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बच्चे की बलि देने वाले दंपति को आजीवन कारावास
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर
Updated Sun, 19 Feb 2017 11:17 PM IST
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खानपुर थाना क्षेत्र में तंत्र-मंत्र के चक्कर में आकर दो साल के मासूम की बलि देने वाले दंपति को कोर्ट ने दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही सात-सात हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह फैसला अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय राम नारायण की कोर्ट ने सुनाया है। दोषियों ने वर्ष 2011 में वारदात को अंजाम दिया था।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी प्रशांत कुमार सिंह व वादिया के अधिवक्ता नवीन कुमार शर्मा ने बताया कि वादिया मालती उर्फ मालवती पत्नी भूपेंद्र सिंह निवासी ख्वाजपुर मीरपुर ने 13 सितंबर 2011 को सीजेएम कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था।
जिसमें मालती ने बताया था कि वह अपने मायके परवाना गई हुई थी। 19 अगस्त 2011 की दोपहर करीब 12 बजे कपड़े सुखाने छत पर पहुंची तो पड़ोसी रवि की सीढ़ियाें से गई थी। उसका दो वर्षीय पुत्र चेतन उसके पीछे-पीछे रवि के घर पहुंचा। बालक आंगन में मोटर के पास बैठकर काम कर रहे रवि व उसकी पत्नी हेमा के पास रुक गया।
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मालती जब कपड़े सुखाकर नीचे आई तो चेतन गायब था। साथ में रवि व हेमा भी लापता थे। शाम तक चेतन नहीं लौटा तो वादिया ने रवि व हेमा से पूछताछ की। लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। 20 अगस्त 2011 की सुबह 10 बजे रवि व हेमा के धान के खेत से चेतन की लाश मिली। उसके शरीर पर चोट के निशान थे।
चेतन की गला दबाया गया था, जिससे उसके नाक से खून रिस रहा था। मालती देवी की तहरीर पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की थी। पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर 16 अक्तूबर को रिपोर्ट दर्ज की। पुलिस ने विवेचना के बाद रवि व हेमा के खिलाफ चार्जशीट पेश की। न्यायालय में वादिया सहित छह गवाहों के बयान दर्ज हुए।
दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के बीच की बहस को सुनने के बाद रवि पुत्र कुतली निवासी गांव परवाना व हेमा पत्नी रवि को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही सात-सात हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी प्रशांत कुमार सिंह व वादिया के अधिवक्ता नवीन कुमार शर्मा ने बताया कि वादिया मालती उर्फ मालवती पत्नी भूपेंद्र सिंह निवासी ख्वाजपुर मीरपुर ने 13 सितंबर 2011 को सीजेएम कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था।
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जिसमें मालती ने बताया था कि वह अपने मायके परवाना गई हुई थी। 19 अगस्त 2011 की दोपहर करीब 12 बजे कपड़े सुखाने छत पर पहुंची तो पड़ोसी रवि की सीढ़ियाें से गई थी। उसका दो वर्षीय पुत्र चेतन उसके पीछे-पीछे रवि के घर पहुंचा। बालक आंगन में मोटर के पास बैठकर काम कर रहे रवि व उसकी पत्नी हेमा के पास रुक गया।
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मालती जब कपड़े सुखाकर नीचे आई तो चेतन गायब था। साथ में रवि व हेमा भी लापता थे। शाम तक चेतन नहीं लौटा तो वादिया ने रवि व हेमा से पूछताछ की। लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। 20 अगस्त 2011 की सुबह 10 बजे रवि व हेमा के धान के खेत से चेतन की लाश मिली। उसके शरीर पर चोट के निशान थे।
चेतन की गला दबाया गया था, जिससे उसके नाक से खून रिस रहा था। मालती देवी की तहरीर पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की थी। पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर 16 अक्तूबर को रिपोर्ट दर्ज की। पुलिस ने विवेचना के बाद रवि व हेमा के खिलाफ चार्जशीट पेश की। न्यायालय में वादिया सहित छह गवाहों के बयान दर्ज हुए।
दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के बीच की बहस को सुनने के बाद रवि पुत्र कुतली निवासी गांव परवाना व हेमा पत्नी रवि को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही सात-सात हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है।