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‘मैं तो सिर्फ भाई की शक्ल देखने आया हूं’
अमर उजाला ब्यूरो/बुलंदशहर
Updated Thu, 21 Jul 2016 11:26 PM IST
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हत्यारा रनवीर।
- फोटो : ब्यूरो
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आठ साल बाद जब उस दोष की सजा सुनाने की बारी आई तो बर्बरता ढहाने वाला आरोपी रनवीर के पैर कांपने लगे। कोर्ट में दोष सिद्ध होते समय मुख्य आरोपी रनवीर विचलित था। हालांकि रनवीर ने मीडिया के सामने खुद को निर्दोष बताया।
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वहीं कोर्ट में मौजूद उसके परिवार के इकलौते सदस्य उसके बड़े भाई जगवीर ने फैसले पर संतोष जाहिर करते हुए कहा कि वह तो सिर्फ रनवीर की शक्ल देखने आए हैं। हत्यारे रनवीर को देखने के लिए गांव बरारी से भी 50-60 लोग बृहस्पतिवार सुबह न्यायालय पहुंच गए।
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कटघरे में खड़े रनवीर को देखने के लिए लोग न्यायालय कक्ष की खिड़की में झांकते दिखाई दिए। शुरुआत में लोग फांसी की सजा का नाम सुनकर सन्न रह जाते थे। वृद्ध रनवीर को देखकर लोग एक-दूसरे से कहते थे कि क्या इतना वृद्ध व्यक्ति अपनों की जान ले सकता है।
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बृहस्पतिवार सुबह जिला कारागार से रनवीर ने कड़ी सुरक्षा के साथ न्यायालय परिसर में प्रवेश किया। पुलिसकर्मी उसे लेकर न्यायालय में पहुंचे। इस बीच उसे देखने के लिए लोगों का जमावड़ा लगा रहा। सुरक्षा में लगे लोगों को न्यायालय कक्ष से दूर रहने के लिए कहते दिखाई दिए।
लेकिन लोग एक-एक कर न्यायालय कक्ष के निकट डटे रहे। सजा के बारे में पूछकर रनवीर को देखने के लिए जुटे रहे। पुलिसकर्मियों की फटकार का उन पर कोई असर नहीं हो रहा था। फांसी की सजा सुनने के बाद रनवीर काफी देर तक न्यायालय कक्ष में मौजूद रहा।
इसी बीच रनवीर का बड़ा भाई नम आंखों से मीडियाकर्मियों को जानकारी देता रहा। लेकिन वह भी भाई को देखने के लिए कई बार न्यायालय कक्ष में गया। वहां सुरक्षाकर्मी रनवीर को लेकर महाराजगंज जेल चले गए।
रनवीर के अधिवक्ता ने मांगा था आजीवन कारावास
हत्यारे रनवीर के अधिवक्ता रूकन सिंह पायल ने बताया कि उन्होंने बृहस्पतिवार को कोर्ट में सजा पर बहस की। जिसमें उन्होंने न्यायाधीश के सामने दलील दी कि रनवीर की उम्र करीब 70 साल है। वह पिछले आठ साल से जेल में है। रनवीर से समाज को कोई खतरा नहीं है। इसलिए रनवीर को आजीवन कारावास की सजा दी जाए।
हल्के में ली थी रनवीर की धमकी
सुखवीर और उसके परिजनों ने रनवीर की धमकी को हल्के में लिया था। ग्रामीणों ने बताया कि रनवीर ने सुखवीर का पूरा घर उजाड़ने की धमकी दी थी लेकिन सुखवीर कभी रनवीर की धमकी को गंभीरता से नहीं लेता था। यदि सुखवीर ने धमकियों को हल्के में न लिया होता तो वह दिन आज देखने को नहीं मिलता।
10 साल में 29 को फांसी की सजा
नरसंहार, गैंगरेप, रेप जैसे जघन्य अपराधों में जिले में एक दशक में करीब 29 लोगों को न्यायालय ने फांसी की सजा सुनाई है। इसमें से सिर्फ दो ही मामलों में फांसी की सजा राष्ट्रपति कार्यालय तक पहुंची।
इसमें से एक की सजा उम्रकैद में बदल गई जबकि दूसरे अभियुक्त संजय का मामला अभी लंबित है। इसके अलावा बच्ची से रेप के मामले में एक दोषी को हाईकोर्ट से बरी कर दिया गया था। नरबलि के मामले में कोर्ट ने 28 नवंबर 2006 को महिला समेत चार लोगों को फांसी की सजा सुनाई थी।
इसके बाद तिहरे हत्याकांड में 22 अगस्त 2007 को चार लोगों को फांसी की सजा सुनाई थी। 21 मई 2008 को न्यायाधीश नीरजा सिंह ने बालिका से दुष्कर्म कर हत्या के मामले में एक व्यक्ति को फांसी की सजा सुनाई थी। वहीं बालिका से दुष्कर्म के बाद हत्या के एक अन्य मामले में 21 अगस्त 2008 को एक युवक को फांसी की सजा सुनाई गई थी।
इसी तरह 2011 में अगौता थाना क्षेत्र में तीन लोगों की हत्या के मामले में एक व्यक्ति को फांसी की सजा सुनाई थी। 2011 में ही अनूपशहर में प्रॉपर्टी डीलर की हत्या के मामले में एक व्यक्ति को फांसी की सजा सुनाई थी।
नवंबर 2014 में एडीजे-15 कामिनी पाठक के न्यायालय ने नरौरा में बच्ची के साथ रेप के बाद हत्या के मामले में युवक को फांसी की सजा सुनाई थी। हालांकि बाद में हाईकोर्ट ने उसे बरी कर दिया था।
विवेचना में रह गई थी कमी
बुलंदशहर। बरारी हत्याकांड में एक भ्रूण सहित आठ लोगों की हत्या जैसे गंभीर मामले में विवेचक की लापरवाही से दो सहअभियुक्तों को कोर्ट ने बरी कर दिया। जबकि विवेचक ने मुख्य आरोपी रनवीर सिंह सहित चार के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पेश की थी। लेकिन आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य संकलन करने में बड़ी लापरवाही बरती गई।
वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि विवेचक ने घटना की रिपोर्ट लिखने वाले मनवीर पुत्र शिवचरन सिंह को भी 120बी का मुल्जिम बनाया था। लेकिन लापरवाहीपूर्वक की गई विवेचना में इस जघन्य हत्याकांड के मुख्य आरोपी रनवीर को छोड़कर रनवीर की पत्नी और भाई को न्यायिक प्रक्रिया में कमजोर व त्रुटिपूर्वक की गई विवेचना के कारण लाभ मिला।
अभियुक्त अरविंद ने अपने को किशोर घोषित करा लिया। उसका मामला अभी भी किशोर न्यायालय में लंबित है।
क्रिकेटर भुवनेश्वर के पिता से भी कर चुका है 80 लाख की ठगी
भारतीय क्रिकेटर भुवनेश्वर उर्फ भुव्वी के पिता रिटायर्ड दरोगा किरनपाल ने रनवीर की करीब 40 बीघा जमीन का 80 लाख रुपये में सौदा किया था। रनवीर ने 80 लाख रुपये ले लिए। लेकिन बैनामा करने से एन वक्त पहले ही बैनामा करने से मुकर गया।
किरनपाल ने मेरठ में रनवीर समेत उसके परिवार के कई लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर भी दर्ज कराई थी। इसके बाद रनवीर ने भुव्वी के पिता किरनपाल को धमकी भी दी थी। जेल में रहकर आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहने के बाद जेल प्रशासन ने रनवीर को महाराजगंज जेल में भेज दिया था। रनवीर की बेटी दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल के पद पर कार्यरत है।
पांच भाइयों में चौथे नंबर का है रनवीर
अधिवक्ता मोहम्मद शारिक ने बताया कि आठ साल तक चली सुनवाई में बारह लोगों की गवाही हुई। जिसमें अमरपाल मुख्य गवाह था। उसकी गवाही के चलते ही रनवीर पर आरोप साबित हो पाए। उसे इस दौरान कई बार धमकियां भी मिली।