवाह स्वतंत्र था। शेष गवाहों को अभियोजन की ओर से न्यायालय में पेश नहीं किया गया।
स्वतंत्र गवाह ने क्रॉस एग्जामिनेशन में कुबूल की थी सुमित की मौत की बात
अधिवक्ता अशोक डागर ने बताया कि उन्होंने एकमात्र स्वतंत्र गवाह से क्रॉस एग्जामिनेशन किया था। उन्होंने जब उससे सुमित की मौत के बारे में पूछा था तो उसने बताया था कि यह बात सही है कि सुमित की मृत्यु इंस्पेक्टर की गोली लगने से हुई थी। साथ ही कहा था कि वह सुमित के पिता को जानता है। सुमित की मृत्यु के बाद वह उसके घर भी गया था। यह बात उसने किसी पुलिस अधिकारी व सुमित के परिवार वालों को नहीं बताई थी कि सुमित की मृत्यु इंस्पेक्टर साहब की गोली लगने से हुई है।
दिनभर न्यायालय में चर्चाएं करते रहे लोग
स्याना हिंसा के सभी 38 दोषी शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे जिला न्यायालय पहुंच गए थे। उन्हें पहले न्यायालय की हवालात में रखा गया। इसके बाद सुबह करीब साढ़े 11 बजे सभी अभियुक्तों को न्यायालय में पेश किया गया। बाद में दोपहर लंच के समय वापस हवालात भेज दिया गया। इस दौरान न्यायालय ने बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं से सजा के प्रश्न पर बहस सुनीं और शाम को करीब छह बजे एक बार फिर अभियुक्तों को न्यायालय में पेेश किया गया और उन्हें सजा सुनाई गई। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। न्यायालय के मुख्य द्वार से कोर्ट रूम तक पुलिसकर्मियों का सख्त पहरा था। तीसरी मंजिल पर बनी न्यायालय में दोषियों के आने जाने के वक्त सभी की एंट्री निषेध कर दी गई थी। दोषियों के परिजन व समर्थक न्यायालय परिसर में इधर-उधर खड़े इंतजार कर रहे थे। दिनभर अधिवक्ता व अन्य मामलों में न्यायालय आए लोग भी स्याना कांड पर चर्चाएं करते नजर आए।