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सीबीआई तक पहुंची कमीशन की रार
प्रद्युम्न कौशिक, बुलंदशहर
Updated Wed, 21 Dec 2016 12:31 AM IST
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बीएसएनएल
- फोटो : अमर उजाला
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बीएसएनएल दफ्तर में रिश्वत मामले में सोमवार देर शाम पड़े सीबीआई के छापे की वजह 18 करोड़ के टेंडर में कमीशन की रार था जो ठेकेदार और अफसरों के बीच मची थी। कार्य की गति धीमी होने पर सात ब्लॉकों के टेंडर निरस्त कर दिए गए थे और ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी लेकिन ठेकेदार पर कार्रवाई से पहले अफसर ही रिश्वतखोरी के जाल में फंस गए।
जनपद के 16 ब्लॉकों को नेशनल ऑप्टिकल फाइबर केबल नेटवर्क (नोफन) से जोड़ने के लिए कुल 18 करोड़ रुपया खर्च किए जाने थे। गाजियाबाद की एक कंपनी को कुल सात ब्लॉकों के टेंडर दिए गए थे, लेकिन फर्म संचालक द्वारा धीमी गति से काम किया जा रहा था।
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सूत्रों ने बताया कि इस पर डीजीएम की संस्तुति पर इस फर्म को दिए गए सात ब्लॉकों के काम से चार ब्लॉकों के टेंडर निरस्त कर दिए गए थे। तीन ब्लॉकों में भी काम धीमी प्रगति से चल रहा था, जबकि ठेकेदार बड़ी मात्रा में स्टोर से माल निकाल चुका था। सूत्रों का कहना है कि फर्म को लीगल नोटिस भी जारी किया गया था।
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फर्म को ब्लैक लिस्टेड करने की तैयारी चल रही थी। ठेकेदार पक्ष के एक सूत्र के मुताबिक अफसरों ने कमीशन के रूप में ठेकेदार से 25 लाख रुपये ज्यादा मांगे। ठेकेदार ने आनाकानी की तो उसके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई।
यही कारण है कि ठेकेदार और अफसरों के बीच ठन गई। अफसरों को बेनकाब करने के लिए ही ठेकेदार ने सीबीआई का सहारा लिया। पूरी तरह जाल बिछाकर योजनाबद्ध तरीके से काम हुआ। जाल में डीजीएम फंस गए तो एक वरिष्ठ अफसर बच निकला।
आखिर एक घंटे तक क्या हुई बात?
सूत्रों ने बताया कि ठेकेदार ने डीजीएम आरएस वर्मा को घूस देने से पहले एक वरिष्ठतम अफसर से दोपहर 1.15 मिनट से लेकर 2.20 मिनट तक उसके दफ्तर के अंदर वार्ता की। इस दौरान वार्ता में क्या हुआ? क्यों एक ठेकेदार से एक घंटा तक गुफ्तगू होती रही? हालांकि इस मुलाकात पर न तो यह अफसर और न ही ठेकेदार कुछ बोलने को तैयार नहीं है।