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साइकिल टेंडर घोटाले में फंसे सीएमओ
अमर उजाला ब्यूरो/बुलंदशहर
Updated Fri, 19 Aug 2016 11:40 PM IST
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घोटाला
- फोटो : ब्यूरो
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स्वास्थ्य विभाग के टेंडरों में फर्जीवाड़ा अब खुलकर सामने आने लगा है। पता चला है कि टेंडर को सार्वजनिक तो किया गया, लेकिन उसे सिर्फ चहेते ठेकेदार को देकर प्रक्रिया पूरी कर ली गई। टेंडर विज्ञापन में भी पूरा ब्योरा नहीं दिया गया। इस मामले में सीएमओ के खिलाफ शासन से शिकायत की गई है।
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बुलंदशहर की फर्म नवीन मुद्रण एवं लेखन सामग्री नामक फर्म की ओर से मुख्यमंत्री से की गई शिकायत में कहा गया है कि 10 अगस्त को आशा-संगिनी के लिए साइकिल क्रय करने हेतु समाचार पत्रों के माध्यम से टेंडर आमंत्रित किए गए थे। यह विज्ञापन 11 कोे प्रकाशित हुआ।
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विज्ञापन में न तो साइकिलों की संख्या और न ही पूरा ब्योरा दिया गया, जबकि अन्य जनपदों के विज्ञापन में पूरा ब्योरा दिया गया। 12 अगस्त को जब टेंडर फार्म मांगा गया तो यह कहकर नहीं दिया गया कि अभी इस पर सीएमओ साहब के साइन नहीं हुए हैं। 13 को सेकेंड सटरडे, 14 को संडे और 15 को स्वतंत्रता दिवस की छुट्टी के चलते दफ्तर बंद रह
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16 को जब दफ्तर गए तो बाबू ने सीएमओ के मंगल दिवस में जाने का हवाला देते हुए टेंडर नहीं दिया, जबकि टेंडर फार्म देने में सीएमओ की कोई भूमिका नहीं होती। इसकी वाइस रिकॉर्डिंग भी उनके पास मौजूद हैं।
इसी के साथ टेंडर डालने की अंतिम तारीख निकल गई और सीएमओ के एक चहेते ठेकेदार ने फर्जी तरीके से प्रक्रिया को पूरा कर लिया। शिकायतकर्ता ने टेंडर प्रक्रिया निरस्त करने के साथ ही इसकी जांच कराने की भी मांग की है।
मेरी तरफ से बाबू को टेंडर फार्म सार्वजनिक करने के निर्देश दिए गए थे। अब बाबू द्वारा फार्म क्यों नहीं दिया गया, इसके बारे में पता नही है। टेंडर प्रक्रिया पूरी पारदर्शी तरीके से हुई है। मुझे नहीं पता कि इस फर्म को टेंडर फार्म कैसे नहीं मिल पाया। - डॉ. दीपक ओहरी, सीएमओ
टेंडर प्रक्रिया पूरी प्लानिंग के तहत की गई। सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक मुझे फार्म नहीं दिया गया। अंतिम तारीख को शाम 6.30 बजे मेरे पास फोन आया कि टेंडर ले जाओ, ऐसे में वह सारी प्रक्रिया कैसे पूरी कर पाता। मेरे पास सभी साक्ष्य हैं, जो मैंने शासन को भी भेज दिए हैं। -अकबर अली, फर्म संचालक