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कोर्ट में मां-बेटी ने सुनाई दरिंदगी की दास्तां

Thu, 11 Aug 2016 12:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर Updated Thu, 11 Aug 2016 12:00 AM IST
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The court sentenced the mother-daughter story of Drindgi
गैंगरेप - फोटो : अमर उजाला

हाईवे पर हैवानियत की शिकार मां-बेटी बुधवार सुबह कोर्ट पहुंच गईं। एसीजेएम(जेडी) निधि सिसौदिया ने अकेले में दोनों के बयान दर्ज किए।  इस दौरान कोर्ट परिसर में भारी पुलिस बल मौजूद रहा। साथ ही कोर्ट में पुलिस फोर्स देख कर भीड़ भी लगी रही।

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बुधवार सुबह करीब 11.30 बजे भारी पुलिस बल की सुरक्षा में पीड़ित मां-बेटी बुलंदशहर पहुंचीं। पहले वे विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम/एफटीसी द्वितीय ध्रुव कुमार तिवारी के समक्ष उपस्थित हुईं। वहां से उन्हें सीजेएम पारुल श्रीवास्तव की कोर्ट में भेजा गया।
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उन्होंने बयान दर्ज कराने के लिए उन्हें एसीजेएम(जेडी) अपर सिविल जज (जेडी) निधि सिसौदिया की कोर्ट में भेजा। यहां पहले बेटी के बयान दर्ज हुए। इसके बाद पीड़ित मां ने अपने बयान दर्ज कराए। सील बंद लिफाफे में बयानों को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम के कोर्ट भेजा गया।
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वहां विवेचक आरके सिंह ने न्यायाधीश के समक्ष बयानों का अवलोकन किया। बयानों को पुन: सील बंद किया गया। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता रविंद्र कुमार सिंह और विवेचक आरके सिंह ने बताया कि दोनों के बयान सुसंगत तथ्यों से परिपूर्ण हैं। इन बयानों के आधार पर अभियोजन पक्ष को न्यायालय में विचारण के दौरान मजबूती मिलेगी।

कार में बैठते ही पिता से लिपट कर रोई बिटिया
बुलंदशहर। हाईवे की हैवानियत को झेलने वाली मां-बिटिया उस काली रात को याद कर अभी भी सहम उठती हैं। बयान दर्ज कराने के बाद कार में बैठते ही सहमी हुई बिटिया अपने पिता से लिपट कर खूब रोई।

परिवार ने किया बोलने से इनकार
जिस समय पीड़ित मां-बेटी कोर्ट में मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज करा रही थीं तो परिवार के दो पुरुष एक कार में बैठे हुए थे। मीडियाकर्मियों ने पीड़ित परिवार से जब पूछा कि आप पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई से सहमत हैं तो पीड़ित परिवार के सदस्यों ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।

जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट में तलब
इलाहाबाद(ब्यूरो)। बुलंदशहर रेप कांड पर प्रदेश सरकार बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष कोई तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं कर पाई। सरकार की ओर से एक दिन की और मोहलत मांगी गई है। कोर्ट ने इसे मंजूर करते हुए कहा है कि पुलिस की जांच रिपोर्ट एसपी बुलंदशहर सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत करें।

इसमें पकड़े अपराधियों की जानकारी के साथ उनकी सामाजिक और आपराधिक पृष्ठभूमि एवं राजनीतिक दलों से संबंध की जानकारी भी दी जाए। मुख्य न्यायमूर्ति दिलीप बी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ द्वारा स्वत: संज्ञान ली गई जनहित याचिका पर महाधिवक्ता विजय बहादुर सिंह ने सरकार का पक्ष रखा।


उन्होंने दावा कि पुलिस ने इस केस को लगभग सुलझा लिया है। अदालत ने इन जानकारियों को सार्वजनिक करने से रोकते हुए कहा है कि ये सभी बाते सीलबंद लिफाफे में बृहस्पतिवार को उनके समक्ष प्रस्तुत की जाए। महाधिवक्ता ने कहा कि पुलिस की सफलता से अब सीबीआई जांच की बहुत आवश्यकता नहीं रह गई है हालांकि सीबीआई जांच कराने  में सरकार को कोई परेशानी नहीं है।


 

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